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Diwali 2021 Special Poems: खास अंदाज में मनाएं त्योहार, सोशल मीडिया पर पोस्ट करें दिवाली स्पेशल कविताएं

Diwali 2021 Special Poems: खास अंदाज में मनाएं त्योहार, सोशल मीडिया पर पोस्ट करें दिवाली स्पेशल कविताएं

दिवाली स्पेशल कविताएं

दिवाली स्पेशल कविताएं

Diwali Special Poems: हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) के अनुसार हर वर्ष दिवाली का पावन पर्व कार्तिक मास (Kartik Month) की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. इस साल दीपावली (Deepawali) 4 नवंबर को है. इस पावन पर्व पर मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi), भगवान गणेश (Lord Ganesha) और धन के देवता कुबेर की पूजा (Puja) की जाती है. इस मौके पर लोग एक-दूसरे को विश करते हैं और खास अंदाज में शुभकामनाएं भी भेजते हैं. इस बार आप भी अपने प्रियजनों को अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee), माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi) और सोहनलाल द्विवेदी (Sohanlal Diwedi) की दिवाली स्पेशल कविताएं (Diwali Special Poems) भेज कर बधाई दें.

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    Diwali 2021 Special Hindi Poems: त्योहारों (Festivals)के मौसम में लोग मैसेज या सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media Post) के जरिए अपने दोस्तों या जान-पहचान वाले लोगों को शुभकामनाएं देते हैं. कई लोग इंटरनेट पर कोई शायरी या कविता (Shayari or poem) ढूंढने में कोई कसर नहीं छोड़ते. कुछ ही दिनों बाद दीपावली का पावन पर्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष दिवाली का पावन पर्व कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. इस साल कार्तिक अमावस्या 04 नवंबर (गुरुवार) को है. दिवाली पर मां लक्ष्मी (Maa Lakshmi) और भगवान गणेश (Lord Ganesha) और धन के देवता कुबेर  पूजा (Puja) की जाती है.

    दीपावली (Deepawali) खास मौके पर हिंदी साहित्य (Hindi Literature) जगत में चार चांद लगाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee), माखनलाल चतुर्वेदी (Makhanlal Chaturvedi) और सोहनलाल द्विवेदी (Sohanlal Diwedi) की दिवाली स्पेशल कविताएं (Diwali Special Poems) पढ़कर अपनी जिंदगी में त्योहारों का रंग घोल लीजिए.

    अटल बिहारी वाजपेयी की ‘आओ फिर से दिया जलाएं’
    आओ फिर से दिया जलाएं
    भरी दुपहरी में अंधियारा
    सूरज परछाई से हारा
    अंतरतम का नेह निचोड़ें
    बुझी हुई बाती सुलगाएं।
    आओ फिर से दिया जलाएं

    हम पड़ाव को समझे मंज़िल
    लक्ष्य हुआ आँखों से ओझल
    वर्त्तमान के मोह-जाल में
    आने वाला कल न भुलाएं।
    आओ फिर से दिया जलाएँ।

    आहुति बाकी यज्ञ अधूरा
    अपनों के विघ्नों ने घेरा
    अंतिम जय का वज्र बनाने-
    नव दधीचि हड्डियां गलाएं।
    आओ फिर से दिया जलाएँ

    माखनलाल चतुर्वेदी की ‘दीप से दीप जले’
    सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलें
    कर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें।

    लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने में
    लक्ष्मी बँट-बँट बढ़ती आने-जाने में
    लक्ष्मी का आगमन अँधेरी रातों में
    लक्ष्मी श्रम के साथ घात-प्रतिघातों में
    लक्ष्मी सर्जन हुआ
    कमल के फूलों में
    लक्ष्मी-पूजन सजे नवीन दुकूलों में।।

    गिरि, वन, नद-सागर, भू-नर्तन तेरा नित्य विहार
    सतत मानवी की अँगुलियों तेरा हो शृंगार
    मानव की गति, मानव की धृति, मानव की कृति ढाल
    सदा स्वेद-कण के मोती से चमके मेरा भाल
    शकट चले जलयान चले
    गतिमान गगन के गान
    तू मिहनत से झर-झर पड़ती, गढ़ती नित्य विहान।

    उषा महावर तुझे लगाती, संध्या शोभा वारे
    रानी रजनी पल-पल दीपक से आरती उतारे,
    सिर बोकर, सिर ऊँचा कर-कर, सिर हथेलियों लेकर
    गान और बलिदान किए मानव-अर्चना सँजोकर
    भवन-भवन तेरा मंदिर है
    स्वर है श्रम की वाणी
    राज रही है कालरात्रि को उज्ज्वल कर कल्याणी।

    वह नवांत आ गए खेत से सूख गया है पानी
    खेतों की बरसन कि गगन की बरसन किए पुरानी
    सजा रहे हैं फुलझड़ियों से जादू करके खेल
    आज हुआ श्रम-सीकर के घर हमसे उनसे मेल।
    तू ही जगत की जय है,
    तू है बुद्धिमयी वरदात्री
    तू धात्री, तू भू-नव गात्री, सूझ-बूझ निर्मात्री।

    युग के दीप नए मानव, मानवी ढलें
    सुलग-सुलग री जोत! दीप से दीप जलें।
    सोहनलाल द्विवेदी की ‘जगमग-जगमग’

    हर घर, हर दर, बाहर, भीतर,
    नीचे ऊपर, हर जगह सुघर,
    कैसी उजियाली है पग-पग,
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    छज्जों में, छत में, आले में,
    तुलसी के नन्हें थाले में,
    यह कौन रहा है दृग को ठग?
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    पर्वत में, नदियों, नहरों में,
    प्यारी प्यारी सी लहरों में,
    तैरते दीप कैसे भग-भग!
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    राजा के घर, कंगले के घर,
    हैं वही दीप सुंदर सुंदर!
    दीवाली की श्री है पग-पग,
    जगमग जगमग जगमग जगमग!

    Tags: Diwali 2021, Hindi Literature, Hindi poetry

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