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बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक- एक अनजानी, अनकही कहानी

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 11:55 AM IST
बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक- एक अनजानी, अनकही कहानी
योडिग्रेडेबल प्लास्टिक में बायोडिग्रेडेशन की प्रक्रिया के लिए नियंत्रित वातावरण में उच्च तापमान की आवश्यकता होती है.

बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक प्राकृतिक सामग्री या फिर पेट्रोकेमिकल संसाधनों से बनाया जाता है, जिसमें सामान्य प्लास्टिक मे उपलब्ध होने वाले केमिकल्स नहीं होते हैं.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 11:55 AM IST
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बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक यह ऐसा प्लास्टिक हैं जो अपघटित होने की क्षमता रखता हैं इससे किसी भी तरह का पर्यावरणीय खतरा नहीं हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में कुछ अनजान बातों को. आप सभी के मन में यह सवाल ज़रूर होगा कि प्लास्टिक कैसे बायोडिग्रेडेबल हो सकता है. बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक प्राकृतिक सामग्री या फिर पेट्रोकेमिकल संसाधनों से बनाया जाता है, जिसमें सामान्य प्लास्टिक मे उपलब्ध होने वाले केमिकल्स नहीं होते हैं.

पर्यावरण में रहते सूक्ष्मजीव, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की संरचना को सड़ाने का काम करते हैं, जिससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान नहीं होता. रोगाणुओं के एंजाइम प्लास्टिक का उपयोग अपने ऊर्जा के स्रोत के रूप में करते हैं. हालांकि, इस प्लास्टिक का बायोडिग्रेडेशन दर, इसके घटकों, मौसम, ऑक्सीजन के स्तर और तापमान जैसी कई चीज़ों पर निर्भर करता है. कुछ बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक में बायोडिग्रेडेशन की प्रक्रिया के लिए नियंत्रित वातावरण में उच्च तापमान की आवश्यकता होती है.

इसे अन्य प्लास्टिक के साथ रिसाइकल भी नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे संदूषण होने की संभावना रहेगी.
इसे अन्य प्लास्टिक के साथ रिसाइकल भी नहीं किया जा सकता.


डिग्रेडेशन की प्रक्रिया सुनने में पर्यावरण के अनुकूल लगती है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी तक सिद्ध नहीं हुई. सामान्य प्लास्टिक से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक में बदलाव के विचार मुख्य कारण है ग्रीनहाउस गैसों को कम करना. जो ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण है. कुछ बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक विघटित होने की प्रक्रिया के दौरान दो तरह के गैस, मीथेन और कार्बन-डाइऑक्साइड को छोड़ता है. यह दोनों गैस ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करते हैं.

जैसा की वे दावा करते है यह पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल नहीं है. कुछ अध्ययन के बाद यह सामने आया हैं जो कि कुछ बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक, माइक्रोप्लास्टिक और मेटल छोड़ जातें हैं जो की प्रदूषण बढ़ने का कारण बन सकता हैं. डिग्रेडेशन की प्रक्रिया एक ऐसी समस्या है जो अभी तक हल नहीं हुई. बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के निपटान का कोई उत्तम तरीका सामने नहीं आया है. और हां, यह भी ध्यान में रहे कि इसे अन्य प्लास्टिक के साथ रिसाइकल भी नहीं किया जा सकता क्योंकि इससे संदूषण होने की संभावना रहेगी.

कंपोस्टेबल होने के बावजूद बायो-डिग्रेडेबल प्लास्टिक की खाद बनाना एक मुश्किल काम हो सकता है, क्योंकि किसी भी बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक को 77 डिग्री से 140 डिग्री के बीच के एक सटीक तापमान की आवश्यकता होती है. खाद बनाना एक मुश्किल प्रक्रिया है जिसमे छांटना, कतरन, मिश्रण और सटीक तापमान की आवश्यकता होती है जो एक आम आदमी के लिए संभव नहीं है. घर बैठे खाद बनाना संभव नहीं है क्योंकि इसे बनाने के लिए एक विशिष्ट वातावरण, तापमान और नमी के स्तर की आवश्यकता होती है. भारत के कई शहरों में ऐसी सुविधाओं का अभाव होने के कारण बायो-प्लास्टिक्स सड़कों पर कूड़े की तरह पड़ा रहता हैं और सामान्य प्लास्टिक की तरह ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता हैं.

अधिकतर समय तो सामान्य प्लास्टिक की बोतलों पर बायोप्लास्टिक लेबल लगा कर बेचा जाता है. बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक इको-फ्रेंडली का एक बेहतरीन विकल्प है, लेकिन इसे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले घटकों के कारण इसके डिग्रेडेशन की अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. आपकी स्थानीय कूड़ा प्रबंधन प्रणाली बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक लेने के लिए तैयार होनी चाहिए. भारत में बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का उपयोग प्रशंसनीय नहीं होगा क्योंकि इस प्लास्टिक कोबायोडिग्रेड करने के लिए इससे प्रतिबंधित शर्तों के तहत अलग तरह से व्यवहार करने की आवश्यकता है. लोगों से बायोडिग्रेडेबल कचरे को इकट्ठा करने की प्रक्रिया को शुरू कर उसे उद्योगों में भेजना जहा कई चीज़ों का ध्यान रखना होगा, ऐसी प्रक्रिया सुनने में ही मुश्किल लगती है.तो समाधान क्या है?
इस समस्या का एक ही समाधान है की पहले से मौजूद प्लास्टिक को रिसाइकल करन शुरू करें!

प्लास्टिक को कूड़ेदान में फेकने की बजाए इसे रीसायकल में डालना चाहिए.
प्लास्टिक को कूड़ेदान में फेकने की बजाए इसे रीसायकल में डालना चाहिए.


प्लास्टिक को कूड़ेदान में फेकने की बजाए इसे रीसायकल में डालना चाहिए. रिसाइकलिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे सभी प्रकार के प्रदूषण को रोक कर हरियाला वातावरण बनाया जा सकता है. बायो-प्लास्टिक के उपयोग का मतलब यह नहीं की हम प्लास्टिक को बीच सड़क फेंक दें. रिसाइकल एकमात्र ऐसा तरीका है जिससे नए प्लास्टिक के उत्पादन को नियंत्रित कर पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सकता है.

 



 

(पार्टनर्ड पोस्ट)

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First published: January 14, 2020, 12:49 PM IST
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