Narasimha Jayanti 2019: आखिर क्यों भगवान विष्णु ने लिया शेर के मुंह और इंसान के शरीर वाला नरसिंह अवतार

Narasimha Jayanti 2019: नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य, उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध अस्त्रों या शस्त्रों से नहीं बल्कि अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से उसकी छाती चीर कर किया था.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 7:14 AM IST
Narasimha Jayanti 2019: आखिर क्यों भगवान विष्णु ने लिया शेर के मुंह और इंसान के शरीर वाला नरसिंह अवतार
नरसिंह अवतार
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Updated: May 17, 2019, 7:14 AM IST
Narasimha Jayanti 2019: आज 17 मई को शुक्रवार को नरसिंह जयंती मनाई जा रही है. हर साल यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह अवतार लिया था और हिरण्यकश्यप का वध किया था. इतिहास में ऐसा कई बार हुआ है जब भक्तों पर अत्याचार बढ़ने पर भगवान विष्णु ने उनकी रक्षा के लिए अवतार लिया है. आइए जानते हैं भगवान नरसिंह के अवतार लेने की दिलचस्प कहानी.

नरसिंह भगवान का रूप:


नरसिंह भगवान को विष्णु जी का अवतार माना जाता है. उनका आधा रूप मानव का है और आधा सिंह का है. दक्षिण भारत में वैष्णव सम्प्रदाय के लोग उनकी पूजा करते हैं. उनका मानना है कि संकट के समय में नरसिंह भगवान उनकी रक्षा करेंगे.

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नरसिंह भगवान की कथा:
हिरण्यकश्यप नाम का एक राक्षस था जो भगवान विष्णु का घोर विरोधी था. उसके राज्य में जो भी भगवान का नाम लेता उन पर बहुत अत्याचार किए जाते. हिरण्यकश्यप चाहता था कि उसकी प्रजा उसे ही भगवान् माने. उनका बेटा प्रह्लाद बहुत बड़ा विष्णु भक्त था. हिरण्यकश्यप ने उसे बहुत समझाया और डर दिखाया. लेकिन जब भक्त प्रह्लाद के सामने उसकी एक न चली तो उसने उन्हें पहाड़ी से नीचे फेंकने का आदेश दिया लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद को कुछ भी नहीं हुआ. जब हिरण्यकश्यप ने यह देखा तो क्रोध से तिलमिला उठा और भगवान को ललकारने लगा. उसी समय उसके महल का खंभा फटा और नरसिंह भगवान अवतरित हुए. उनका रूप देख हिरण्यकश्यप कांप उठा. नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य, उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध अस्त्रों या शस्त्रों से नहीं बल्कि अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से उसकी छाती चीर कर किया था.

Opinion- प्यार की तलाश में हैं लोग! क्या शादी से उठ गया है विश्वास?बता दें कि हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी की तपस्या कर उनसे वरदान मांगा था कि उसे न कोई इंसान मार पाए और न ही जानवर. न मैं रात में मारा जाऊं और न सुबह, न मेरी मौत घर के अन्दर हो न बाहर. इसलिए भगवान विष्णु को नरसिंह का अवतार लेना पड़े. नरसिंह देव, ना पूरे पशु थे और ना पूरे मनुष्य, उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध अस्त्रों या शस्त्रों से नहीं बल्कि अपनी गोद में बिठाकर अपने नाखूनों से उसकी छाती चीर कर किया था. जिस समय हिरण्यकश्यप वध हुआ उस समय शाम का समय था और महल की देहरी पर बैठकर नरसिंह भगवान ने हिरण्यकश्यप का वध किया.

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