Shardiya Navratri 2018: नवरात्रि के पांचवें दिन ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा

Shardiya Navratri 2018: संतान सुख की इच्छा रखने वालों को स्कंदमाता की आराधना करनी चाहिए.

News18India
Updated: October 14, 2018, 7:17 AM IST
Shardiya Navratri 2018: नवरात्रि के पांचवें दिन ऐसे करें स्कंदमाता की पूजा
Shardiya Navratri 2018: संतान सुख की इच्छा रखने वालों को स्कंदमाता की आराधना करनी चाहिए.
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Updated: October 14, 2018, 7:17 AM IST
आज नवरात्रि का पांचवां दिन है, आज के दिन मां दुर्गा के नौ रूपों में से स्कंदमाता रूप की पूजा की जाती है, स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं. माता अपने दो हाथों में कमल पुष्प धारण किए हुए हैं और एक हाथ से कुमार कार्तिकेय को गोद लिए हुए .देवी स्कंदमाता का वाहन सिंह है. यह देवी दुर्गा का ममतामयी रूप है, जो भक्त मां के इस स्वरूप का ध्यान करता है उस पर मां ममता की वर्षा करती हैं और हर संकट एवं दुःख से भक्त को मुक्त कर देती है.

संतान सुख की इच्छा से जो व्यक्ति मां स्कंदमाता की आराधना करना चाहते हैं उन्हें नवरात्र की पांचवी तिथि को लाल वस्त्र में सुहाग चिन्ह सिंदूर, लाल चूड़ी, महावर, नेल पेंट, लाल बिंदी, सेब और लाल फूल एवं चावल बांधकर मां की गोद भरनी चाहिए.

देवी स्कंदमाता कार्तिकेय और गणेश जी की मां हैं. तारकासुर का वध करने के लिए देवी पार्वती और शंकर जी ने विवाह किया. उनसे कार्तिकेय उत्पन्न हुए और तारकासुर का अंत हुआ.तारकासुर को यह वरदान प्राप्त था कि वह भगवान शिव के शुक्र से उत्पन्न पुत्र द्वारा ही मृत्यु को प्राप्त हो सकता है, अन्यथा नहीं.

स्कंदमाता पार्वती जी का ही स्वरूप हैं. भगवान शंकर और पार्वती के मांगलिक मिलन को सनातन संस्कृति में परिणय परंपरा का प्रारम्भ माना गया. कन्यादान, गर्भ धारण इन सभी की उत्पत्ति शिव-पार्वती प्रसंगोपरांत हुई.

ऐसे करें पूजा:

स्कंदमाता की पूजा में पीले फूल अर्पित करें. चने की दाल, मौसमी फल और केले का भोग लगाएं. अगर पीले वस्त्र धारण किए जाएं तो पूजा के परिणाम अति शुभ होंगे. स्कंदमाता की पूजा से संतान की प्राप्ति सरलता से हो सकती है. संतान सम्बन्धी सारी समस्याओं का अंत हो सकता है. अगर बृहस्पति कमजोर हो तो मजबूत हो जाता है. शिक्षा और ज्ञान में भी लाभ होता है.

ऐसा माना जाता है कि गला एवं वाणी क्षेत्र पर स्कंदमाता का प्रभाव होता है, इसलिए जिन्हें गले में किसी प्रकार की तकलीफ या वाणी हो, उन्हें गंगाजल में पांच लवंग मिलाकर स्कंदमाता का आचमन कराना चाहिए और इसे प्रसाद स्वरूप पीना चाहिए.
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स्कंदमाता का मंत्र:

सौम्या सौम्यतराशेष सौम्येभ्यस्त्वति सुन्दरी.
परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी.
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