Covid-19: क्‍या होता है कूलिंग पीरियड, कोरोना महामारी से क्या है इसका संबंध

जैसे ही संक्रमित व्यक्तियों में एंटीबॉडी का असर कम या खत्म होता है तो वह फिर से संक्रमित होने लगते हैं.
जैसे ही संक्रमित व्यक्तियों में एंटीबॉडी का असर कम या खत्म होता है तो वह फिर से संक्रमित होने लगते हैं.

तमाम तरह की रिसर्च (Research) में यह बात सामने आई है कि एक बार संक्रमण (Infection) के बाद किसी भी व्यक्ति के शरीर में कम से कम तीन महीने तक एंटीबॉडी (Antibody) प्रभावी रहती है. इस तीन महीने को ही विशेषज्ञ कूलिंग पीरियड (Cooling Period) कहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 9:16 PM IST
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एक्सपर्ट्स की मानें तो किसी देश में कोविड-19 (Covid-19) के संक्रमण के बाद अगर हर्ड इम्युनिटी (Herd Immunity) हासिल हो जाती है तो उसकी संक्रमण चेन टूटती है. ऐसे में हर रोज नए मामलों की संख्या में कमी आने लगती है. यह कमी लगातार करीब तीन महीने तक जारी रहती है. ऐसा इसलिए क्योंकि तमाम तरह की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि एक बार संक्रमण के बाद किसी भी व्यक्ति के शरीर में कम से कम तीन महीने तक एंटीबॉडी (Antibody) प्रभावी रहती है. इस तीन महीने को ही विशेषज्ञ कूलिंग पीरियड (Cooling Period) कहते हैं. इसमें नए मामलों का ग्राफ लगातार नीचे गिरता रहता है, लेकिन जैसे ही संक्रमित व्यक्तियों में एंटीबॉडी का असर कम या खत्म होता है तो वह फिर से संक्रमित होने लगते हैं और संक्रमण के नए दौर की शुरुआत होती है. कई देशों की तस्वीर इस बात की पुष्टि करती है.

हालांकि भारत के मामले में अच्छी बात यह है कि जब तक यहां संक्रमण के नए दौर की शुरुआत होगी, तब तक इस महामारी की वैक्सीन शायद उपलब्ध हो जाए. ऐसे में इस अहम समयावधि के दौरान लोगों को अपनी इम्युनिटी को बनाए रखने का हर जरूरी प्रयास करना चाहिए. अपने दैनिक कामकाज को निपटाने के दौरान तमाम जरूरी एहतियात बरतनी चाहिए. ऐसा करने से कोरोना वायरस पर जीत तय है.





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भारत के हालात
देशव्यापी हुए सीरो सर्वे में ये बात सामने आई है कि जितने संक्रमित सामने होते हैं दरअसल उनकी वास्तविक संख्या उसकी 80 गुना के करीब होती है. इस लिहाज से अगर आज कुल संक्रमितों की संख्या 50 लाख से ऊपर हो चुकी है तो उनकी वास्तविक संख्या करीब 50 करोड़ हो सकती है यानी करीब आधी आबादी को कोरोना वायरस संक्रमित कर चुका है. ऐसे में देश हर्ड इम्युनिटी के करीब है. संक्रमण की इस स्थिर अवस्था की पुष्टि रोजाना नए मामले भी करते हैं. जांच के मामले में भारत टॉप पर है. रोजाना यहां 10 से 13 लाख टेस्ट हो रहे हैं, लेकिन नए मामलों की संख्या 90 से 98 हजार के बीच लटक रही है यानी यह एक स्थिर अवस्था की तस्वीर दिखाती है.

पश्चिम के देशों का अनुभव बताता है कि मामलों में गिरावट से पहले कई दिनों तक आने वाले नए मामलों की संख्या नियत रही थी. यानी भारत में भी अब नए मामलों की संख्या में उत्तरोत्तर कमी देखी जा सकेगी और तीन महीने तक यह प्रवृति जारी रह सकती है. इसके बाद ही देश में संक्रमण के नए दौर की शुरुआत हो सकती है. वहीं कुछ अन्य देशों के आंकड़े एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं.

ब्रिटेन: ब्रिटेन में अप्रैल और मई में बहुत तेजी से संक्रमण के मामले सामने आए. इसके बाद जून, जुलाई और अगस्त में संक्रमण के मामलों में अपेक्षाकृत गिरावट दर्ज की गई. हालांकि एक बार फिर यहां मामलों में बढ़ोतरी हो रही है.

स्पेन: मार्च और अप्रैल में रोजाना बड़ी संख्या में मामले सामने आए. इसके बाद कूलिंग पीरियड के दौरान गिरावट देखी गई. मई और जून में दैनिक मामले 500 से भी कम रह गए. अब यहां बढ़ोतरी लगातार जारी है.

फ्रांस: फ्रांस की स्थिति भी ऐसी ही है. यहां पर मार्च-अप्रैल के मध्य आंकड़े बहुत ही तेजी से बढ़े, लेकिन मई, जून और जुलाई में गिरावट आई. हालांकि यहां भी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर मामलों में बढ़ोतरी कर रही है.

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इटली: इटली में मार्च के आखिर में सर्वाधिक मामले सामने आए थे. हालांकि अप्रैल में इसमें गिरावट आने लगी, लेकिन यह जुला-अगस्त में तो कई बार दैनिक मामले 200 से भी कम आने लगे. हालांकि अब प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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