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VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'वो और होंगे तरन्नुम से गाए जाते हैं, हमारे गीत तो बस गुनगुनाए जाते हैं'

News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 3:28 PM IST
VIDEO: महफ़िल-ए-मुशायरा- 'वो और होंगे तरन्नुम से गाए जाते हैं, हमारे गीत तो बस गुनगुनाए जाते हैं'
बाल स्वरूप राही
News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 3:28 PM IST
संगीत और शेर-शायरी के प्रेमियों के लिए hindi.news18.com ने कॉलम शुरू किया है. इसमें आप हर रोज़ कविताएं, शायरी, गज़लें और नज़्म सुनने का लुत्फ उठाते हैं. आज की महफ़िल-ए-मुशायरा में सुनिए और पढ़िए बाल स्वरूप राही के क़लाम.

देखें वीडियो और पढ़ें, बाल स्वरूप राही के क़लाम

कल मिले या न मिले, प्यार गवाही के लिए
कल उठे या न उठे हाथ सुराही के लिए

आज की शाम को रंगीन बना लो इतना
कोई कोना न बचे रात की स्याही के लिए

इन चमकदार क़तारों पे नज़र रखती हूं
सुर्ख़, बे-दाग़ अंगारों पे नज़र रखती हूं
देके मिट्टी के खिलौने, मुझे बहकाओ न तुम
मैं जवानी हूं, सितारों पे नज़र रखती हूं

ज़िंदगी दर्द की तस्वीर नहीं बन सकती
मौत के हाथ की तहरीर नहीं सकती
चंद बहके हुए खुदगर्ज़ दरिंदो की हवस
लाखों इंसानों की तक़दीर नहीं बन सकती

हसरतों की ज़हर बुझी लौ में
मोम सा दिल गला दिया मैंने
कौन बिजली की धमकियां सहता
आशियां ख़ुद जला दिया मैंने

जहां शमा की जगह, दिल जलाए जाते हैं
बड़े अदब से वहां, हम बुलाए जाते हैं

वो और होंगे तरन्नुम से गाए जाते हैं
हमारे गीत तो बस गुनगुनाए जाते हैं

ये जिनका काम है, लाएं बहार गुलशन में
वो लोग, रोज़ नए गुल खिलाए जाते हैं

(बाल स्वरूप राही)
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