क्या आपमें से आती है मछली जैसी बदबू, कहीं ये फिश ओडर सिंड्रोम तो नहीं

क्या आपमें से आती है मछली जैसी बदबू, कहीं ये फिश ओडर सिंड्रोम तो नहीं
शरीर में कुछ खास कंपाउंड के मौजूद होने की वजह से सड़ी मछली जैसी दुर्गंध आने लगती है.

इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि इसमें व्यक्ति से सड़ी मछली जैसी सहन न करने वाली बदबू (Fish Odour) आती है. यह गंध नियमित रूप से या समय-समय पर भी आ सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated : November 26, 2020, 8:22 am IST
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    फिश ओडर सिंड्रोम (Fish Odour Syndrome) एक दुर्लभ आनुवांशिक (Gentics) बीमारी है जिसे ट्राइमेथिलमिनुरिया ( Trimethylaminuria) भी कहा जाता है. इससे पीड़ित व्यक्ति के पसीने, सांस, यूरिन और प्रजनन तरल पदार्थ से सड़ी मछली (Rotten Fish) जैसी दुर्गंध आती है. यह बीमारी जन्म के कुछ समय बाद ही अपने लक्षण दिखाना शुरू कर देती है. इस बीमारी में व्यक्ति को किसी के सामने जाने और उसके साथ उठने-बैठने में बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है. यह बीमारी तनाव (Stress) का बड़ा कारण भी बनती है. यह बीमारी महिलाओं (Women) में ज्यादा पाई जाती है. आइए जानते हैं इसके लक्षण और कारण के बारे में. साथ ही जानेंगे क्या है इसके रोकथाम के उपाय.

    लक्षण
    फिश ओडर सिंड्रोम के कोई खास लक्षण तो नहीं हैं. इससे पीड़ित व्यक्ति भी सामान्य लोगों की तरह ही जिंदगी जीता है.

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    सड़ी दुर्गंध आना
    आपको बता दें कि इस बीमारी का सबसे बड़ा लक्षण यह है कि इसमें व्यक्ति से सड़ी मछली जैसी सहन न करने वाली बदबू आती है. यह गंध नियमित रूप से या समय-समय पर भी आ सकती है. बहुत ज़्यादा पसीना आना भी इसका लक्षण है. इसकी तेज गंध सांस, पसीना, मूत्र, मासिक धर्म रक्त और योनि द्रव को प्रभावित करती है.

    इन पदार्थों को अधिक मात्रा में खाना
    कुछ खाद्य पदार्थ जैसे अंडा, मछली और डेयरी उत्पादों का जरूरत से ज्यादा सेवन करना भी इसके लक्षणों में आता है. ओरल गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना और शारीरिक व भावानात्मक तनाव इसके लक्षण हैं. बता दें कि यूरिन और जैनेटिक टेस्ट से इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है.

    फिश ओडर सिंड्रोम का कारण
    यह सिंड्रोम एक मोटाबोलिक (Metabolic) विकार माना जाता है जो कि एफएमओ 3 (FMO3) जीन में बदलाव की वजह भी हो सकता है. एफएमओ3 जीन शरीर को उन एंजाइम का स्राव करने के लिए कहता है जो ट्राइमिथेलाइन और नाइट्रोजन जैसे कंपाउंड को अलग करने का काम करता है. इन कंपाउंड का रूप फिश और पारदर्शी, ज्वलनशील और हाइग्रोस्कोपिक जैसा होता है. शरीर में इन कंपाउंड के मौजूद होने की वजह से सड़ी मछली जैसी दुर्गंध आने लगती है. इस बीमारी में गंध किसी में तेज तो किसी में कम आती है. तेज गंध आने का कारण अत्यधिक एक्सरसाइज, तनाव और ज्यादा भावनात्मक होना है. महिलाओं के लिए मासिक धर्म और मेनोपॉज के दिनों में इसकी समस्या अधिक बढ़ जाती है. वहीं, गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं के लिए यह परेशानी का सबब बन जाता है.

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    गंध को दूर करने के लिए ध्यान देने वाली बातें
    जो लोग इस समस्या से परेशान है उनके लिए जरूरी है कि वे दाल, बींस, लाल मांस, अंडा और मछली का सेवन करने से बचें क्योंकि इनमें ट्राइमिथइलामाइन, नाट्रोजन, कोलीन, लेसिथिन, सल्फर और सारनिटाइन होता है जिसके कारण शरीर से सड़ी दुर्गंध आने लगती है. एंटीपर्सपिरेंट्स का इस्तेमाल करें. अपने कपड़े बार-बार बदलें और धोएं. अत्यधिक पसीने को रोकने के लिए ज्यादा एक्सरसाइज से बचें. खुद पर तनाव को हावी न होने दें. अपनी त्वचा को थोड़े अम्लीय साबुन या बॉडी वॉश से धोएं. जिस साबुन में पीएच का स्‍तर 5.5 और 6.5 हो वही इस्‍तेमाल करें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)