Doctor's Day Special: 'मेल गाइनिकॉलजिस्ट को लेकर बदला है लोगों का नजरिया'

डॉ. बिस्‍वा भूषण दास, गाइनिलेप्रोस्‍कोपिक सर्जन
डॉ. बिस्‍वा भूषण दास, गाइनिलेप्रोस्‍कोपिक सर्जन

आज समय बदला है और अब बड़ी संख्‍या में महिला मरीज (Female Patient) पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट (Male Gynecologist) के पास पहुंच रही हैं, बिना किसी हिचकिचाहट के.

  • Share this:
डॉक्‍टरी पेशे में महिला हो या पुरुष यह मायने नहीं रखता. अहमियत इस बात की है कि डॉक्‍टर (Doctor) अपने पेशेंट की समस्‍या को कितनी अच्‍छी तरह समझ कर दूर कर सकता है. आज समय बदला है और अब बड़ी संख्‍या में महिला मरीज (Male Gynecologist) के पास पहुंच रही हैं, बिना किसी हिचकिचाहट के. ऐसे में यह सवाल अपने आप बेमायनी हो जाता है कि महिलाएं पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट से इलाज कराने में असहज महसूस करती हैं. नेशनल डॉक्‍टर्स डे (National Doctor's Day 2020) के मौके पर हमने बात की दिल्‍ली के एम्‍स अस्‍पताल (AIIMS Hospital) में रह चुके डॉ. बिस्‍वा भूषण दास (Dr. Biswa Bhushan Dash) से और इसी धारणा से जुड़े उनके कुछ अनुभव साझा किए. वे आज कल दिल्‍ली के रिजॉइस हॉस्पिटल (Rejoice Hospital) में गाइनिलेप्रोस्‍कोपिक सर्जन के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

डॉ. बिस्‍वा भूषण दास का कहना है कि प्रैक्टिस की शुरुआत में कुछ दिक्‍कतें आईं मगर आज हालात बेहतर हैं. अब महिलाएं पुरुष डॉक्टरों से इंटरनल चेकअप कराने में ज्यादा नहीं झिझकतीं. हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि उत्तर भारत में पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट को उतने खुले तौर पर स्वीकार नहीं किया जाता. जितना कि मुंबई, कोलकाता या उड़ीसा आदि शहरों में. वह कहते हैं कि 'ऐसा नहीं है कि फीमेल ही फीमेल का इलाज कर सकती हैं. दरअसल, इसको लेकर लोगों की सोच गलत है. मैं उड़ीसा से हूं और वहां ज्‍यादातर पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट होते हैं. जो सोच पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट को लेकर उत्तर भारत में है, वह उड़ीसा में कभी नहीं रही.'

पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट को लेकर अब लोगों की सोच में फर्क आया है.
पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट को लेकर अब लोगों की सोच में फर्क आया है.




'मैंने ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट से पढ़ाई की है. एम्‍स में आप देखेंगे यहां जो सेलेक्‍शन होता है वह ऑल इंडिया लेवल पर होता है. तो इसमें चुन कर काफी मेल गाइनिकॉलजिस्ट आते हैं. हालांकि यह मेरे लिए एक चैलेंज था उत्तर भारत में एक पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट के तौर पर काम करना. मैंने अपनी प्रैक्टिस 2009 में शुरू की थी. 2003-09 तक मैं एम्‍स में था. तब मुझे कुछ डॉक्‍टर्स ने ही बताया था कि पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट के तौर पर मुझे प्रैक्टिस में थोड़ी दिक्‍कत आ सकती है. मगर आप विश्‍वास कीजिए आज के समय में मेरे पास सर्जरी के लिए काफी पेशेंट दिल्‍ली और दिल्‍ली से बाहर के शहरों से भी आते हैं. उनका कहना होता है कि हमें पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट से ही सर्जरी करानी है, तो तब से आज में यानी जबसे मैंने प्रैक्टिस शुरू की थी, आज बहुत फर्क आया है.'
जब मैंने दिल्‍ली में प्रैक्टिस शुरू की थी तो यहां चार-पांच पुरुष गाइनिकॉलजिस्ट ही थे मगर आज पचास से ज्‍यादा हैं. दरअसल, यह चीज पेशेंट के माइंड से भी हट गई है अब. आज वह हालात बिल्‍कुल भी नहीं हैं. दरअसल, जो लोग शिक्षित थे और अच्‍छी सोसायटी से थे, वे लोग कभी इस बात को लेकर नहीं चले. मगर जो अशिक्षित तबके से थे वे सोचते थे कि साथ में सास भी है, ससुर भी है और पति भी तो ऐसे में पुरुष डॉक्‍टर को कैसे दिखाएं. हालांकि साउथ दिल्‍ली में प्रैक्टिस करते हुए मेरे साथ यह प्रोब्‍लम कभी नहीं हुई. दरअसल, जो नजरिया उस समय लोगों का था, वह फिलहाल अब बिल्‍कुल नहीं रहा.

अभी तो लोग यह सोचते हैं कि डॉक्‍टर साहब रात को बारह बजे भी उठ कर आ सकते हैं और पेशेंट को देख सकते हैं. हालांकि अब भी डिलिवरी को लेकर ज्‍यादातर लोग यही सोचते हैं कि फीमेल डॉक्‍टर ही ठीक है, लेकिन जब बात लेप्रोस्‍कोपिक सर्जरी करने की आती है या टेस्‍ट ट्यूब बेबी करना है या कोई यूट्रस रिमूव करना है तब इन मामलों में ज्‍यादातर मेल डॉक्‍टर्स को ही अहमियत दी जाती है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज