कुंभ: कुरुक्षेत्र में 7 दिसंबर को होगा विशेष स्नान, बन रहा है दुर्लभ योग

कुंभ शुरू होने के कई महीने पहले से ही प्रशासन की तरफ से मेले में सुरक्षा और यात्रियों के ठहरने, भक्तजनों के स्नान के लिए कई तैयारियां शुरू हो जाती हैं.

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 4:08 PM IST
कुंभ: कुरुक्षेत्र में 7 दिसंबर को होगा विशेष स्नान, बन रहा है दुर्लभ योग
कुंभ
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Updated: December 6, 2018, 4:08 PM IST
हिंदू धर्म शास्त्रों में कुंभ मेले का विशेष स्थान है. यह हिंदू संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा धार्मिक आयोजन है. 12 साल के अंतराल पर पड़ने वाले कुंभ को महाकुंभ कहा जाता है वहीं वहीं प्रयागराज में दो कुंभ के बीच में पड़ने वाले कुंभ मेले को अर्धकुम्भ कहा जाता है. यह धार्मिक मेला हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में मनाया जाता है. हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा, नासिक में गोदावरी और प्रयागराज में संगम तट पर इस मेले का आयोजन किया जाते हैं.

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कुंभ शुरू होने के कई महीने पहले से ही प्रशासन की तरफ से मेले में सुरक्षा और यात्रियों के ठहरने, भक्तजनों के स्नान के लिए कई तैयारियां शुरू हो जाती हैं.
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स्नान का शुभ मुहूर्त:

इस बार हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कुंभ मेले का आयोजन हो रहा है. कुंभ में स्नान का बहुत महत्व है. ऐसा माना जाता है कि इस अवसर पर स्नान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और लोग जन्म-जन्मान्तर के बंधनों से मुक्त हो जाते हैं. इस साल 7 दिसंबर को स्नान का विशेष योग बन रहा है. हालांकि यह योग कुंभ के दौरान वृश्चिक राशि होने के कारण 5 दिसंबर से शुरू होकर 7 दिसंबर तक रहेगा. कुंभ के अवसर पर देश-विदेश से कई पर्यटक और भक्त ब्रह्मसरोवर में स्नान करेंगे.

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यहां मनाया जाता है कुंभ:

कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में किया जाता है. 12 साल के बाद ही एक जगह पर दोबारा कुंभ का मेला लगता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में इस बात का उल्लेख है पहले 12 जगहों पर कुंभ का आयोजन किया जाता था लेकिन अब आठ जगहों पर कुंभ नहीं मनाया जाता है. हालांकि इसे दोबारा शुरू करने को लेकर कई धार्मिक संगठनों ने मुहिम शुरू की है. इसके अलावा यह अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम और द्वारका में मनाया जाता था.
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