डॉक्टर आंबेडकर: बाबा साहब की पुण्यतिथि पर जानें उनके महान विचार

बाबा भीम राव आंबेडकर को अपने शुरुआती जीवन में काफी भेदभाव का सामना करना पड़ा.

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 9:14 AM IST
डॉक्टर आंबेडकर: बाबा साहब की पुण्यतिथि पर जानें उनके महान विचार
डॉक्टर भीमराव आंबेडकर
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Updated: December 6, 2018, 9:14 AM IST
डॉक्टर भीमराव आंबेडकर भारतीय इतिहास में एक ऐसा नाम है जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है. आंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है. वो आजाद भारत के पहले विधि एवं न्याय मंत्री थे. उन्होंने भारतीय गणराज्य की नींव रखी. संविधान निर्माण में बाबा भीम राव आंबेडकर ने अहम योगदान निभाया. बाबा भीमराव आंबेडकर को अपने शुरूआती जीवन में काफी भेदभाव का सामना करना पड़ा. उन्होंने तभी ठान लिया था कि वो समाज को इस कुरीति से मुक्ति दिलाने के लिए तत्पर रहेंगे.

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डॉ भीमराव आंबेडकर का जन्म मध्यप्रदेश के महू में 14 अप्रैल सन् 1891 को हुआ था और 6 दिसंबर 1956 को उनका देहावसान हुआ था. आइए आज उनकी पुण्यतिथि पर जानिए उनके महान विचार.

-इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है. निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल न लगाया गया हो.

- जीवन लम्बा होने के बजाय महान होना चाहिए. मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता,समानता और भाईचारा सिखाता है. यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए. हिन्दू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है.

-  अगर मुझे कभी भी इस बात का एहसास हुआ कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा. जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते,कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिये बेमानी है.

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- मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है.यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए. समानता एक कल्पना हो सकती है लेकिन इसे गवर्निंग सिद्धांत के रूप से स्वीकार करना जरुरी है.'

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- जो कौम अपना इतिहास तक नहीं जानती है वो कौम कभी अपना इतिहास भी नहीं बना सकती है. कौन सा समाज कितना तरक्की कर चुका है, इसे जानने के लिए उस समाज के महिलाओं की डिग्री देख लीजिए.

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डॉ भीमराव आंबेडकर ने भले ही जातिवाद और अन्य कुप्रथाओं का पुरजोर विरोध किया लेकिन इस बात में कोई दोराय नहीं कि उन्हें भारतीय होने पर गर्व था. इसका पता उनके इस कथन से चलता है, आंबेडकर ने कहा था, 'हम सबसे पहले और अंत में भी भारतीय हैं.'
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