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लड़कियों की सेक्शुअलटी पुरुषों से नहीं होती कम, मगर हैं कुछ बड़े फर्क

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 11:50 AM IST
लड़कियों की सेक्शुअलटी पुरुषों से नहीं होती कम, मगर हैं कुछ बड़े फर्क
भारतीय समाज में फीमेल सेक्सुअलिटी पर बात करना बुरा माना जाता है

सैकड़ों भारतीय पुरुष अभी भी गूगल और क्वोरा पर सवाल पूछते हैं कि क्या महिलाओं में सेक्स को लेकर इच्छाएं होती हैं? और क्या महिलाओं भी चरम तक पहुंचती हैं ?

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  • Last Updated: February 10, 2020, 11:50 AM IST
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आमतौर पर भारत में "अच्छी भारतीय महिलाएं " अभी भी अपने मुंह से सेक्स, सेक्सुअलिटी और यौनइच्छाओं के बारे में नहीं बोलतीं. इस देश में आमतौर पर होने वाली बातचीत में विशेषकर महिलाओं की शारीरिक जरूरत कोई भी विषय नहीं होता. इसके बारे में कोई भी बात नहीं करता. नए डाटा के अनुसार लगभग 50 प्रतिशत महिलाओं में 18 से 24 वर्ष की अवस्था में यौन इच्छाएं सबसे ज्यादा होती हैं, और चार में से एक महिला का कहना है कि सब बेहतरीन सेक्स 18 से 20 की उम्र में था.

जहां भारतीय परिवार लड़कियों के लिए शादी के प्रस्ताव लाते समय भी सेक्स और यौन इच्छा जैसे शब्दों का जिक्र तक नहीं करते इसलिए ज्यादातर लड़कियां अपनी सहेलियों के साथ कानाफूसी करती हैं या इंटरनेट पर इसके बारे में जानकारियां खोजती हैं. भारतीय समाज महिलाओं की सेक्स लाइफ के बारे में खुद ही नियंत्रण करने वाली अथॉरिटी के तौर पर काम करती है. घरों के बंद दरवाज़ों के पीछे एक 'अच्छी भारतीय लड़की" का टैग होता है जो उन्हें अपनी सेक्सुअलिटी को स्वीकार करने से रोकती है मगर उन्हीं बंद दरवाज़ों के पीछे महिलाओं की यौन इच्छाओं से जुड़ीं हुईं अनगिनत कहानियां पड़ीं हुईं हैं जिनके बारे में किसी ने भी जानना नहीं चाहा.

मर्द बनाम औरत :
विज्ञान के अनुसार महिलाओं में यौनइच्छा पूरे महीने में घटती और बढ़ती रहती है जोकि उनके मासिक धर्म और ओव्यूलेशन ( अंडा बनने की प्रक्रिया ) पर निर्भर करता है. हालांकि युगल इसकी परवाह किये बिना कि माह में क्या समय चल रहा है उसी फ्रीक्वेंसी (आवृति) में शारीरिक सम्बन्ध बनाते रहते हैं. ज्यादातर आधुनिक युगल के साप्ताहिक या दैनिक पैटर्न बाहरी कारणों से निर्धारित होते हैं जैसे कि उन्हें मिलने वाली प्राइवेसी या काम के व्यस्त दिन. महिलाओं में सेक्सुअलिटी पुरुषों से कम नहीं होती लेकिन उनकी सेक्सुअलिटी का पैटर्न बदलता रहता है. महिलाओं का उत्तेजना और चरम तक पहुंचना पुरुषों से भिन्न होता है. पुरुषों की तरह महिलाएं भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य कारणों से यौनइच्छा की कमी महसूस कर सकती हैं.

समाज की बनायी हुई ये परिकल्पनाएं महिलाओं को पुरुषों की तुलना में सेक्सुअल तौर भी और भी ज्यादा प्रतिबाधित करती हैं.
समाज की बनायी हुई ये परिकल्पनाएं महिलाओं को पुरुषों की तुलना में सेक्सुअल तौर भी और भी ज्यादा प्रतिबाधित करती हैं.


