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वैक्सीन से नहीं होता गर्भवती के प्लेसेंटा को नुकसान, शोध में खुलासा

वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्भवती महिलाओं में वैक्सीन के बाद एंटीबॉडी बन जाती है और वो भ्रूण में आसानी से स्थानान्तरित हो जाती है

गर्भधारण (Pregnancy) के दौरान प्लेसेंटा ऑक्सीजन (Oxygen) देने के लिए अहम अंग होता है.

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    गर्भवती महिलाओं (Pregnant Women) पर किए गए एक अध्ययन से मालूम चला है कि कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 Vaccine) लगाने से महिलाओं के प्लेसेंटा (Plecenta) पर कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. अध्ययन से ये भी पता चला है कि कोविड-19 की वैक्सीन गर्भवती महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित है. ये शोध ओब्सटेट्रिक्स एंड गायन्कॉल्जी जर्नल में प्रकाशित हुई है. गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन दिया जाना कितना सुरक्षित है, इसे लेकर अभी भी लगातार अध्ययन जारी है. भारत में वैक्सीन को लेकर अभी इस अध्ययन के विपरीत प्रोटोकॉल अपनाए जा रहे हैं. भारत में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वैक्सीन नहीं लेने की सलाह दी जा रही है वहीं कुछ देश जैसे यूएस और ब्राज़ील में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है. जानकारी के लिए बता दें कि इस अध्ययन के लेखक का कहना है कि वैक्सीन के महिलाओं के प्लेसेंटा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर किया गया ये अब तक का पहला अध्ययन है.

    क्या करता है प्लेसेंटा
    गर्भधारण के दौरान प्लेसेंटा ऑक्सीजन देने के लिए अहम अंग होता है. प्लेसेंटा गर्भधारण के दौरान बनने वाला पहला अंग होता है. जब भ्रूण में अन्य अंग विकसित हो रहे होते हैं, तो प्लेसेंटा सारे अंगो की जिम्मेदारी निभाता है, मसलन फेफड़ों के बनने के दौरान भ्रूण को ऑक्सीजन उपलब्ध कराना, जब आंते विकसित हो रही होती हैं तो भ्रूण को पोषक तत्व पहुंचाना. यही नहीं प्लेसेंटा ही इम्यून सिस्टम और हॉर्मोन का सही प्रबंधन करता है और मां को ये जानकारी देता है कि उसके गर्भ में मौजूद भ्रूण कोई बाहरी तत्व नहीं बल्कि उसके ही शरीर का अंग है और उसे पोसने का दारोमदार उस पर ही है. दरअसल प्लेसेंटा एयरप्लेन के ब्लैक बॉक्स की तरह होता है. अगर गर्भ धारण के दौरान कुछ भी गड़बड़ी होती है तो आमतौर पर हमें प्लेसेंटा में बदलाव देखने को मिलते हैं. इस तरह से हमे ये पता लगाने में आसानी होती है कि क्या परेशानी हो रही है.

    नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर डॉ जैफरी गोल्डस्टेन ने बताया है कि कोविड-19 की वैक्सीन प्लेसेंटा को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाती है. डॉ जैफरी यहां के पैथोलॉजी विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं. इससे पहले मई 2020 में वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन किया था जो अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल पैथोलॉजी में प्रकाशित हुआ था. इस अध्ययन में पाया गया कि ऐसी गर्भवती महिला जो सार्स कोव-2 कोरोना वायरस से पॉजिटिव है, उनके प्लेसेंटा में क्षति नजर आई (मां और भ्रूण के बीच रक्त का प्रवाह असामान्य था).

    इसके बाद इस साल अप्रैल में हुए अध्ययन से वैज्ञानिकों ने पाया कि गर्भवती महिलाओं में वैक्सीन के बाद एंटीबॉडी बन जाती है और वो भ्रूण में आसानी से स्थानान्तरित हो जाती है, ये शोध हाल ही में ओब्सटेट्रिक्स एंड गायन्कॉल्जी जर्नल में प्रकाशित हुई. शोध बताती है कि नवजात में एंटीबॉडी के पहुंचने का रास्ता मां से होकर ही जाता है. इस अध्ययन के लिए शोधार्थियों ने 84 ऐसे मरीज लिए जिन्हें वैक्सीन लग चुकी थी वहीं 116 मरीज ऐसे थे जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी थी.
    Published by:Purnima Acharya
    First published: