कोरोना वायरस के दौरान पीरियड्स और सेक्स हॉर्मोन का संबंध, कुछ तरह की बातें आईं सामने

क्या कोरोनावायरस और पीरियड्स में कोई संबंध है?
क्या कोरोनावायरस और पीरियड्स में कोई संबंध है?

सभी अध्य्यनों में तर्क निकलकर आया है जो महिला के सेक्स हॉर्मोन्स (Sex Hormones) और उनमें फैलने वाले संक्रामक रोगों के बीच के संबंध की ओर इशारा करते हैं. इसमें महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या पीरियड्स (menstruation) भी शामिल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 1:41 PM IST
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दुनियाभर में फैली महामारी कोरोनावायरस (Corona virus) लोगों के जी का जंजाल बनी हुई है. कोरोना के मामलों में भारत का दूसरा स्थान है. वहीं दुनिया में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले में अमेरिका में दर्ज हुए हैं. एक अध्ययन के मुताबिक कोरोना वायरस का प्रभाव महिलाओं पर ज्यादा देखने को मिल रहा है. सभी अध्य्यनों में तर्क निकलकर आया है जो महिला के सेक्स हॉर्मोन्स और उनमें फैलने वाले संक्रामक रोगों के बीच के संबंध की ओर इशारा करते हैं. इसमें महिलाओं की सबसे बड़ी समस्या पीरियड्स (menstruation) भी शामिल है. सवाल यह है कि क्या कोरोनावायरस और पीरियड्स में कोई संबंध है? मेडपेज टुडे (MedPage Today) में छपी हालिया शोध में पाया गया है कि गैर-रजोनिवृत्ति वाली महिलाओं में रजोनिवृत्ति (Menopause) वाली महिलाओं की तुलना में कम शिकायतें आई हैं.

इटली में एक समूह द्वारा प्रकाशित एक अन्य शोध ने अनुमान लगाया कि एस्ट्रोजेन (E2 और सिंथेटिक्स जैसे एथिनाइलेस्ट्रैडिओल) एक महिला के शरीर में संक्रामक रोग जैसे कोरोनावायरस के खिलाफ निवारक के रूप में कार्य कर सकते हैं. न्यूज 18 ने दक्षिण एशियाई फेडरेशन ऑफ मेनोपॉज सोसायटी की पूर्व अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा से इस बारे में बात की. हमने पूछा कि SARS-CoV-2 वायरस महिलाओं के शरीर के लिए कैसे खतरनाक है और क्या पीरियड्स की इसमें कोई भूमिका है?

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डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया- 'पहले हमें महिला हॉर्मोन 'एस्ट्रोजन' के बारे में समझने की जरूरत है क्योंकि प्रतिरक्षा प्रणाली ( Immune System) में इनका खास महत्व होता है. महिला हॉर्मोन को हम 'एस्ट्रोजन' कहते हैं, इनकी शुरुआत बच्चेदानी से होती हैं जहां अंडा फ्रीज होता है. अंडे में विभिन्न कोशिकाएं होती हैं, जिनसे 'एस्ट्रोजन' का प्रवाह होता है. एक बार जब ओव्यूलेशन (Ovulation) हो जाता है और ये अंडे फट जाते हैं तो कोशिकाएं अपना रूप बदल कर 'प्रोजेस्टेरोन' पैदा करती हैं, महिला के शरीर के प्रत्येक अंग में एस्ट्रोजन होते हैं.'
उन्होंने आगे बताया कि शरीर में जहां कहीं भी प्रापक (Receptors) की मात्रा ज्यादा होती है वहीं इनका प्रभाव बढ़ता है. प्रापक ( Receptors) एक तरह से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं. हमारे पास दो तरह की प्रतिरक्षा प्रणाली होती है एक वो जो हमे जन्मजात मिलती है और दूसरी वो जो हमारे अनुकूल होती है और इन सभी पर हमारे हॉर्मोन का असर पड़ता है. हालांकि, यह न केवल एस्ट्रोजन है बल्कि अन्य प्रकार के हॉर्मोन्स हैं जो शरीर की रक्षा करते हैं.'

