देश की पहली महिला विधायक, जो पहली महिला हाउस सर्जन भी थी

अपनी उच्च शिक्षा के लिए रेड्डी इंग्लैंड भी गईं. लेकिन मद्रास विधान परिषद में प्रवेश करने के लिए उन्हें मेडिकल प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी

News18Hindi
Updated: July 22, 2019, 2:20 PM IST
देश की पहली महिला विधायक, जो पहली महिला हाउस सर्जन भी थी
अपनी उच्च शिक्षा के लिए रेड्डी इंग्लैंड भी गईं. लेकिन मद्रास विधान परिषद में प्रवेश करने के लिए उन्हें मेडिकल प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी
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Updated: July 22, 2019, 2:20 PM IST
लड़कों के स्कूल में पढ़ने वाली पहली लड़की, प्रदेश स्तर पर डॉक्टर बनने वाली पहली महिला, विधानसभा की पहली महिला सदस्य और उपाध्यक्ष बनने वाली पहली महिला. इतने संख्यावाचक विशेषण शायद ही किसी के लिए इस्तेमाल हुए हों. उनका नाम 'मुत्तू लक्ष्मी रेड्डी' था. 30 जुलाई, साल 1886 में मद्रास के पुडुकोता रियासत में जन्मीं इस महिला की मृत्यु 22 जुलाई, 1968 को हो गई थी. यानी आज उनकी पुण्यतिथि है.

अपने पूरे रियासत में शिक्षा पाने वाली वो पहली छात्रा थीं. हालांकि परिवार में केवल पिता ही उनकी उच्च शिक्षा के पक्ष में थे. मां तो जल्द से जल्द शादी कराना चाहती थीं. एक वक्त ऐसा भी आया कि युवावस्था में उन्हें अपना स्कूल छोड़ना पड़ा. घर में ही ट्यूशन टीचर से ही वो पढ़ा करतीं. स्कूल खत्म होने के बाद उनके पिता भी मां की प्रबाव में रेड्डी की शादी कराना चाहते थे.पर रेड्डी ने विरोध किया. विरोध का सबब ऐसा रहा कि उन्होंने मेडिकल की परीक्षा दी और उनको 'मद्रास मेडिकल कॉलेज' में दाखिला मिल गया. पिता एस नारायण स्वामी चेन्नई के महाराजा कॉलेज के प्रिंसिपल थे और बेटी देश की पहली महिला हाउस सर्जन बनी.

एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू और महात्मा गांधी के विचारों से थी प्रभावित

कॉलेज के वर्षों में ही उनकी मुलाकात सरोजिनी नायडू से हुई. यहीं से उनके अंदर महिलाओं और समाज के अन्य पिछड़े तबके के लोगों के लिए काम करने की इच्छा जगी. यह इच्छा और प्रबल तब हो गई जब रेड्डी की मुलाकात एनी बेसेंट और महात्मा गांधी से हुई. उनके विचारों से प्रभावित होकर वह समाज सुधारक के रूप में काम करने लगीं.

अपनी उच्च शिक्षा के लिए रेड्डी इंग्लैंड भी गईं. लेकिन मद्रास विधान परिषद में प्रवेश करने के लिए उन्हें मेडिकल प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी. वह कांग्रेस 'वीमेन इंडिया असोशिएन' की उपाअध्यक्ष बनीं. बाद में शक्ति हरी हरन द्वारा नोमिनेट होकर बतौर देश की पहली महिला विधायक उन्होंने मद्रास विधानसभा में कदम रखा. साल 1930 में गांधी के साथ विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्ती भी दे दिया.

अपनी किताब 'माय एक्सपीरियंस एस ए लेजिस्लेटर ' में उन्होंने बतौर महिता विधायक अपने अनुभव साझा किए हैं. भारत सरकार ने साल 1956 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा था.

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First published: July 22, 2019, 2:20 PM IST
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