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देसी घी की लाजवाब पूरी और छोले, चावड़ी बाजार की गली हकीम बका में है ‘स्टेंडर्ड स्वीट्स'

पूरी-छोले का यह नाश्ता सुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक मिलता है.

पूरी-छोले का यह नाश्ता सुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक मिलता है.

पूरी और छोलों की इस डिश को आप साधारण न समझें. शुद्ध देसी घी (Pure Desi Ghee) में तैयार होता है सारा खाना.

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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)
    पूरी और छोले की सब्जी भारतीय उत्सव व समारोह का अहम हिस्सा है. जब घर में मेहमान आता है तो सम्मान के लिए उसे भी पूरी-सब्जी खिलाई जाती है. कभी-कभी घर में किसी का मन आ जाए तो यूं भी पूरी बना दी जाती है. एकाध बार मचलता मौसम भी पूरी बनाने के लिए प्रेरित करता है. अब जब पूरी पर इतना बखान हो चुका है तो आज हम आपको गरमा-गरम पूरी और साथ में छोले की सब्जी का नाश्ता करवाते हैं. छोलों की सब्जी के साथ तला आलू व कोफ्ता स्वाद और बढ़ाता है. पूरी और छोलों की इस डिश को आप साधारण न समझें. शुद्ध देसी घी में तैयार होता है सारा खाना. पुरानी दिल्ली की जिस गली में यह स्वादिष्ट भोजन मिलता है, वह गली हमेशा देसी घी की खुशबू से महकती महसूस की जा सकती है.

    पूरी-छोले का नाश्ता खाइए, मुंह और हाथों से देसी घी की खुशबू उड़ेगी
    पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके से तो आप वाकिफ होंगे ही. यहां थोक में सेनिट्री का सामान मिलता है. कभी यह इलाका पूरी तरह रिहायशी था लेकिन अब कमर्शियल हो चुका है. चावड़ी बाजार में पहुंचते ही आपको हर कोई गली हकीम बका के बारे में बता देगा. गली में घुसते ही नाक में देसी घी की खुशबू महसूस होने लगे तो मान लीजिए कि आप इलाके की सालों पुरानी हलवाई की दुकान (रेस्तरां) ‘स्टेंडर्ड स्वीट्स’ पर पधार चुके हैं. पुरानी दिल्ली की पुरानी दुकान है तो ज्यादा तामझाम नहीं होगा, लेकिन नाम तो है, इसलिए वहां खाने वालों की आवाजाही लगी रहती है.

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    इस दुकान पर कई तरह का खानपान और मिष्ठान्न है. लेकिन जलवे पूरी छोले के ही हैं. भरपूर देसी घी से भरी कड़ाही में तलकर जब यह पूरी स्वादिष्ट छोले और छोलों के ऊपर तले हुए आलू और शाकाहारी कोफ्ते के साथ पेश की जाती है तो जुबान और मन खाने के लिए मचलने लगता है. इन सबके साथ सीजनल अचार भी सर्व किया जाता है. खाते वक्त मुंह और हाथों से देसी घी की खुशबू उड़ती महसूस होती है. पूरी-छोले का यह शानदार भोजन 100 रुपये में उपलब्ध है. पुरानी दिल्ली में पंजाबी स्वाद में रचा-बसा यह नाश्ता वाकई मन मोह लेता है.

    दोपहर से भठूरे-छोले व देसी घी से ओतप्रोत भोजन की थाली भी हाजिर है
    पूरी-छोले का यह नाश्ता सुबह 8 बजे से दोपहर एक बजे तक मिलता है. उसके बाद छोले भठूरे भी मिलना शुरू हो जाते हैं. यह व्यंजन भी देसी घी से लबालब है. इसकी एक प्लेट की कीमत 110 रुपये है. इतना स्वादिष्ट खाना खाने के बाद कुछ ठंडा चाहिए तो कुल्हड़ की मलाई लस्सी भी 60 रुपये में उपलब्ध है. चूंकि अब यह इलाका पूरे तौर पर कमर्शियल हो चुका है, जिसके चलते बाहर के कारोबारी यहां आते रहते हैं तो दुकान वालों ने थाली सिस्टम भी शुरू कर दिया है. इसमें वैरायटी के हिसाब से 200 व 150 रुपये में देसी घी में बना खाना परोसा जाता है. दुकान पर इसके अलावा पनीर का पकौड़ा, ब्रेड पकौड़ा व समोसा भी सर्व किया जाता है. चूंकि यह पुरानी दिल्ली की पुरानी हलवाई की दुकान है, इसलिए कई तरह की मिठाइयां भी मिलती हैं लेकिन पुरानी दिल्ली के लोग तो इसकी पूरी-छोले के ही दीवाने हैं.

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    65 साल पहले शौरीलाल खुराना ने शुरू किया था यह नाश्ता
    स्टेंडर्ड स्वीट्स नामक इस दुकान को करीब 65 साल पहले शौरीलाल खुराना ने शुरू किया था, अब इस दुकान को उनके बेटे हरीश खुराना चला रहे हैं. इस काम में अब उनके बेटे सागर खुराना भी मदद कर रहे हैं. कुछ साल पहले तक यह दुकान मेन रोड पर थी, लेकिन अब गली हकीम बका में भी इसके जलवों में कोई कमी नहीं आई है. दुकान पर रात 9 बजे तक काम चलता है. अवकाश कोई नहीं है. इस इलाके में भीड़ और चहल-पहल तो बहुत है, लेकिन दुकान का खाना खाकर आप सारी परेशानी भूल जाएंगे.
    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: चावड़ी बाजार

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