Sunday Special: लॉकडाउन में कर रहे हैं वर्क फ्रॉम होम? आज ही जान लें इसके फायदे और नुकसान

Sunday Special: लॉकडाउन में कर रहे हैं वर्क फ्रॉम होम? आज ही जान लें इसके फायदे और नुकसान
कई सेक्टर्स में वर्क फ्रॉम होम मुमकिन है. आने वाले समय में इसका चलन और अधिक बढ़ सकता है.

लॉकडाउन में छात्र ऑनलाइन (Online) पढ़ाई कर रहे हैं तो वहीं कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से ही काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) करने के लिए कहा है. पिछले काफी समय से लोग वर्क फ्रॉम होम कर भी रहे हैं लेकिन इससे एक तरफ तो कुछ लोगों को फायदा हो रहा है लेकिन दूसरी तरफ उन्हें कुछ नुकसान भी झेलना पड़ रहा है.

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कोरोना वायरस (Coronavirus) के प्रकोप से बचने के चलते देशभर में लॉकडाउन (Lockdown) जारी है. हालांकि कई जगहों पर इस लॉकडाउन में कुछ छूट दी गई है लेकिन लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing)  को अपनाने और बार बार हाथों को साबुन से धोने के लिए कहा जा रहा है. बाजार, मॉल, सिनेमा हॉल, म्यूजियम सब बंद हैं. स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों से लेकर कंपनियों के कर्मचारियों को भी घर पर रहने के लिए कहा गया है. लॉकडाउन में छात्र ऑनलाइन (Online) पढ़ाई कर रहे हैं तो वहीं कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से ही काम करने यानी वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) करने के लिए कहा है. पिछले काफी समय से लोग वर्क फ्रॉम होम कर भी रहे हैं लेकिन इससे एक तरफ तो कुछ लोगों को फायदा हो रहा है लेकिन दूसरी तरफ उन्हें कुछ नुकसान भी झेलना पड़ रहा है. आइए जानते हैं वर्क फ्रॉम होम कंपनी, कर्मचारियों और उनके परिवार के लिए कैसे फायदा और नुकसान पहुंचा सकती है.

वर्क फ्रॉम होम शुरुआत में चुनौतीपूर्ण लगता है
इस लॉकडाउन ने यह साबित कर दिया है कि कई सेक्टर्स में वर्क फ्रॉम होम मुमकिन है. आने वाले समय में इसका चलन और अधिक बढ़ सकता है. रिमोट वर्क भी हकीकत बन सकता है. रिमोर्ट वर्क का अर्थ है कि आप अपना काम दफ्तर के बजाय किसी दूसरी जगह से आसानी से कर सकते हैं. यह आपका घर, मॉल, कैफे कुछ भी हो सकता है. दफ्तर से बाहर काम करने के अपने फायदे और नुकसान हैं. इसके लिए कंपनी और कर्मचारी दोनों को विशेष ध्यान रखना होता है. वर्क फ्रॉम होम शुरुआत में चुनौतीपूर्ण लगता है लेकिन बाद में यह आदत बन जाती है.

रिमोट वर्क लोगों को बताता है कि वह अपने समय दफ्तर आने-जाने, निरर्थक मीटिंग और खुद को व्यस्त दिखाने में बर्बाद करते हैं.




कामकाज की क्षमता जल्द खत्म होती नजर आती है


वर्क फ्रॉम होम करते हुए शुरुआती समय में काफी थकान महसूस होती है. कामकाज की क्षमता जल्द खत्म होती नजर आती है, कामकाज नीरस लगता, अकेलेपन के चलते सामाजिक जीवन खत्म दिखाई पड़ता है. दरअसल जब लोग दफ्तर जाते हैं तो उनको लगता है कि वह काम कर रहे हैं. कर्मचारियों को पता होता है कि कोई मीटिंग कितनी जरूरी है या किसी सेमिनार की अहमियत कितनी अधिक है. मगर रिमोट वर्क लोगों को बताता है कि वह अपने समय दफ्तर आने-जाने, निरर्थक मीटिंग और खुद को व्यस्त दिखाने में बर्बाद करते हैं.

कंपनी की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है
कई रिसर्च बताती हैं कि दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में लोग साल भर दफ्तर आने-जाने में जितना समय लगाते हैं. वह उनके एक महीने के कामकाजी घंटे के बराबर है. ऐसे में उनकी उत्पादन क्षमता कम हो जाती है. रिमोर्ट वर्क शुरू करने पर पता चलता है कि कर्मचारी ट्रैवलिंग और गैर-जरूरी मीटिंग में कितना समय नष्ट कर रहे थे. यह समय किसी बेहतर काम में खर्च किया जाए तो कंपनी की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है. इसका असर कर्मचारियों की ग्रोथ पर भी नजर आता है.

लोग नतीजों की कसौटी पर खरा उतरते हैं
वहीं कंपनी के नजरिए से बात करें, तो इस प्रणाली के तहत काम को सुनियोजित और सुव्यवस्थित करना पड़ता है. इस व्यवस्था में कर्मचारी की संतुष्टि का स्तर भी काफी बेहतर होता है. जब क्षमता अधिक होती है और लोग नतीजों की कसौटी पर खरा उतरते हैं. इससे लोगों की फाइनेंशियल और पर्सनल ग्रोथ भी बेहतर होती है. इसके साथ ही वर्क फ्रॉम होम करने से पारिवारिक जीवन का संतुलन और सामाजिक खुशी का स्तर भी अधिक होता है.

वर्क फ्रॉम होम का अर्थ ये नहीं कि आप सारा समय घर पर काम करते रहें. ऐसा करने से आपकी शारीरिक और मानसिक हालत बिगड़ सकती है.


सड़कों से ट्रैफिक कम हो सकता है
वहीं हेल्थ के नजरिए से भी वर्क फ्रॉम होम फायदेमंद है. दफ्तर जाने के लिए यदि कम लोग बाहर निकलेंगे तो सड़कों से ट्रैफिक कम हो सकता है. हालांकि, इस दौरान कई बातों को ध्यान रखना जरूरी होता है. वर्क फ्रॉम होम का अर्थ ये नहीं कि आप सारा समय घर पर काम करते रहें. ऐसा करने से आपकी शारीरिक और मानसिक हालत बिगड़ सकती है. आप कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से घिर सकते हैं. कुछ लोगों को घंटो एक जगह बैठकर वर्क फ्रॉम हो करने से सर्विकेल पेन की परेशानी भी हो सकती है.

अपने काम के प्रति ईमानदार रहें
वहीं स्लिप डिस्क की समस्या भी नजर आ सकती है जो भविष्य में आपके लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती है. कर्मचारी और कंपनियों, दोनों को ही यह समझना चाहिए कि निजी जीवन के लिए समय निकलना भी बहुत जरूरी होता है. इसलिए अपने ऑफिस के काम के समय को निर्धारित रखना जरूरी है. साथ ही, कर्मचारियों को अपने काम के प्रति ईमानदार रहना चाहिए. वह दफ्तर की तरह घर में भी ब्रेक ले सकते हैं, मगर काम की प्राथमिकता को कम नहीं कर सकते.
First published: June 7, 2020, 11:02 AM IST
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