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Lockdown के कारण बुजुर्गों में बढ़ रहा है अकेलापन और डिप्रेशनः शोध


Updated: March 27, 2020, 7:51 AM IST
Lockdown के कारण बुजुर्गों में बढ़ रहा है अकेलापन और डिप्रेशनः शोध
स्थानीय वातावरण से कट जाने पर बुजुर्ग अकेला महसूस करते हैं.

कोरोना वायरस (Coronavirus) की महामारी के प्रसार को रोकने के लिए दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन (lockdown) किया गया है. इसके कारण बुजुर्गों में बढ़ रहा अकेलापन महामारी (Loneliness epidemic) बन सकता है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) की महामारी के प्रसार को रोकने के लिए दुनियाभर के कई देशों में लॉकडाउन (lockdown) किया गया है. इसके कारण बुजुर्गों में बढ़ रहा अकेलापन महामारी (Loneliness epidemic) बन सकता है. एक हालिया शोध में यह खुलासा किया गया है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि 50 साल की उम्र के ऊपर के लोगों को परिवहन, मनोरंजन और अन्य स्थानीय गतिविधियों से काट देने के कारण उनमें अकेलापन और अवसाद का स्तर बढ़ता है. ये परिणाम एक सर्वेक्षण पर आधारित है, जो 2011 से 2012 के बीच में फिनलैंड, पोलैंड और स्पेन में किया गया था. इसमें मौजूद प्रतिभागियों की उम्र 50 वर्ष से ऊपर थी. इस शोध में 5,912 लोगों को शामिल किया गया था.

इन चीजों पर आधारित था शोध

यूनिवर्सिटी ऑफ बार्सिलोना (University of Barcelona) के सामाजिक विशेषज्ञ जोआन आबे और उनके सहयोगियों की टीम ने 50 की उम्र के ऊपर के प्रतिभागियों से पूछा कि वह कितना अकेला महसूस करते थे, उनका सामाजिक नेटवर्क कैसा था और वे स्थानीय वातावरण का इस्तेमाल कैसे करते थे. शोधकर्ताओं ने पाया कि स्थानीय वातावरण ऐसी जगह होती है, जिसे लोग खुद बनाते हैं. इसी वातावरण में लोग रहते हैं, काम करते हैं और हर दिन नई चीजों का निर्माण करते हैं.



इस स्थानीय वातावरण में हरी-भरी जगहें जैसे पार्क होते हैं, ट्रैफिक का आवागमन होता है, स्थानीय सुविधाओं तक पहुंच होती है, साफ सफाई होती है और इसके अलावा कई सार्वजनिक जगहें होती हैं. यहां जाकर लोग एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं और अपने अकेलेपन को दूर करते हैं. शोधकर्ताओं ने सर्वे के दौरान पाया कि 11 फीसदी प्रतिभागियों ने अकेलेपन की शिकायत की और 6.6 फीसदी प्रतिभागियों को गंभीर अवसाद की समस्याओं से जूझते हुए पाया गया.

इन लोगों में दिखा कम अकेलापन

शोध में पाया गया कि जो प्रतिभागी आसपास के वातावरण को लेकर सकारात्मक महसूस करते थे, उनमें अकेलेपन का स्तर कम देखा गया. लेकिन, इससे गंभीर अवसाद के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. जो लोग स्थानीय वातावरण का ज्यादा इस्तेमाल करते हुए नहीं पाए गए उनमें अकेलेपन का स्तर अन्य लोगों की तुलना में ज्यादा था. शोधकर्ताओं ने पाया कि एक बुजुर्ग महिला, विधवा महिला और अविवाहित महिला जो 50 की उम्र से ऊपर है, उनमें अकेलेपन का असर काफी हो सकता है.

ऐसे खत्म हो सकता है अकेलापन

आसपास के वातावरण को बेहतर करना जरूरी शोधकर्ता जुआन आबेला ने कहा, आसपास के वातावरण को बेहतर करने से और स्थानीय सुविधाओं में बढ़ोतरी करने से, बुजुर्गों के चलने करने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है. साथ ही उनके अकेलेपन में भी कमी की जा सकती है. इससे बुजुर्गों के चलने-फिरने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है और अकेलेपन में कमी की जा सकती है.

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First published: March 27, 2020, 7:26 AM IST
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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