Home /News /lifestyle /

मास्क पहनने पर सांस लेने में दिक्कत होती है? इन तरीकों को अपनाकर फेफड़ों को करें मजबूत

मास्क पहनने पर सांस लेने में दिक्कत होती है? इन तरीकों को अपनाकर फेफड़ों को करें मजबूत

विशेषज्ञों का कहना है कि मास्क को केवल नाक, मुंह और ठुड्डी के ऊपर रखें.

विशेषज्ञों का कहना है कि मास्क को केवल नाक, मुंह और ठुड्डी के ऊपर रखें.

जब हम मास्क (Mask) पहनते हैं तो शरीर (Body) से कार्बन डाईऑक्साइड का बाहर निकलना प्रभावित होता है, जो फेफड़ों (Lungs) के लिए खतरनाक हो सकता है. इसके लिए आपको कुछ तरीके अपनाने होंगे.

  • Myupchar
  • Last Updated :
    कोरोना वायरस (Corona virus) के प्रकोप ने लोगों की जिंदगी में मास्क (Mask) को एक अहम हिस्सा बना दिया है. कोविड-19 (Covid-19) के चपेट में आने के जोखिम को कम करने के लिए मास्क पहनना अनिवार्य बना दिया है. मास्क को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इसको केवल नाक, मुंह और ठुड्डी के ऊपर रखें और सिर्फ इसकी पट्टियों को ही छुएं, सतह को नहीं. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन का कहना है कि मास्क को लेकर यह सुनिश्चित करें कि यह अच्छी तरह से फिट हो और चेहरे और कपड़े के बीच और किनारों की ओर कोई जगह खाली न हो. इसमें कोई दो राय नहीं कि पूरे समय मास्क पहने रखना असहज है.

    कई लोगों को इसे पहनने के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है, विशेष रूप से उन लोगों को जो श्वसन संबंधी बीमारी से पीड़ित हैं. सभी ने अपने विज्ञान की कक्षाओं के दौरान सुना होगा कि शरीर ऑक्सीजन लेता है और कार्बन डाईऑक्साइड छोड़ता है. फेफड़े ऑक्सीजन और कार्बन डाईऑक्साइड के आदान-प्रदान की अनुमति देते हैं, जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण है. जब लंबे समय तक मास्क पहनते हैं तो कार्बन डाईऑक्साइड का बाहर निकलना प्रभावित होता है, जो फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकता है. हालांकि, यह केवल तभी हानिकारक है जब मास्क बहुत टाइट हो और लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए.

    myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि जब फेफड़े रोगग्रस्त हो जाते हैं तो ये कार्बन डाईऑक्साइड निकालने और पर्याप्त ऑक्सीजन ग्रहण करने का काम ठीक से नहीं कर पाते. इसलिए बेहतर होगा कि फेफड़ों को ही मजबूत किया जाए. सांस लेने पर बेहतर नियंत्रण किसी भी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करने के जोखिम को कम कर सकता है. जानिए फेफड़ों को मजबूत करने के कुछ आसान उपाय -

    डायाफ्रामिक ब्रीदिंग या उदरीय श्वसन
    डायाफ्रामिक ब्रीदिंग या उदरीय श्वसन में फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए डायाफ्राम (उदर) की मांसपेशियों का इस्तेमाल किया जाता है. इस क्रिया में नाक से सांस लेते हैं और मुंह से छोड़ते हैं. डायाफ्राम सांस लेने में सहायता करता है, जिसका मतलब है कि एक कमजोर डायाफ्राम सांस की तकलीफ का कारण बन सकता है. इस तरह की सांस की क्रिया क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज से पीड़ित लोगों के लिए भी मददगार है.

    नियमित व्यायाम
    नियमित व्यायाम से मांसपेशियों की शक्ति और कार्य में सुधार हो सकता है. जब नियमित रूप से व्यायाम करते हैं तो मांसपेशियों को कम मात्रा में ऑक्सीजन और कम कार्बन डाईऑक्साइड की जरूरत होती है, जो फेफड़ों को अच्छे से काम करने में मदद कर सकती है.

    खूब पानी पिएं
    अपने संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए हाइड्रेटेड रहना जरूरी है. दिनभर पानी पीने से फेफड़ों में अंदरूनी परत नम रहती है, जो फेफड़ों को मजबूत बनाने में मदद करता है.

    सही हो मुद्रा
    सही मुद्रा या पोश्चर फेफड़ों की मजबूती से संबंध रखता है. खराब पोश्चर श्वसन में बाधा डाल सकता है. जब फेफड़ों के कार्य में सुधार की बात आती है तो मुद्रा भी महत्वपूर्ण है. खड़े होने या बैठने के दौरान झुके हुए न रहें. इसके बजाए पीठ को एकदम सीधे रखकर बैठें या खड़े रहें और अपनी छाती को आगे की और निकालें.

    अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोविड-19 के चलते फेफड़ों की रक्त वाहिकाएं खिंच कर लंबी होने के संकेत मिले, जानें क्या है इसके मायने पढ़ें।

    न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।undefined

    Tags: Corona, Health, Mask, News18-MyUpchar

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर