भारत में नहीं टिक सकता COVID-19!, सर्वे में पढ़ें क्या बोले लोग

भारत में नहीं टिक सकता COVID-19!, सर्वे में पढ़ें क्या बोले लोग
सर्वेक्षण से पता चला है कि 65 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि भारत COVID-19 से प्रभावित नहीं होगा क्योंकि यह एक गर्म देश है.

देश में बहुत से लोग अभी भी कोरोना वायरस से बचाव करने में विफल हो रहे हैं. ऐसा ही एक सर्वेक्षण सामने आया है जिसमें यह पता चलता है कि इस महामारी को लेकर लोगों का क्या सोचना है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2020, 12:45 PM IST
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भारत सरकार, वैज्ञानिकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, मशहूर हस्तियों और लोगों में विशेष पहचान रखने वाली कई प्रभावशाली शख़्सियतों ने कोरोनो वायरस महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बहुत लंबा रास्ता तय किया है, जिससे पहले ही भारत में पांच लोगों की जान जा चुकी है. दरअसल, सही जानकारी और जनता को जागरूक करने वाले संदेशों के अभाव में इस महामारी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. इसलिए देश में बहुत से लोग अभी भी कोरोना वायरस से बचाव करने में विफल हो रहे हैं. ऐसा ही एक सर्वेक्षण सामने आया है जिसमें यह पता चलता है कि इस महामारी को लेकर लोगों का क्या सोचना है.

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भारत एक गर्म देश है
जोश टॉक्स द्वारा किए गए इस सर्वेक्षण से पता चला है कि 65 प्रतिशत भारतीयों का मानना है कि भारत COVID-19 से प्रभावित नहीं होगा क्योंकि यह एक गर्म देश है. सर्वेक्षण में 45,000 और 40,700 उत्तरदाताओं के दो समूहों से प्रश्न पूछे गए थे, जिसमें पूरे भारत के अलग-अलग हिस्सों से आकंड़े लिए गए हैं. इस सर्वेक्षण के प्रश्न हिंदी, बांग्ला, तेलूगू, तमिल, मलयालम और पंजाबी सहित छह भाषाओं में तैयार किए गए थे. इसका उद्देश्य शहरी भारतीयों की जागरूक करना और कोरोनो वायरस की तैयारियों का आंकलन करना था.



गर्मी के मौसम में वायरस का असर कम


उत्तरदाताओं के पहले समूह के 65.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि वायरस भारत को प्रभावित नहीं करेगा क्योंकि यह एक गर्म देश है. हालांकि यह उन मिथकों में से एक है, जो इस वायरस के बारे में अनजान हैं. इसमें कई विशेषज्ञ भी शामिल हैं जिनका मत है कि गर्मियों के मौसम में COVID-19 का असर कम हो जाएगा लेकिन वास्तव में इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है. दरअसल, COVID-19 एक नया वायरस है जो पहले मनुष्यों के लिए अज्ञात था और वैज्ञानिक अभी केवल इसकी उत्पत्ति को समझने में लगे हैं.

कोरोना के बारे में गलत धारणा
इसके अलावा, सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि लगभग 12.5 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना ​​था कि कोरोना वायरस केवल 60 वर्ष की आयु से ऊपर के लोगों को ही हो सकता है. यह कोरोना वायरस के बारे में सबसे गलत व आम धारणाओं में से एक है क्योंकि जांच में कई युवा भी कोरोनो वायरस से पीड़ित पाए गए हैं. यहां तक कि 21 वर्षीय स्पेनिश फुटबॉल कोच फ्रांसिस्को गार्सिया कोरोना वायरस के चलते अपनी जान तक गंवा चुके हैं.

अंडा या चिकन खाने से हो सकती है परेशानी
केवल यही एक गलत धारणा नहीं थीं जो सर्वेक्षण में सामने आई थी. ऐसी ही कई और भी धारणाएं हैं. जैसे उत्तरदाताओं में से 6.1 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अंडे या चिकन खाने से लोग COVID-19 की चपेट में आ जाएंगे. वहीं 5.7 प्रतिशत लोगों का कहना है कि इस बीमारी को गोमूत्र (गौमूत्र) या लहसुन के सेवन से ठीक किया जा सकता है. सर्वेक्षण का दूसरा प्रश्न कोरोनो वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोगों की तैयारियों जुड़ा हुआ था. इस सवाल के जवाब में भारत के 40,700 उत्तरदाताओं में से लगभग 76 प्रतिशत ने कहा कि स्वच्छता बनाए रखें और एक स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें.

यात्रा करने से बचें
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और यात्रा करते समय एक फेस मास्क का इस्तेमाल जरूर करें. इन लोगों ने ये भी कहा कि खांसी होने या पांच दिनों तक किसी भी लक्षण के नजर आने पर डॉक्टर से चैकअप जरूर कराएं. एक ऐसी अफवाह भी फैली थी कि कोरोना वायरस ने कुछ ही महीनों के भीतर पूरी दुनिया में 10,000 से अधिक लोगों की जान ले ली है. कुछ का यह मानना था कि चवनप्राश या आंवला खाने से इस वायरस से बचा जा सकता है.

धूप सेंकने का सुझाव
वहीं एक ने टिप्पणी की है कि सुबह और रात में एक चम्मच आंवला पाउडर का सेवन करें और कोई कोरोना वायरस कभी भी आपको प्रभावित नहीं कर सकता है. वहीं कुछ का ये मानना था कि बचाव के लिए अपने शरीर को कपड़े से ढक कर रखें और संक्रमण से बचने के उपाय में धूप सेकने का भी सुझाव दिया गया है. इस बिंदु पर ध्यान देना फिर से महत्वपूर्ण है कि इन सभी धारणाओं का कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं है. भारत में कोरोना वायरस के पॉजीटिव मामलों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर महाराष्ट्र जैसी कई राज्य सरकारों ने पांच से अधिक लोगों के एक स्थान पर जमा होने पर रोक लगाने का आह्वान किया है.

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ऑनलाइन काम करने का निर्देश
कई कार्यालयों और शैक्षिक संस्थानों ने संचालन को ऑनलाइन करने का फैसला किया है. बड़े पैमाने पर लोगों को वायरस के प्रसार को कम करने के लिए सामाजिक दूरी बनाने की सलाह दी जा रही है. ऐसे समय में, रोकथाम को रोकने में गलत जानकारी सबको प्रभावित कर सकती है. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने गत गुरुवार शाम को राष्ट्र को संबोधित किया था और अलगाव के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 22 मार्च को "जनता कर्फ्यू" के रूप में मनाये जाने की घोषणा की है.
First published: March 21, 2020, 11:38 AM IST
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