Covid 19: वैक्सीन बन जाने से ही नहीं रुकेगा कोरोना संक्रमण, अपनाने होंगे ये तरीके भी

Covid 19: वैक्सीन बन जाने से ही नहीं रुकेगा कोरोना संक्रमण, अपनाने होंगे ये तरीके भी
कोरोना वायरस

प्रो. पीटर पाउट कोरोना वायरस (Coronavirus Infection) पर स्टडी के दौरान खुद भी उसकी चपेट में आ गए थे. हालांकि उनका तीन महीने तक इलाज चला और अब वो ठीक हैं.

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पूरे विश्व में कोरोना वायरस (Covid 19) महामारी को लेकर उहापोह है और ज़्यादातर वैज्ञानिक इसका वैक्सीन बनाने में जुटे हुए हैं. कईयों का यह भी कहना है कि साल के अंत तक ऐसा टीका खोज लिया जाएगा तो कोरोना संक्रमण (Coronavirus Infection) को रोकने में कारगर साबित होगा. लेकिन इस सिलसिले में प्रो. पीटर लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एवं ट्रॉपिकल मेडिसिन के डीन वायरस विशेषज्ञ प्रो. पीटर पाउट ने हिंदुस्तान को जानकारी दी कि केवल वैक्सीन से ही कोरोना वायरस पर लगाम नहीं लगायी जा सकती है. उनका कहना है कि वैक्सीन की सफलता दर काफी कम होती है और इसे बनाने में एक से डेढ़ साल तक का समय लग जाता है. अगर टीका बनाने में हम कोई शॉर्टकट मेथड इस्तेमाल करते हैं तो इसका टीके की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ सकता है.

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उन्होंने कहा कि नार्मल टीके केवल 10 फीसदी सफलता दर वाले होते हैं लेकिन अगर कोरोना का टीका 70 फीसदी भी प्रभावी हुआ तो यह वाकई काफी बड़ी कामयाबी साबित होगी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब तक कोरोना का टीका नहीं बन जाता है तब तक लोगों को सुरक्षा का पालन करते हुए मास्क, दस्ताने और सामाजिक दूरी का पूरी तरह से पालन करना होगा.
प्रो. पीटर पाउट ने यह भी कहा कि कोरोना वायरस की वैक्सीन आने के बाद भी लोगों को लंबे समय तक इन नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा. यह बिल्कुल इस तरह होगा जैसा एचआईवी के इलाज से बेहतर है सुरक्षा अपना ताकि परेशानी सामने ही ना आए.

बता दें कि प्रो. पीटर पाउट कोरोना वायरस पर स्टडी के दौरान खुद भी उसकी चपेट में आ गए थे. हालांकि उनका तीन महीने तक इलाज चला और अब वो ठीक हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस पूरे शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है और यह बेहद खतरनाक है.
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