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कहीं आप भी तो नहीं समझ रहे अपने बच्चे को सुपर किड?

News18Hindi
Updated: December 7, 2017, 4:07 PM IST
कहीं आप भी तो नहीं समझ रहे अपने बच्चे को सुपर किड?
जिनके सपने अधूरे रह जाते हैं वे चाहते हैं कि बच्चे उनके सपने पूरे करें.
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Updated: December 7, 2017, 4:07 PM IST
उम्र का सबसे खूबसूरत पड़ाव बचपन है. इस उम्र में टेंशन की कोई जगह नहीं होती. न ही सबसे आगे जाने की होड़ मची रहती है. बच्चों को भले ही कोई टेंशन न हो लेकिन पेरेंट्स हमेशा चिंता में रहते हैं कि उनका बच्चा बाकियों से आगे क्यों नहीं है. इसी के चलते बच्चों पर अनावश्यक दबाव डाला जाता है जिसकी वजह से उनका बचपन छिनने लगता है और उन्हें कम उम्र में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जानिए किन बातों की वजह से बच्चों का बचपन छिन सकता है और वे मानसिक रूप से बीमार हो सकते हैं-

बच्चों को सुपर किड न मानें
जिनके सपने अधूरे रह जाते हैं वे चाहते हैं कि बच्चे उनके सपने पूरे करें. बच्चे, बच्चे हैं सुपरमैन नहीं. उनसे उतनी ही उम्मीद रखें जितनी वे पूरी कर सकें. अनावश्यक दबाव उनका बचपन तबाह कर सकता है.

नंबर वन जैसी कोई चीज नहीं होती

हर किसी के सोचने-समझने का स्तर अलग-अलग होता है. मसलन किसी बच्चे को मैथ्स बहुत आसान लगता है और किसी को बहुत आसान. इसका मतलब यह नहीं जिसे मैथ्स न आए, वह मानसिक रूप से कमजोर है. उसे हो सकता है वह विषय न पसंद हो. किसी विषय में वह मेधावी भी हो सकता है.

पहचानें बच्चों की अभिरुचि
बच्चों को क्या करना पसंद है इसके बारे में अभिभावकों को जरूर जानना चाहिए. किस क्षेत्र में बच्चे ज्यादा बेहतर परफॉर्म कर सकते हैं इसकी समझ अभिभावकों को होनी चाहिए. हर बच्चा हर क्षेत्र में नंबर वन कभी नहीं हो सकता.

समझदार अभिभावक बनें
बच्चों को डराएं-धमकाएं न और न ही उन पर दबाव डालें कि वो हमेशा क्लास में टॉप करें. वे मेहनत कर सकते हैं अपनी समझ के अनुसार, उनके मानसिक स्तर को समझें और उन्हें दबाव से मुक्त रखें.

लालची मत बनाएं
अगर इस बार अच्छा नंबर लाएं तो कोई साइकिल खरीद देंगे. इस बार टॉप किया तो वीडियो गेम दिलाएंगे. इससे बच्चों के जीवन पर बुरा असर पड़ता है और वे गलत दिशा में जा सकते हैं.
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