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प्रेग्नेंसी के दौरान जरूर करें पेरिनियल मसाज, आसान होगी नॉर्मल डिलीवरी

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Updated: November 28, 2019, 1:54 PM IST
प्रेग्नेंसी के दौरान जरूर करें पेरिनियल मसाज, आसान होगी नॉर्मल डिलीवरी
पेरिनियल को मलाज करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को हो सके तो शॉवर के तुरंत बाद का समय चुनना चाहिए.

जरूरी है कि गर्भावस्था के शुरुआत से ही प्रेग्नेंट महिलाएं पेरिनियल मसाज करती रहें ताकि डिलीवरी के वक्त तक उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी न हो.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 1:54 PM IST
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प्रेग्नेंसी के दौरान नॉर्मल डिलीवरी और मां के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए अक्सर डॉक्टर्स कई सारे सुझाव देते रहते हैं. कई डॉक्टर्स और गायनोकोलॉजिस्ट गर्भवती मां को नॉर्मल डिलीवरी के लिए प्रेग्नेंसी के दौरान ही पेरिनियल मसाज करने की सलाह देते हैं. डॉक्टरों की मानें तो ऐसा करने से नॉर्मल डिलीवरी आसान होती है. इसलिए जरूरी है कि गर्भावस्था के शुरुआत से ही प्रेग्नेंट महिलाएं पेरिनियल मसाज करती रहें ताकि डिलीवरी के वक्त तक उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी न हो. दरअसल पेरिनियल मसाज करने से बच्चे के जन्म के लिए इस जगह को फैलने में मदद मिलती है, इससे प्रसव के दौरान दर्द भी कम होता है.

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क्या है पेरिनियल मसाज?
पेरिनियल वजाइना और एनस के बीच फर्म त्वचा और मांसपेशियों से बना एक छोटा सा क्षेत्र है. यह वजाइना से एनस तक फैलता है. गर्भावस्था के दौरान यह सामान्यतौर से अधिक वजन सहन करता है और डिलीवरी के समय बच्चा इसी से बाहर आता है. यह बाद में गर्भाशय से जुड़े परेशानी का कारण बन सकता है. बच्चे के जन्म के दौरान यह हिस्सा फैल जाता है या सर्जरी के दौरान इसे काट दिया जाता है. यह क्षेत्र बच्चे को गर्भ से बाहर निकलने के लिए मदद करता है.

त्वचा के खिंचाव को बेहतर बनाने के लिए जरूरी
अगर सर्जिकल कट किया जाता है तो डिलीवरी के बाद उसे स्टिच करना जरूरी हो जाता है. इसलिए इस क्षेत्र की मसाज करना फायदेमंद होता है. पेरिनियल मसाज वजाइना और एनस के बीच मांसपेशियों की त्वचा के खिंचाव को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है. गर्भावस्था के दौरान 34वें सप्ताह से महिलाएं खुद या किसी अपने की मदद से यह मसाज कर सकती हैं. इस मसाज के दौरान उंगलियों पर तेल या लोशन लगा कर घड़ी की गति में धीरे-धीरे पेरिनियल क्षेत्र और वजाइना के आसपास मालिश करनी होती है.

कैसे करें मसाज?
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पेरिनियल को मलाज करने के लिए प्रेग्नेंट महिला को हो सके तो शॉवर के तुरंत बाद का समय चुनना चाहिए. इसके लिए पहले पेरिनियल इलाके को हल्के गर्म पानी से धोकर साफ कर लें. इससे वहां के मसल्स को आराम मिलेगा और धीरे-धीरे वह नरम पड़ने लगेगी. फिर पीठ के बल सीधे लेटकर मसाज शुरू करें. पहले अपने हाथों में नारियल तेल या कोई तेल लगाकर पेरिनियल के आस-पास हल्के हांथों से रगड़ें और मसाजश करें. वजाइना और एनस के बीच के क्षेत्र पर सर्कल कर के हांथ घुमाएं और लगभग एक मिनट के लिए आंतरिक और बाहरी पेरिनियल क्षेत्र की मसाज करें.

10 मिनट तक करें मसाज
जैसे जैसे आप अधिक आरामदायक महसूस करना शुरू करें आप धीरे-धीरे खिंचाव लाने के लिए अधिक दबाव का उपयोग कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी के लास्ट स्टेज पर पहुंचने में असमर्थ होने पर आपका पार्टनर भी इसमें आपकी मदद कर सकता है. एक बार में इस मसाज को कुछ मिनटों के लिए शुरू करने की कोशिश करें, फिर इसे दस मिनट के लिए सप्ताह में तीन से चार बार करें. इस तरह के मसाज से आपका पेरिनियल धीरे-धीरे सॉफ्ट और फेलेक्सिबल होने लगेगा, जिससे डिलीवरी के वक्त आपको कम परेशानी होगी.

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पेरिनियल मसाज के फायदे
यह प्रसवकालीन मसाज पूरी तरह से बच्चे के जन्म के दौरान गंभीर परेशानी के खतरे को कम कर सकता है. पेरिनियल मालिश से नॉर्मल डिलीवरी में आने वाले जोखिम को कम करने में मदद मिलती है. पेरिनियल मालिश वजाइना को खिंचाव देने में मदद करता है. यह वजाइना की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाता है और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करके एपिसीओटॉमी की आवश्यकता को कम करता है. विशेष रूप से पहली बार मां बन रही महिलाओं के लिए यह ज्यादा लाभदायक होता है. यह मसाज डिलीवरी के दौरान इस क्षेत्र में दर्द होने की संभावना को भी यह कुछ कम कर देता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 28, 2019, 1:54 PM IST
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