Achala Saptami 2019: इस व्रत की महिमा से वैश्या इंदुमती को मिला स्वर्ग, जानिए व्रत कथा

Achala Saptami 2019: इस व्रत से इतना पुण्य मिलता है जितना कि पूरे साल सूर्य देव की पूजा करने से, भगवान कृष्ण ने खुद युधिष्ठिर को बताया इस व्रत की महिमा के बारे में.

News18Hindi
Updated: February 12, 2019, 9:54 AM IST
Achala Saptami 2019: इस व्रत की महिमा से वैश्या इंदुमती को मिला स्वर्ग, जानिए व्रत कथा
सूर्य देव
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Updated: February 12, 2019, 9:54 AM IST
Achala Saptami 2019: हिन्दू धर्म में व्रत और त्यौहार का काफी महत्व है. भक्तजन 12 फ़रवरी मंगलवार यानी आज के दिन लोगों ने अचला सप्तमी/रथ सप्तमी का व्रत रखा है.  यह व्रत हमेशा माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को किया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा और इसकी पूजा-विधि के बारे में बताया था. आइए जानते हैं क्या है अचला सप्तमी व्रत की महिमा और कैसे करें व्रत ताकि मिले इसका पूरा फल.

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अचला-सप्तमी व्रत कथा:
मगध की एक वैश्या थी, इंदुमती. उसकी ख्याति केवल नगर में ही नहीं बल्कि कई देशों तक फैली हुई थी. एक दिन जीवन चक्र पर विचार करते हुए इंदुमती ने सोचा कि संसार में कुछ भी शाश्वत नहीं है. ऐसे में ऐसा क्या किया जाए कि सांसारिक कार्य करते हुए मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति हो सके. इस विचार के साथ इंदुमती महर्षि वशिष्ठ के आश्रम गयी ताकि उनसे इसका उपाय पूछ सके. वैश्या ने ऋषि से कहा कि मैंने अपने पूरे जीवन में कभी कोई दान, पुण्य नहीं किया है. इसलिए कृपा करके मुझे कुछ ऐसा उपाय बतलाइए ताकि मैं मरने के बाद मोक्ष को प्राप्त कर सकूं. इंदुमती की इस विनती पर महर्षि वशिष्ठ ने उसे अचला सप्तमी का व्रत करने की सलाह दी. और उसे पूरी व्रत और पूजन विधि के बारे में बतलाया. इंदुमती ने ठीक इन्हीं नियमों का पालन करते हुए व्रत किया. अचला सप्तमी व्रत की महिमा से इंदुमती जब तक ज़िंदा रही उसने सभी सांसारिक सुखों का उपभोग किया. मरने के बाद वो इंद्रदेव की अप्सराओं की प्रधान निर्वाचित हुई.

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अचला-सप्तमी व्रत का महत्व:
हिंदू धर्म शास्त्रों में अचला सप्तमी को रथ, सूर्य, भानु, अर्क, महती तथा पुत्र सप्तमी भी कहा जाता है. जो भी भक्त इस दिन पूरे मन से उपवास करते हैं उन्हें पूरे माघ मास के दौरान स्नान करने के बराबर पुण्य लाभ मिलता है. भगवान् कृष्ण ने इस व्रत की महमा के बारे में स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति भी पूरी श्रद्धा के साथ यह उपवास रखता है उसे उतना ही पुण्य फल प्राप्त होता है जितना कि सालभर रविवार का उपवास करने पर. यह व्रत सूर्य भगवान् के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए किया जाता है.
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