बच्चों में गुपचुप फैल रहा है कोरोना, इन अंगों में बना रहता है संक्रमणः शोध

बच्चों में गुपचुप फैल रहा है कोरोना, इन अंगों में बना रहता है संक्रमणः शोध
साउथ कोरिया में 18 फरवरी से 31 मार्च के बीच 91 एसिम्प्टोमैटिक, प्री-सिम्प्टोमैटिक और सिम्प्टोमैटिक बच्चे मिले थे.

रिसर्च में सामने आया कि 85 संक्रमित बच्चे टेस्टिंग से सिर्फ इसलिए दूर हो गए, क्योंकि उनमें लक्षण (Symptoms) नहीं दिखाई दे रहे थे. जब कोविड-19 (Covid-19) की जांच की गई तब उनमें लक्षण दिखाई दिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 2, 2020, 3:07 PM IST
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एक नई रिसर्च में सामने आया है कि बच्चों की नाक (Nose) और गले (Neck) में कई हफ्तों तक कोरोना वायरस (Coronavirus) मौजूद रह सकता है. इस दौरान ऐसा भी हो सकता है कि उनमें इसके कोई लक्षण (एसिम्प्टोमैटिक) न दिखाई दें. वॉशिंगटन के चिल्ड्रन नेशनल हॉस्पिटल की रिसर्च में ये दावा किया गया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि स्टडी बताती है कि कैसे कोरोना वायरस गुपचुप तरीके से अपना संक्रमण फैला सकता है. दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार कनाडा के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन साउथ कोरिया में किया है. उनका कहना है कि यह देखा गया है कि बच्चों (Kids) में कोरोना का संक्रमण गुपचुप तरीके से फैल रहा है.

एसिम्प्टोमैटिक बच्चों का दायरा बढ़ सकता है​​​​​
रिसर्च में सामने आया कि 85 संक्रमित बच्चे टेस्टिंग से सिर्फ इसलिए दूर हो गए, क्योंकि उनमें लक्षण नहीं दिखाई दे रहे थे. जब कोविड-19 की जांच की गई तब उनमें लक्षण दिखाई दिए. ऐसा आगे भी हुआ तो कम्युनिटी में एसिम्प्टोमैटिक बच्चों का दायरा बढ़ सकता है​​​​​. इस रिसर्च के नतीजे उस समय सामने आए जब अमेरिका की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का विरोध हो रहा है. सीडीसी ने हाल ही में एक गाइडलाइन जारी की थी जिसके मुताबिक एसिम्प्टोमैटिक मरीजों की जांच कराने की कोई जरूरत नहीं है. यह तब तक करने की जरूरत नहीं है, जब तक वह किसी कोरोना के मरीज के संपर्क में न आए हों. सीडीसी के इस फैसले को अमेरिकन अकादमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने खतरनाक पिछड़ा कदम कहा है.

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14 दिनों में लक्षण दिखाई दे सकते हैं


नई रिसर्च के मुताबिक, साउथ कोरिया में 18 फरवरी से 31 मार्च के बीच 91 एसिम्प्टोमैटिक, प्री-सिम्प्टोमैटिक और सिम्प्टोमैटिक बच्चे मिले थे जिनमें कोरोना की पुष्टि हुई थी. इनमें से 20 बच्चों में कोरोना के लक्षण नहीं दिखाई दिए थे. ये एसिम्प्टोमैटिक थे. 91 में से 18 ऐसे बच्चे भी थे जो प्री-सिम्प्टोमैटिक थे यानी इनमें कोई शुरुआती लक्षण तो नहीं दिखे लेकिन बाद में लक्षण दिख सकते हैं. वहीं बाकी बच्चों में कोरोना के साफ लक्षण दिखाई दिए. इनमें बुखार, खांसी, डायरिया, पेट में दर्द, स्वाद या गंध का पता न चल पाना जैसे लक्षण मुख्य रूप से शामिल थे. शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों में लक्षण न दिखने से पूरी कम्युनिटी में वायरस बड़ी ही आसानी से फैल सकता है. ये बच्चों के साथ खेलते हैं और कई तरह की गतिविधियों में शामिल रहते हैं. आपको बता दें कि एसिम्प्टोमैटिक बच्चों में 14 दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं.
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