कर्ड राइस: गर्मी का असर कम करने के लिए सिर्फ कूल ड्रिंक्स ही नहीं, कूल फूड भी है जरूरी


कर्ड राइस साउथ इंडियन की फेमस डिश है. इसके बहुत सारे हेल्‍थ बेनिफिट्स हैं.

कर्ड राइस साउथ इंडियन की फेमस डिश है. इसके बहुत सारे हेल्‍थ बेनिफिट्स हैं.

Know Curd Rice Benefits- दही चावल मुख्य रूप से भारत में ही खाई जाती है इसकी ओरिजिन भी यहीं से हुई है. दक्षिण भारत में इसका इस्तेमाल स्टेपल फूड के तौर पर किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2021, 1:53 PM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

Know Curd Rice Benefits- पिछले दिनों से मैं लगातार गर्मी को लेकर चर्चा कर रहा हूं. इसमें ज्यादातर मैंने गर्मी दूर भगाने के लिए क्या पीया जाए इस पर ध्यान दिया है. लेकिन, आज कुछ खाने पर भी चर्चा कर लेते हैं. गर्मी के दिन चल रहे हैं और कई बार मौसम अपना रुख भी बदल रहा है. ऐसे में पेट की समस्या होना कोई बड़ी बात नहीं.

कोरोना का दूसरा वार चल रहा है और लोगों से घरों में रहने की अपील भी की जा रही है. ऐसे में लाजमी है वॉकिंग आदि भी कम ही हो पा रही है. तो, पीने के लिए तो खास पेय आप इस्तेमाल करिए ही लेकिन साथ ही खाने में भी ऐसी चीजें होनी चाहिए जो पेट और गर्मी दोनों के लिए बेहतर हों. तो आईए आज बात करते हैं दही-चावल यानि कर्ड राइस की.

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वैसे तो सुनने में यह काफी सिंपल डिश लग रही है और इसे बनाना आसान भी है. बस दही और चावल के साथ तड़का देने के लिए कुछ चीजें हैं जिनका इस्तेमाल होता है. कुछ न भी हो तो केवल दही चावल भी काफी ही है. साथ ही हरी मिर्च और धनिया डालने के बाद बस उसमें सरसों और मिर्च का तड़का दे दीजिए.

दही चावल मुख्य रूप से भारत में ही खाई जाती है इसकी ओरिजिन भी यहीं से हुई है. दक्षिण भारत में इसका इस्तेमाल स्टेपल फूड के तौर पर किया जाता है. तमिल नाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र में इसे जमकर खाया जाता है. इसके तड़के का प्रकार जरूर थोड़ा बदल जाता है.

इसे बनाने के लिए उबले हुए चावल को खट्टी दही में मिला लें. इसके बाद उड़द दाल, राई, अदरक, जीरा और हींग से इसमें तड़का दे दीजिए. एक लाल मिर्च भी इसका जायका बढ़ा देती है. अपने स्वाद के अनुसार इसमें नमक मिला लें. हो गया तैयार आपका दही-चावल. इसे नाश्ते और लंच में चाव से खाया जा सकता है.



इसका आध्यात्मिक महत्व भी काफी है. दक्षिण भारत में कई मंदिरों में इसे प्रसाद के तौर पर चढ़ाया जाता है. इसके सात्विक गुणों के कारण ही इसे मंदिरों में स्थान मिला है. पेट के साथ यह आपके स्वास्थ्य के लिए भी काफी बेहतर होता है. सप्ताह में एक या दो दिन अब आप अपने किचन में इसे स्थान दे सकते हैं.
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