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मकर संक्राति मनाने की वो वजहें, जो नहीं जानते होंगे आप


Updated: January 13, 2018, 11:35 AM IST
मकर संक्राति मनाने की वो वजहें, जो नहीं जानते होंगे आप
सूर्यदेव

Updated: January 13, 2018, 11:35 AM IST
मकर संक्रांति साल का पहला त्यौहार है. इसके अलावा इस दिन के खास होने के पीछे कई कारण हैं. इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्या अपनी दिशा बदलता है, ये बात तो बहुत से लोग जानते हैं लेकिन कई ऐसी बाते भी हैं जिसके बहुत कम जानते हैं. आइए आपको बताते हैं संक्रांति के बारे में ऐसी ही कुछ दिलचस्प बातें.

*मकर संक्रांति को तमिलनाडु में पोंगल के रूप में मनाया जाता है.

*इस दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत किया था और इसके बाद ही युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी व सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था. इस प्रकार यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है.

*महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था.

*गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी. इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है.

*गंगाजी भागीरथ के पीछे आयी थीं मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं.इसीलिये इस दिन लोग गंगा स्नान भी करते हैं.

*मलमास के समाप्त होने के कारण इस दिन को खास माना जाता है. शुभ माह प्राम्भ होने के कारण लोग दान पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं.

*सूर्य और शनि की दिशा इस दिन बदलती है, लिहाजा इसे पिता पुत्र पर्व के रूप में भी देखा जाता हे इस दिन सूर्या का तिलक लगाकर स्वागत करना चाहिए.

*सूर्य-शनि से जुड़ा पर्व कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं और दो माह तक रहते हैं.

*शनि देव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है.

*सूर्य-शनि से जुड़ा पर्व कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करेंगे तथा दो माह तक रहते हैं. शनि देव चूंकि मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है.
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