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    कोरोना वायरस संक्रमण से बच जाएगा देश! लेकिन बाकी रोगों से कैसे?

    अस्पतालों की ओपीडी सेवा बंद होने के कारण रेगुलर बेसिस पर टेस्ट कराने वाले लोगों परेशानी हो रही है.
    अस्पतालों की ओपीडी सेवा बंद होने के कारण रेगुलर बेसिस पर टेस्ट कराने वाले लोगों परेशानी हो रही है.

    ओपीडी सेवा बंद होने के कारण डायबिटीज के मरीजों को शुगर टेस्ट (Sugar test), हार्ट प्रॉब्लम से सुरक्षा के लिए पेल्विक टेस्ट, ट्रायग्लियसेराइट के कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कराने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: March 27, 2020, 6:30 PM IST
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    कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण भारत में अपने पैर न पसार पाए इसके लिए देश के ज्यादातर हिस्से को लॉकडाउन (lockdown) कर दिया गया है. लोगों का घर से बिना कारण निकलना मना है. देश के लगभग सभी राज्यों के अस्पतालों ने ओपीडी सेवा बंद कर दी है. ओपीडी सेवा बंद होने के कारण डायबिटीज के मरीजों को शुगर टेस्ट (Sugar test), हार्ट प्रॉब्लम से सुरक्षा के लिए पेल्विक टेस्ट, ट्रायग्लियसेराइट के कोलेस्ट्रॉल टेस्ट कराने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. रेगुलर बेसिस पर टेस्ट न हो पाने के कारण इन मरीजों को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

    लॉकडाउन होने के कारण होम लैब टेस्ट भी अपनी सुविधा लोगों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं. हालांकि सरकार द्वारा कोशिश की जा रही है इन कंपनियों को ई-पास मुहैया करवाए जाए, ताकि बाकि के मरीजों को परेशानी न हो. लेकिन ये प्रोसेस लंबा होने के कारण इसमें थोड़ा सा वक्त लग रहा है. ऐसा कि कुछ हुआ पैथोलॉजिकल सर्विस देने वाली कंपनी Healthians के साथ. उनके मुताबिक, लॉकडाउन के कारण 600 टेस्ट प्रभावित हुए हैं. इसके साथ ही 2500 सैंपल डोर स्टेप से कलैक्ट नहीं जा सकें. ये सभी मामले अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, कानपुर, लखनऊ, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में देखने को मिले है.

    जब हमने इस बारे में Healthians के सीईओ दीपक से बातचीत की तो उन्होंने बताया लॉकडाउन के कारण रेगुलर बेसिस पर शुगर, कैंसर, ब्लड या यूरिन टेस्ट करवाने वाले मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है.



    डेली बेसिस पर इतने हजार लोग करवाते हैं टेस्ट
    डाटा के अनुसार डेली बेसिस पर उनके द्वारा लगभग 3500 लोगों का टेस्ट करवाया जाता है. इस स्थिति में जब लैब के कर्मचारी किसी मरीज के पास उसके टेस्ट के लिए ब्लड, यूरीन कलेक्ट करने जा रहे हैं तो पुलिस द्वारा उन्हें रोका जा रहा है. हालांकि पुलिस अधिकारी अपना काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें ये बात समझनी चाहिए की ये टेस्ट नहीं होंगे तो बाकि रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या में इजाफा हो सकता है.

    कर्मचारियों की तैयारी है पूरी

    उन्होंने बताया कि लैब के कर्मचारियों को कोरोना प्रोटेक्शन सूट, मास्क, दस्ताने सब दिए गए हैं, ताकि किसी तरह की कोई चूक न हो सके. कंपनी के सभी कर्मचारियों की गाड़ी पर बोर्ड्स लगाए गए हैं और उन पर लिखा गया है कि वो हेल्थ सर्विस प्रोवाइड करवाते हैं.

    सरकार की करेगी मदद

    कोरोना वायरस संक्रमण भारत में ज्यादा न फैले इसके लिए सरकार द्वारा लॉकडाउन का फैसला अचानक लिया गया था. वर्तमान में केंद्र और सभी राज्य सरकारें इस कोशिश में लगी हुई है कि बाकि मरीजों को भी पर्याप्त इलाज मिल सके. सरकार द्वारा इस तरह की कंपनियों को पास देने की तैयारियां की जा रही हैं.

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    कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए किया जाता डायग्नोस्टिक टेस्ट

    यहां हम आपको बताते चलें कि कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट किया जाता है. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक, पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) का टेस्ट किसी नामी लैब में ही कराया जाता है. पीसीआर टेस्ट गले, श्वास नली के लिक्विड और मुंह की लार की सैंपल के आधार पर किए जाते हैं. इस टेस्ट से इन्फ्लूएंजा ए, इन्फ्लूएंजा बी और एच1 एन1 वायरस का पता चलता है. डॉक्टरों के मुताबिक, गले और नाक के पिछले हिस्सों में दो ऐसी जगहें पाई जाती हैं जहां पर कोरोना वायरस होने की संभावना ज्यादा रहती है. स्वैब के जरिए गले और नाक की इन कोशिशकाओं को उठाया जाता है. स्वैब टेस्ट का इस्तेमाल सैंपल में मिले जेनेटिक मैटेरियल को कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड से मिलाने में किया जाता है.
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