डॉ. मल्होत्रा ने एक हालिया अध्ययन का जिक्र करते हुए कोरोना वायरस और पीरियड्स के बीच के संबंध को समझाया. उन्होंने बताया- 'रिसर्च में पाया गया है कि कोरोना वायरस ऐस-2 प्रापक के जरिए हमारे शरीर में जा रहा है. महिलाओं के शरीर में ऐस-2 प्रापक की संख्या पुरुषों के मुकाबले कम है. इसका कारण महिला के शरीर में हॉर्मोन एस्ट्रोजन का होना बताया जाता है. मेनोपॉज महिलाओं में कोविड -19 का अधिक खतरा है, क्योंकि जब महिला के शरीर में एस्ट्रोजन की कमी होने लगती है तो उन्हें गैर-रजोनिवृत्त महिलाओं की तुलना में कोरोना वायरस का खतरा बढ़ जाता है.

सवालः कोविड-19 और मेनोपॉज के बीच संबंध से महिला के शरीर में मौजूद हॉमोन्स के संतुलन पर कितना असर पड़ता है?

जवाबः कोविड-19 का शरीर में मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन्स पर कितना असर पड़ता है अभी ऐसा कुछ भी पता नहीं चला है, लेकिन इसका पता लगाया जा रहा है. गर्भवती महिलाओं में एस्ट्रोजन की मात्रा ज्यादा होती है तो इसलिए उनमें कोरोना का खतरा कम है. समाज में महिलाओं और लड़कियों के पीरियड्स के प्रति अलग तरह की प्रवृति है क्योंकि कई जगहों पर ऐसी भी मान्यता है कि उन्हें उन दिनों में गुप्तागों को छूने की मनाही होती है.

सवालः क्या इस तरह की कलंकित मान्यताएं मेनोपॉज वाली महिलाओं को कोरोना वायरस से लड़ने में प्रभावित नहीं करती?

जवाबः बिल्कुल. मैं कहना चाहूंगी कि महिला के साथ इस स्थिति में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए, क्योंकि कोरोना वायरस नाक, गले और आंखों के जरिए भी हमारे शरीर में प्रवेश करता है और किसी भी अध्ययन में ऐसा नहीं पाया गया है कि कोरोना वायरस हमारे शरीर के गुप्तांगों से प्रवेश कर सकता है. कुपोषण, एनीमिया, मधुमेह या उच्च रक्तचाप शरीर पर बुरा असर छोड़ते हैं. इस कारण से हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जिससे शरीर में वायरस का खतरा अधिक बढ़ जाता है. इसलिए मुझे लगता है कि हमें कोविड-19 को पीरियड्स से जोड़कर नहीं देखना चाहिए.

न्यजू 18 ने प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रिंकू सेनगुप्ता से भी इस बारे में बातचीत की.

सवालः क्या Covid-19 का पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) से पीड़ित महिलाओं पर कोई प्रभाव पड़ता है?

जवाबः पहले बता दें कि PCOS प्रजनन आयु की महिलाओं में हॉर्मोनल विकार आम है. यह कहना कठिन है क्योंकि हमारे पास भी ऐसा कोई सटीक डेटा नहीं है, लेकिन अन्य संक्रमण की तरह अनियमित पीरियड्स को कोविड-19 के साथ जोड़कर देखा जा सकता है, यदि महिला पहले ही PCOS की अवस्था में है तो उस पर इसका असर पड़ सकता है, लेकिन इस पर हमें अभी और अध्ययन करने की जरूरत है. गर्भवती महिलाओं में SARS जैसे अन्य कई संक्रमणों की तरह कोविड-19 शामिल है. मुझे लगता है कि गर्भावस्था काल में कोविड-19 का इंफ्ल्यूऐंजा वायरस के मुकाबले कम खतरा है.'

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आपको बता दें कि चीन में कई गैर-रजोनिवृत्ति वाली महिलाओं ने दावा किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के बाद भी उन्हें पीरियड्स हुए हैं. भारतीय महिलाओं पर इसे अप्लाई करना थोड़ा मुश्किल होता है. इस पर डॉ सेनगुप्ता ने बताया कि हमें भारत में इस तरह का डेटा नहीं मिला है, अगर महिलाओं को पीरियड्स की समस्या दोबारा आई भी है तो उनमें संक्रमण के तनाव के कारण ऐसा हुआ है, इसलिए हम ऐसी किसी रिपोर्ट के आधार पर कुछ भी तय नहीं कर सकते.
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