टीनएज बच्चों संग बनाएं दोस्ती का रिश्ता, तो समझाना होगा आसान

टीनएज बच्चों संग बनाएं दोस्ती का रिश्ता, तो समझाना होगा आसान
बच्‍चों से दोस्ती जैसा रिश्‍ता हो तो कम्युनिकेशन आसान हो जाता है.

टीनएजर्स (Teenagers) की अपनी समस्‍याएं होती हैं, जिन्‍हें वह अक्‍सर अपने पैरेंट्स (Parents) के साथ शेयर नहीं कर पाते. शायद इसीलिए कहा गया है कि जब बच्‍चे बड़े होने लगें तो उनके साथ दोस्‍ताना व्‍यवहार (Friendly Behavior) रखना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 9, 2020, 9:19 AM IST
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उम्र बढ़ने के साथ टीनएजर्स (Teenagers) की अपनी समस्‍याएं होती हैं, जिन्‍हें वह अक्‍सर अपने पैरेंट्स (Parents) के साथ शेयर नहीं कर पाते. मगर दोस्‍तों (Friends) से जरूर शेयर कर लेते हैं. शायद इसीलिए कहा गया है कि जब बच्‍चे बड़े होने लगें तो उनके साथ दोस्‍ताना व्‍यवहार (Friendly Behavior) रखना चाहिए. माता-पिता को हमेशा अपने बच्चों का दोस्त बनकर रहना चाहिए. जब आपके बच्‍चों और आपके बीच दोस्ती जैसा रिश्‍ता हो जाता है, तो कम्युनिकेशन भी काफी आसान हो जाता है.

बच्‍चे अपने मन की बात अपने पैरेंट्स से बिना झिझक के कह पाते हैं. वहीं पैरेंट्स भी बच्‍चों के साथ अपनी बातें शेयर कर सकते हैं, दोस्‍त बन कर बच्‍चों को समझाना कहीं आसान होता है. अगर आप चाहें तो कुछ आसान टिप्स को अपना कर अपने बच्‍चों से दोस्‍ती का रिश्‍ता बना सकते हैं और उनके साथ अपने रिश्‍ते को और खूबसूरत बना सकते हैं.

रिश्‍तों को है साथ की जरूरत
आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की कमी है. ऐसे में यह कमी रिश्‍तों को भी किसी न किसी तरह प्रभावित कर रही है. बच्‍चे चाहते हैं कि पैरेंट्स उनके साथ रहें, उनसे बात करें. मगर जब काम और जिम्‍मेदारियों के बीच पैरेंट्स अपने बच्‍चों को समय नहीं दे पाते तो रिश्‍तों में एक तरह की दूरी आने लगती है. इसलिए जरूरी है कि बच्‍चों के साथ कुछ समय बिताया जाए. ज्‍यादा समय न द सकें तो कम से कम एक घंटा तो उनके साथ जरूर रहें. अगर आप रोज अपने बच्‍चों के साथ एक घंटा भी बिताते हैं तो आपका उनके साथ दोस्‍ती का रिश्‍ता डेवलप होगा.
उन्‍हें अपनेपन का एहसास कराएं


पैरेंट्स अपने बच्‍चों को एहसास कराएं कि कैसे भी हालात हों, आप हमेशा उनके साथ रहेंगे. आप उनकी हर बात को समझेंगे और बच्‍चों से कोई गलती हुई तब भी एक दोस्‍त की तरह उनका साथ नहीं छोड़ेंगे. इससे यह फायदा होगा कि बच्‍चे अपने मन की हर बात पैरेंट्स के साथ शेयर कर सकेंगे.

नजर रखें मगर आजादी भी दें
बच्‍चों को यह एहसास न होने पाए कि आप उन पर हर बात के लिए पाब‍ंदियां लगाते हैं, इससे बच्‍चे विद्रोही स्‍वभाव के होने लगेंगे. इसलिए बच्‍चों के साथ दोस्‍ताना रवैया अपनाए रखें. बढ़ती उम्र के बच्‍चों को आपकी ओर से फ्रीडम मिलेगी तो वह आपके ज्‍यादा करीब आएंगे. आपसे हर बात कह पाएंगे. मगर इस बात का भी ख्‍याल रखें कि बच्‍चे अंजाने में कहीं किसी बुरी संगत में न आ जाएं. इसलिए अपने बच्‍चों को आजादी तो दें मगर उन पर नजर भी रखें.

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हर समय टोकना ठीक नहीं
बच्‍चों को आपके व्‍यवहार से यह नहीं लगना चाहिए कि पैरेंट्स हर समय उन्‍हें उपदेश देते रहते हैं कि यह करो, यह मत करो. वहां मत जाओ, यह ठीक नहीं है आदि. इसकी बजाय बच्‍चों से दोस्‍ती गांठें. उन्‍हें दोस्‍त बन कर समझाने की कोशिश करें कि क्‍या सही है और क्‍या गलत. ऐसे में वे हर बात आपसे शेयर भी करेंगे और मानेंगे भी. मगर इस तरह के दोस्‍ताना संबंध बनाने में समय लग सकता है इसलिए जल्‍दबाजी न करें. अपने बच्‍चों को समझने का प्रयास करें.
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