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कोरोना का डेल्टा जैसा नया वेरिएंट खतरनाक! ठीक हो चुके लोगों को भी ले सकता है चपेट में - स्टडी

कोरोना का डेल्टा जैसा नया वेरिएंट खतरनाक! ठीक हो चुके लोगों को भी ले सकता है चपेट में - स्टडी

अभी तक इम्यून सिस्टम से बच निकलने वाले वेरिएंट की पहचान रेड फ्लैग (Red Flag) से की जाती रही है. स्टडी में जो नया वेरिएंट पाया गया है, हो सकता है कि वह येलो फ्लैग (Yellow Flag) का हो. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

अभी तक इम्यून सिस्टम से बच निकलने वाले वेरिएंट की पहचान रेड फ्लैग (Red Flag) से की जाती रही है. स्टडी में जो नया वेरिएंट पाया गया है, हो सकता है कि वह येलो फ्लैग (Yellow Flag) का हो. (प्रतीकात्मक फोटो-shutterstock.com)

Covid's Delta like Variant is Dangerous : एक नई स्टडी से सामने आई ये जानकारी कोरोना वायरस को लेकर एक चिंता पैदा करती है. इस स्टडी में ये दावा किया जा रहा है कि ये नया वेरिएंट संक्रमण को तेजी से फैला सकता है और दोनों वैक्सीन लेने वालों के साथ-साथ पहले इस वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों को भी दोबारा अपनी चपेट में ले सकता है. इस स्टडी के निष्कर्षों को मेडिकल जर्नल सेल (Cell) में प्रकाशित किया गया है. इस स्टडी से ये भी संकेत मिलता है कि तेजी से फैलने वाला वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकता है, जो आंशिक रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को चकमा दे सकता है. आपको बता दें कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) माना जाता है.

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    Covid’s Delta like Variant is Dangerous : कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) जैसे गुणों वाला सार्स-सीओवी-2 (SARS-CoV-2) वेरिएंट महामारी को और अधिक गंभीर बना सकता है. एक नई स्टडी से सामने आई ये जानकारी कोरोना वायरस को लेकर एक चिंता पैदा करती है. इस स्टडी में ये दावा किया जा रहा है कि ये नया वेरिएंट संक्रमण को तेजी से फैला सकता है और दोनों वैक्सीन लेने वालों के साथ-साथ पहले इस वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों को भी दोबारा अपनी चपेट में ले सकता है. इस स्टडी के निष्कर्षों को मेडिकल जर्नल सेल (Cell) में प्रकाशित किया गया है. इस स्टडी से ये भी संकेत मिलता है कि तेजी से फैलने वाला वेरिएंट डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकता है, जो आंशिक रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को चकमा दे सकता है. आपको बता दें कि भारत में कोरोना की दूसरी लहर का कारण डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) माना जाता है.

    हार्वर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के टीएस चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिसर्चर मैरी बुशमैन (Mary Bushman)  के अनुसार, ‘अभी तक इम्यून सिस्टम से बच निकलने वाले वेरिएंट की पहचान रेड फ्लैग (Red Flag) से की जाती रही है. स्टडी में जो वेरिएंट पाया गया है, हो सकता है कि वह येलो फ्लैग (Yellow Flag) का है, लेकिन ये जब बढ़ी हुई प्रसार क्षमता के साथ जुड़ता है, तो गंभीर बन जाता है. डेल्टा वेरिएंट भी बढ़ी हुई प्रसार क्षमता वाला वेरिएंट है, जो भारत में विनाशकारी दूसरी लहर का कारण माना जाता है.’

    क्या करना है?
    साइंटिस्टों ने यह भी पाया कि मास्क पहनकर और शारीरिक दूरी बनाए रखकर संक्रमण को बहुत हद तक दूर रखा जा सकता है. संक्रमण के प्रसार को रोकने में टीकाकरण भी बहुत कारगर है. गौरतलब है कि दुनिया के कई देशों में अभी भी कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.

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    अमेरिका, रूस समेत कई देशों मे रिकार्ड स्तर पर मौतें दर्ज हो रही है. रूस में बीते 24 घंटे में महामारी से रिकार्ड 1,254 लोगों की मौत हो गई जबकि 37,120 नए मामले सामने आए हैं.

    भारत के पड़ोसी देश में मिला डेल्टा का नया वेरिएंट
    पड़ोसी देश श्रीलंका में 19 नवंबर को कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट (New version on Corona Delta variant) के नए प्रकार बी.1.617.2.एवाई 104 का पता चला, जो इस देश में सामने आया कोरोना वायरस का तीसरा उत्परिवर्तित स्वरूप (mutated form) है.

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    सार्स-सीओवी-2 का डेल्टा (बी.1.617.2) स्वरूप अत्यंत संक्रामक है और दुनियाभर में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने के पीछे मुख्य कारण है और यहां तक कि बड़ी संख्या में टीका (Corona Vaccination) लगवा चुकी आबादी पर भी इसके प्रभाव दिखाई दिये हैं.

    Tags: Coronavirus, Delta Variant, Health, Health News

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