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क्या आपको भी बार बार ऐसा लगता है, कहीं फोन तो नहीं बज रहा? इस तरह छुड़ाएं आदत

क्या आपको भी बार बार ऐसा लगता है, कहीं फोन तो नहीं बज रहा? इस तरह छुड़ाएं आदत

कई लोग दिन में कई बार अपना फोन चेक करते है, उन्हें लगता है कि फोन वाइब्रेट हो रहा है (Image Credit: Pexels)

कई लोग दिन में कई बार अपना फोन चेक करते है, उन्हें लगता है कि फोन वाइब्रेट हो रहा है (Image Credit: Pexels)

Phone Addiction : इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों को बार बार लगता है कि उनके फोन की घंटी बज रही है. जबकि असल में वो नहीं बज रही होती है. जो लोग इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं, उनको फोन पर अपडेट या मैसेज ना आने पर पसीना और बेचैनी होने लगती है. इसके अलावा उनका ये भी कहना है कि कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन क्लास, एग्जाम और गेम्स खेलने की आदत भी उन्हें इस बीमारी की तरफ ले जा रही है.

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    Phone Addiction : कुछ लोग हर समय मोबाइल से चिपके रहते हैं. वे फोन पर कुछ करें या ना करें, लेकिन लंबे समय तक फोन को हाथ में पकड़े रहना, उसे बार बार उसे चेक करना उनकी आदत में शुमार हो चुका होता है. अगर ऐसा हो कि वो कुछ समय के लिए अपने फोन से दूर हो जाएं तो भी उन्हें ऐसा अहसास होता है कि उनका फोन बज रहा है या वाइब्रेट हो रहा है. फिर इस चिंता में वो दोबारा से फोन को हाथ में उठा लेते हैं.

    एनबीटी की रिपोर्ट में मेट्रो अस्पताल के सायकोलॉजिस्ट (Psychologist) डॉ अजय सिरोहा इसे एक तरह की बीमारी करार देते हैं जिसे फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम (Phantom Vibration Syndrome) कहा जाता है. इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों को बार बार लगता है कि उनके फोन की घंटी बज रही है. जबकि असल में वो नहीं बज रही होती है. डॉ अजय का कहना है कि जो लोग इस बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं, उनको फोन पर अपडेट या मैसेज ना आने पर पसीना और बेचैनी होने लगती है. इसके अलावा उनका ये भी कहना है कि कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन क्लास, एग्जाम और गेम्स खेलने की आदत भी उन्हें इस बीमारी की तरफ ले जा रही है.

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    हो सकते हैं गंभीर परिणाम
    डॉ अजय का कहना है कि अगर समय रहते इस आदत पर गौर ना किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम मिल सकते हैं. दरअसल ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों को अक्सर कपड़ों में सरसराहट या मासपेशियों में ऐंठन होने से बार बार ऐसा लगता है जैसे उनका या उनके आसपास का कोई मोबाइल वाइब्रेट हो रहा हो. लेकिन चेक करने के बाद पता चलता है कि ये उनकी गलतफहमी थी.

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    ऐसा क्यों होता है? 
    सायकोलॉजिस्ट डॉ अजय बताते हैं कि फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम में होता ये है कि दिमाग उन चीजों के बारे में सोचता या महसूस करता है, जो असल में होती नहीं है. ऐसा ज्यादातर तब देखने को मिलता है, जब हमारा फोन वाइब्रेशन पर लगा हो और अचनाक वो किसी वजह से वाइब्रेट कर जाए. इसके बाद हम चाहे किसी भी काम में व्यस्त हो जाएं, लेकिन दिमाग ये बात घर कर जाती है कि फोन वाइब्रेट होगा और इसी कारण हमें बार बार लगता है कि फोन शायद वाइब्रेट हो रहा है.

    क्या करें कि ऐसा ना हो

    • इस सिंड्रोम से बचने के लिए हमे ज्यादा कुछ नहीं करना है, सिर्फ अपने नोटिफिकेशंस को बंद कर दें. ताकि आपका ध्यान बार बार फोन पर ना जाए.
    • स्टॉपवॉच का इस्तेमाल करें या फिर कोई लिमिट सेट करके उसके पूरा होने पर लॉगआउट कर दें.
    • कुछ घंटों के लिए अपने फोन का डेटा बंद कर दें
    • हर सोशल साइट पर अपना प्रोफाइल बनाने की होड़ में ना पड़े
    • फोन या वर्चुअल वर्ल्ड की जगह फैमिली को टाइम दें.
    • फोन रखने की जगह को समय समय पर बदलते रहें.

    Tags: Health, Health News, Lifestyle, Mobile Phone

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