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अल्‍जाइमर की सटीक भविष्‍यवाणी करेगा डीप लर्निंग बेस्ड मॉडल

अल्‍जाइमर की सटीक भविष्‍यवाणी करेगा डीप लर्निंग बेस्ड मॉडल

बढ़ती उम्र के साथ मैमोरी पावर कमजोर होना  अल्जाइमर के लक्षण हो सकते हैं. (फोटो- Shutterstock.com)

बढ़ती उम्र के साथ मैमोरी पावर कमजोर होना अल्जाइमर के लक्षण हो सकते हैं. (फोटो- Shutterstock.com)

Detection of Alzheimer : अल्जाइमर बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त कम कर देती है. यह सामाजिक स्वास्थ्य की दृष्टि से एक बड़ी चुनौती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :

    Detection of Alzheimer : बढ़ती उम्र के साथ-साथ मेमोरी पॉवर कमजोर होने लगती है. आमतौर पर यह दिमाग के टिश्यूज को नुकसान पहुंचने से होता है. इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में मानसिक विकार अल्जाइमर (Alzheimer) कहा जाता है. हिंदुस्तान अखबार की खबर के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, अल्जाइमर में सबसे ज्यादा योगदान करीब 70 फीसद डिमेंशिया (Dementia) का होता है. फिलहाल इससे ग्रस्त लोगों की संख्या दुनियाभर में 2.4 करोड़ है और हर 20 साल में इनकी संख्या दोगुनी होने का अनुमान है. डिमेंशिया किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि ये कई बीमारियों या यूं कहें कि कई लक्षणों के एक समूह का नाम है.

    ज्यादा सटीक और संवेदनशील 

    मुश्किल यह कि अब तक न तो इसके खतरे की सटीक भविष्यवाणी हुई और न ही इलाज उपलब्ध है. ऐसे में रिसर्चर्स ने एक डीप लर्निंग आधारित ऐसा मॉडल डेवलप किया है, जिसमें ब्रेन इमेज के जरिये 99 परसेंट एक्यूरेसी के साथ अल्जाइमर की भविष्यवाणी की जा सकेगी. यह रिसर्च निष्कर्ष ‘डायग्नोस्टिक्स’ जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

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    अल्जाइमर के खतरे की भविष्यवाणी का यह तरीका 138 सब्जेक्ट्स के एमआरआई इमेज के विश्लेषण पर आधारित है, जो पुराने तरीके की तुलना में ज्यादा सटीक, संवेदनशील तथा विशिष्ट है.

    संभावित खतरे का पहला संकेत
    काउनास यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलाजी (KTU) के मल्टीमीडिया इंजीनियरिंग के रिसर्चर रायटिस मस्केलियुनस बताते हैं कि दुनियाभर में डाक्टर अल्जाइमर के फर्स्ट फेज में पहचान के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, ताकि प्रभावित लोगों को इलाज से बेहतर लाभ मिल सके. अल्जाइमर के संभावित खतरे का पहला संकेत हल्का विस्मरण (माइल्ड काग्निटिव इंपेयरमेंट- एमसीआइ) होता है, जो उम्र बढ़ने और डिमेंशिया की अपेक्षित संज्ञानात्मक गिरावट (cognitive decline) के बीच का चरण है.

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    पहले की रिसर्च के अनुसार, फंक्श्नल मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एफएमआरआइ) का इस्तेमाल, दिमाग के उस हिस्से का पता लगाने के लिए किया जा सकता है, जो अल्जाइमर के संभावित खतरे से जुड़ा होता है. एमसीआइ के प्रारंभिक चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन कुछ मामलों में न्यूरोइमेजिंग से पता लगाया जा सकता है.

    इमेज के विश्लेषण में आएगी तेजी
    हालांकि एफएमआरआइ इमेज के मैनुअल विश्लेषण के जरिये अल्जाइमर से संबंधित बदलाव की पहचान करना संभव है, लेकिन इसमें न केवल विशिष्ट जानकारी की जरूरत होती है, बल्कि समय भी ज्यादा लगता है. जबकि डीप लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अन्य तरीके से इसमें तेजी लाई जा सकती है.

    डीप लर्निंग के आधार पर विकसित किया गया यह माडल लिथुआनिया के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर के रिसर्चर्स के सहयोग से तैयार किया गया है. इसमें रेसनेट 18 (रेसीड्युअल न्यूरल नेटवर्क) में सुधार कर फंक्शनल एमआरआइ को क्लासिफाइड किया गया है. ये इमेज 6 अलग-अलग श्रेणियों में बांटे गए, जो एमसीआइ से लेकर अल्जाइमर रोग की स्थिति तक पहुंचने के बीच के थे. इस मॉडल की सटीकता 99.95 फीसद रही.

    Tags: Health, Health News, WHO

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