कंधों और कलाई की मजबूती के लिए रोज पांच बार करें 'पश्चिम नमस्कार आसन'

कंधों और कलाई की मजबूती के लिए रोज पांच बार करें 'पश्चिम नमस्कार आसन'
पश्चिम नमस्कार आसन में पीठ की ओर हाथों को जोड़ कर नमस्‍कार किया जाता है.

सूर्य नमस्‍कार (Surya Namaskar) दोनों हाथों को सामने की ओर जोड़ा जाता है, वैसे ही वैसे ही पश्चिम नमस्कार आसन (Paschim Namaskar posture) में पीठ की ओर हाथों को जोड़कर किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 10, 2020, 11:33 PM IST
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योगासन में सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) करने के लाभ के बारे में आपने सुना होगा. ऐसे ही 'पश्चिम नमस्कार आसन'('Paschim Namaskar posture') करने के अपने फायदे हैं. इसे अंग्रेजी में रिवर्स प्रेयर पोज भी कहा जाता है. जिस तरह सूर्य नमस्‍कार में दोनों हाथों को सामने की ओर जोड़ा जाता है वैसे पश्चिम नमस्कार आसन में पीठ की ओर हाथों को जोड़कर नमस्‍कार किया जाता है. इस आसन के बारे में लोगों को थोड़ी कम जानकारी होती है, लेकिन आज हम आपको इसके फायदे के बारे में बता रहे हैं...

पश्चिम नमस्कार आसन के फायदे
- कंधे जाम हो गए हैं तो उनके मूवमेंट के लिए यह आसान फायदेमंद साबित हो सकता है.
- नाजुक कंधों और उनमें दर्द में पश्चिम नमस्कार आसन फायदा देगा.
- इससे बॉडी का मेटाबॉलिज्‍म रेट बढ़ता है. इस आसन को करने से वजन भी कम होता है.
- अगर आपको बहुत ज्‍यादा टाइपिंग करना पड़ता है तो यह योगासन आपकी कलाइयों के लिए फायदेमंद है.


- स्‍ट्रेस को दूर करने के लिए और शांत दिमाग के लिए यह आसन बहुत अच्‍छा विकल्‍प साबित हो सकता है.

पश्चिम नमस्कार आसन कैसे करें
- इसके लिए सबसे पहले फर्श पर एक मेट बिछाएं. अब मेट पर खड़े हों पैरों के बीच एक इंच का गैप बनाएं. अपने हाथों को नीचे की ओर लटकाएं और ढीला छोड़ दें. इसे ताड़ासन कहा जाता है.
- इसके बाद अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ें और दोनों हाथों को पीछे की ओर ले जाएं. धीरे-धीरे दोनों हाथों को जोड़ने की कोशिश करें.
गहरी सांस लें और कलाई को मोड़ते हुए हाथों की उंगलियों को रीढ़ की हड्डी से सटा लें. अब हथेलियों को आपस में इस तरह से मिलाएं, जैसे आप नमस्‍कार करते हैं.
- इस पोजीशन में आने के बाद आंखों को बंद करें और 20 से 30 सेकेंड तक इसी अवस्‍था में खड़े रहें.
- 20 से 30 से‍केंड बाद अपनी आंखों को खोलें और कलाई को नीचे की ओर मोड़ें. धीरे से ताड़ासान में वापस आएं. 1 मिनट बाद दोबारा से इस प्रक्रिया को दोहरा कर 'पश्चिम नमस्कार आसन' करें.
ऐसा कम से कम रोज पांच बार करना चाहिए.

ये सावधानियां बरतें
इस योग को करने में आप कोई एक्सपर्ट नहीं हैं. इसलिए आपको कुछ सावधानियों को अपनाना चाहिए. सबसे पहले कि जबरदस्‍ती कलाई को ज्‍यादा नहीं मोड़े, इससे आपकी कलाई में दर्द भी हो सकता है.
पश्चिम नमस्कार आसन करते वक्‍त गहरी सांस (गहरी सांस लेने के फायदे) जरूर लें. ऐसा करने से शरीर में ऑक्‍सीजन का संचार सही तरह से होगा और आप आसन को आसानी से कर पाएंगी. पहली बार जब आप पश्चिम नमस्कार आसन करें तो 5 से 10 सेकेंड के लिए उस अवस्‍था में रहें. धीरे-धीरे जब आप इस आसन को करने में माहिर हो जाएं तो समय भी बढ़ाती जाएं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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