VIDEOS: 'बेस्ट ऑफ द वीक' में सुनिए जावेद अख़्तर, तरन्नुम और लियाक़त के कलाम

News18Hindi
Updated: September 17, 2017, 7:38 PM IST
VIDEOS: 'बेस्ट ऑफ द वीक' में सुनिए जावेद अख़्तर, तरन्नुम और लियाक़त के कलाम
बेस्ट ऑफ द वीक, महफ़िल-ए-मुशायरा
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Updated: September 17, 2017, 7:38 PM IST
hindi.news18.com ने इस हफ्ते महफ़िल-ए-मुशायरा के ज़रिए आपको रूबरू कराया जावेद अख़्तर, तरन्नुम रियाज़ और लियाक़त जाफ़री के कलाम से. आपने पहले दो दिन जावेद अख़्तर, फिर दो दिन लियाक़त जाफरी और आखिरी दो दिन तरन्नुम रियाज़ के कलाम सुने.

जावेद अख़्तर के कलाम

उठा के हाथों से तुमने छोड़ा
चलो न दानिस्तां तुमने तोड़ा

अब उल्टा हमसे तो ये न पूछो कि शीशा ये पाश-पाश क्यूं है



जावेद अख़्तर के कलाम

किसी का ग़म सुनके मेरी पलकों पे एक आंसू जो आ गया है
ये आंसू क्या है
ये आंसू क्या गवाह है, मेरी दर्द-मंदी का, मेरी इंसान दोस्ती का
ये आंसू क्या सबूत है मेरी ज़िंदगी में खुलूस की एक रौशनी का



लियाक़त जाफ़री के कलाम

किस क़दर साहिबे किरदार समझते हैं मुझे
मैं समझता था, मेरे यार समझते हैं मुझे
अब तो कुछ और भी गहरी हैं मेरी बुनियादें
अब तो घरवाले भी दीवार समझते हैं मुझे



लियाक़त जाफ़री के कलाम

हमारे बीच में जो दुश्मनी बची हुई थी
कमाल ये था के हम बहस हार बैठे थे
हमारे लहज़े की शाइस्तगी बची हुई थी



तरन्नुम रियाज़ के कलाम

मोहब्बत इतने अरसों की, रिफ़ाकत इतने बरसों की
तेरा ये हुस्न युसुफ़ सा, तेरी रंगत ये सरसों की
तुझी से है मेरी दुनिया, तुझी से ये घर जन्नत
हो तेरी उम्र में बरक़त, हो तेरी उम्र में बरक़त



तरन्नुम रियाज़ के कलाम

ख़िजा से मुस्तक़िल सा एक नाता जोड़ रखा है
ख़ुद अपनी नांव को गिरदाब के रूख़ मोड़ रखा है
हमारी ख़ामोशी से, दोस्त अफ़सुरदा न हो जाए
कुछ अरसे के लिए ख़ुद हमने जीना छोड़ रखा है

First published: September 17, 2017
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