VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'तरक्कियों के नए दिन दिखाई देने लगे, ख़ुदा का शुक्र है बच्चे कमाई देने लगे'

News18Hindi
Updated: October 12, 2017, 4:06 PM IST
VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'तरक्कियों के नए दिन दिखाई देने लगे, ख़ुदा का शुक्र है बच्चे कमाई देने लगे'
असलम चिश्ती
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Updated: October 12, 2017, 4:06 PM IST
संगीत और शेर-शायरी के प्रेमियों के लिए hindi.news18.com ने कॉलम शुरू किया है. इसमें आप हर रोज़ कविताएं, शायरी, गज़लें और नज़्म सुनने का लुत्फ उठाते हैं. आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में सुनिए और पढ़िए असलम चिश्ती के क़लाम.

देखें वीडियो और पढ़ें, असलम चिश्ती के क़लाम

तहज़ीबों के लाखों फल आ जाएंगे
उर्दू का एक पेड़ लगा दो बस्ती में

रस घोलती रहेंगी हमेशा मोहब्बतें
जो लोग अपने बच्चों को उर्दू पढ़ाएंगे

ये दो दिलों को मिलाने का देती है पैग़ाम
इसलिए तो ये उर्दू ज़बान बाक़ी है

हिफ़ाज़तों की अनोखी रिदाएं देती है
बस एक मां ही हमेशा दुआएं देती है

मैं थक थका के सर-ए-शाम लेट जाता हूं
उठा के रात को, बेटी दवाएं देती है

मैं फेबसुक पे तुम्हे सर्च करता रहता हूं
तुम्हारी याद भी कैसी सज़ाएं कैसी देती है

तरक़्क़ियों के नए दिन दिखाई देने लगे
ख़ुदा का शुक्र है, बच्चे कमाई देने लगे

मैं अपने सीने से अकसर लगा के रखता हूं
वो गहरे ज़ख़्म जो तोहफे में भाई देने लगे

आसां नहीं था, शिर्क में पैहम निकालना
ग़ारे हिरासे, दीन का मौसम निकालना

तू हम पे ये बम बनाने की तोहमत न रख
आता है हमको ऐड़ी से ज़म-ज़म निकालना

(असलम चिश्ती)
First published: October 12, 2017
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