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इन खास तरीकों से हारेगा कोरोना वायरस, 'Herd Immunity' है सबसे बड़ा उपाय

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Updated: March 26, 2020, 2:24 PM IST
इन खास तरीकों से हारेगा कोरोना वायरस, 'Herd Immunity' है सबसे बड़ा उपाय
भारत ने 21 दिनों के लिए जनता कर्फ्यू लगा दिया है, ठीक उसी तरह से सभी देशों को कर्फ्यू लगा देना चाहिए. ऐसा करने से वायरस के ट्रांसमिशन को पूरी तरीके से रोका जा सकेगा.

कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए सबसे कारगर तरीकों में से पहला है लॉकडाउन. इसके जरिए इस वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है.

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  • Last Updated: March 26, 2020, 2:24 PM IST
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नोवेल कोरोना वायरस ने पूरे विश्व में कोहराम मचा रखा है. भारत सहित तमाम देशों ने 21 दिनों के लिए लॉकडाउन कर दिया है. साथ ही लोगों को सरकार द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की सलाह दी जा रही है और घरों के भीतर ही रहने को कहा जा रहा है. कोरोना से जुड़ी मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एमआईटी) की रिपोर्ट्स के अनुसार भले ही अभी तक कोरोना वायरस के इलाज के लिए किसी प्रकार की वैक्सीन या दवाई की खोज नहीं की जा सकी है लेकिन पूरी दुनिया में इस वायरस से लड़ने के लिए तीन खास तरीकों का असर साफ नजर आ रहा है. आइए जानते हैं इन खास तरीकों के बारे में...

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कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए सबसे कारगर तरीकों में से पहला है लॉकडाउन. लॉकडाउन के जरिए इस वायरस के संक्रमण को रोका जा सकता है. जिस तरह से भारत ने 21 दिनों के लिए जनता कर्फ्यू लगा दिया है, ठीक उसी तरह से सभी देशों को कर्फ्यू लगा देना चाहिए. ऐसा करने से वायरस के ट्रांसमिशन को पूरी तरीके से रोका जा सकेगा.

संक्रमण की रफ्तार को धीमा करना



जैसे कि यह वायरस पूरे विश्व में फैल चुका है इसीलिए सिर्फ लॉकडाउन के स्ट्रेटजी को अपनाने से काम नहीं चलेगा बल्कि इसके साथ ही संक्रमण की रफ्तार को भी धीमा करना होगा. कोरोना वायरस एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉकडाउन से केवल कोरोना के संक्रमण दर को धीमा किया जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं की उचित व्यवस्था की जा सके.

क्या है हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity)
डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से पूरी तरह निजात पाने के लिए वैक्सीन बनाने और उसे आम लोगों तक पहुंचाने में करीब एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है. वैक्सीन संक्रमण से लड़ने के लिए हर्ड इम्युनिटी तैयार करती है.

अगर वायरस का संक्रमण लगातार होता रहता है तो बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं. हालांकि इस दौरान कई लोग अपनी मजबूत इम्युनिटी के बल पर इस संक्रमण को हरा देते हैं. इसी को संक्रमण के प्रति इम्यून होना कहा जाता है. जब इम्यून लोगों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो वायरस अपना संक्रमण नहीं फैला पाता.

एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर कोरोना वायरस को नहीं रोका जा सका तो यह वायरस एक साल के भीतर दुनिया की करीब 60 फीसदी आबादी को संक्रमित कर देगा. इस स्थिति में लोगों के अंदर खुद-ब-खुद हर्ड इम्युनिटी आ जाएगी जो इस संक्रमण को फैलने से रोक देगी. हालांकि इस दौरान मानव जाति को बड़े स्तर पर हानि होगी. यही वजह है कि दुनिया के कई देशों में लॉकडाउन कर दिया गया है.

कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन
कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर यानी RO (इसे R-Naught पढ़ा जाता है) 2 और 2.5 के बीच है. इसका मतलब है कि इस संक्रमण से ग्रसित हर व्यक्ति दो या दो से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है. इस स्थिति में हर्ड इम्युनिटी ही कोरोना को रोक सकती है.

इस समय जिस तरह कोरोना एक से दो, दो से चार, चार से आठ और आठ से सोलह लोगों को संक्रमित कर रहा है, ऐसे में जल्द ही आधी से ज्यादा आबादी इसकी चपेट में आ जाएगी. लेकिन अगर दुनिया की 50 फीसदी जनसंख्या इम्यून हो जाए तो यह इंफेक्शन एक व्यक्ति से केवल एक व्यक्ति में ही जाएगा. ऐसी स्थिति में कोरोना वायरस का रिप्रोडक्शन नंबर दो से घटकर एक रह जाएगा.

अगर यह RO एक से भी कम हो जाए तो कोरोना वायरस खुद ही खत्म हो जाएगा. यही कारण है कि अगर दुनिया की 60 फीसदी आबादी इम्यून हो जाए तो ये वायरस धीरे-धीरे खुद ही खत्म हो जाएगा.

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अग्रेसिव सप्रेशन
दुनियाभर में अग्रेसिव सप्रेशन (Aggressive Suppression) जिसे हम लॉकडाउन भी कहते हैं, कोरोना के संक्रमण को रोकने का एक बड़ा उपाय भी बन गया है. इसमें बीमार लोगों को आइसोलेट किया जाता है और सोशल कॉन्टेक्ट को बंद कर दिया जाता है लेकिन अग्रेसिव सप्रेशन के कारण लोग अपनी हर्ड इम्युनिटी नहीं बना पा रहे हैं.

इसके चलते कोरोना वायरस से बचने के लिए आज के प्रभावी तरीके लंबे समय तक लोगों को फॉलो करने पड़ सकते हैं. हालांकि मानव जाति के लिए ये सुरक्षित भी है. आपको बता दें कि पोलियो और स्मॉलपाक्स जैसी बीमारियों को भी वैक्सीन की मदद से हर्ड इम्युनिटी बढ़ाकर ही हराया गया था.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: March 26, 2020, 1:35 PM IST
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