Guru Purnima 2019, गुरु पूर्णिमा 2019: जानिए गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि और महत्व

Guru Purnima 2019, गुरु पूर्णिमा 2019: गुरु पूर्णिमा के पर्व पर आप इस तरह पूजा कर गुरु के प्रति अपना सम्मान व्यक्त कर सकते हैं:

News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 12:25 PM IST
Guru Purnima 2019, गुरु पूर्णिमा 2019: जानिए गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि और महत्व
Guru Purnima 2019, गुरु पूर्णिमा 2019: गुरु पूर्णिमा पूजा विधि
News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 12:25 PM IST
Guru Purnima 2019, गुरु पूर्णिमा 2019: आज गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) है. हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का काफी महत्‍व है. मान्यता है कि गुरु ही शिष्य को इस योग्य बनाता है कि वो जीवन में आगे बढ़कर तरक्की हासिल कर सके और एक बेहतर इंसान बने. निर्गुण भक्ति काव्य धारा के मुख्य कवि और प्रसिद्ध सूफी संत कबीर दास जी ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए लिखा है कि 'गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय' इसका अर्थ है कि गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है. गुरु ही हमें दुनिया भर की अज्ञानता और कशमकश के उबारकर सही रास्ता दिखाता हैं. हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पर्व
महाभारत की रचना करने वाले महान ऋषि महर्षि वेद व्‍यास (Ved Vyas) की जन्मतिथि के रूप में मनाया जाता है. वेद व्यास जी ने ही समस्त वेदों को चार भाग ऋग्वेद, यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद में विभाजित किया. आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा के बारे में ख़ास बातें.

आज है गुरु पूर्णिमा:
हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) आज 16 जुलाई को है. गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) हर साल आषाढ़ माह के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को पड़ती है. जानिए गुरु पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त.

इसे भी पढ़ें: चंद्र ग्रहण के दौरान ये काम करने से मिलता है पुण्य!

गुरु पूर्णिमा  शुभ मुहूर्त:

गुरु पूर्णिमा की शुरुआत 15 जुलाई 2019 को रात 01 बजकर 48 मिनट से हो चुकी है और 16 जुलाई 2019 की रात 03 बजकर 7 मिनट पर गुरु पूर्णिमा का समापन होगा.
Loading...

इसे भी पढ़ें: Chandra Grahan 2019: ऐसे देखें साल का आखिरी चंद्र ग्रहण

गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि:
1.गुरु पूर्णिमा के पर्व पर आप इस तरह पूजा कर गुरु के प्रति अपना सम्मान व्यक्त कर सकते हैं:
2.इस दिन सुबह उठकर नित्यकर्म निपटाने के बाद नहा-धिकार नए कपड़े धारण करें. इसके बाद पूजाघर में भगवान और अपने धर्म गुरु की तस्वीर के सामने कुश के आसन पर बैठकर 'गुरुपरंपरासिद्धयर्थं व्यासपूजां करिष्ये' मंत्र का पाठ करें.
3.यदि संभव हो तो गुरु की साक्षात वंदना करें. इसके बाद उन्हें शुद्ध शाकाहारी भोजन परोसें. भोजन के बाद दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
First published: July 16, 2019, 12:15 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...