फिर भी , सेक्स की इच्छा का अर्थ हमेशा दूसरे व्यक्ति के साथ सेक्सुअल एक्टिविटी करने का नहीं होता. यह प्रसंगों, व्यक्तित्व, उम्र, परिस्थितियों और संबंधों से जुड़े दूसरे पहलुओं के साथ बदलता रहता है. शादी से पहले कोई भी सेक्सुअल अनुभव न रखने वाली या कम अनुभव वाली महिलाएं भी रोमांस और सेक्सुअल चाहत रखती हैं.

"मेरी नयी नयी शादी हुई है, मेरे पति मुझे संतुष्ट करने में समर्थ नहीं हैं. मुझे एक फ़िल्मी प्रेमी की उम्मीद थी जो सम्बन्ध बनाने से पहले देर तक प्रेम करेगा, प्रेम भरी बातें करेगा मगर उसे केवल इंटरकोर्स में ही दिलचस्पी है जोकि कुछ ही मिनटों में ख़त्म होकर मुझे निराशा से भर देता है. हालांकि वो एक अच्छा इंसान है मगर मुझे लगता है कि मैं फंस गयी हूँ. " गंगा ( नाम परिवर्तित ), 24, दन्त चिकित्सक, जबलपुरक्या केवल शादी तक ही आदर्श रहता है भारतीय प्यार ?
आमतौर पर यह विश्वास किया जाता है कि महिलाएं भावनात्मक संबंधों को ज्यादा तरजीह देती हैं जोकि उनके अंदर शारीरिक इच्छाओं को जन्म देती हैं और यह भी सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से प्रभावित होता है. एक "आदर्श" महिला यूँ ही आमतौर पर होने वाले या बिना किसी प्रतिबद्धता के सेक्स के लिए कभी राजी नहीं होगी. उनके लिए शादी से पहले कोई सेक्स नहीं और तब तक कौमार्य सुरक्षित रहना चाहिए.

महिलाओं की सेक्सुअलिटी पर समाज के दबाव ने भारतीय औरतों की यौन इच्छा और सेक्स लाइफ को बदल कर रख दिया है.
महिलाओं की सेक्सुअलिटी पर समाज के दबाव ने भारतीय औरतों की यौन इच्छा और सेक्स लाइफ को बदल कर रख दिया है.


समाज की बनायी हुई ये परिकल्पनाएं महिलाओं को पुरुषों की तुलना में सेक्सुअल तौर भी और भी ज्यादा प्रतिबाधित करती हैं. इसलिए यह एक विवाह पर भी बल देती है. महिलाओं की सेक्सुअलिटी पर समाज के दबाव ने भारतीय औरतों की यौन इच्छा और सेक्स लाइफ को बदल कर रख दिया है. जहाँ लड़कों को सेक्सुअल होने की अनुमति है और वे हस्तमैथुन और पोर्न जैसी चीज़ों के बारे में जान सकते हैं वहीँ युवा महिलाओं से उम्मीद की जाती है की वे अपनी कामेच्छा को पति के लिए बचा कर रखें.

"कॉलेज में मेरा एक बॉयफ्रेंड था, हम एक दूसरे को छूते थे और चूमते थे. दो बार हमनें ओरल सेक्स भी किया मगर मैंने उसे इंटरकोर्स करने की अनुमति नहीं दी. मैं शादी तक कुंवारी रहना चाहती थी और मुझे पता नहीं था कि में उससे शादी करूंगी या किसी और से. जब हमारी सगाई हो गयी और एक दूसरे के परिवार सहमत हो गए तब हमनें सेक्स किया. " रजनी, 27, गृहणी, करनाल

रूढ़िवादी भारत में अभी भी महिला रोग विशेषज्ञ और परिवार अविवाहित और शारीरिक संबंधों को लेकर सक्रिय लड़कियों को शर्मसार करते हैं इसलिए उनमें से कई महिलाओं को स्वास्थ्य के खतरों के बावजूद इमरजेंसी पिल्स एक आसान रास्ता लगता है.
रूढ़िवादी भारत में अभी भी महिला रोग विशेषज्ञ और परिवार अविवाहित और शारीरिक संबंधों को लेकर सक्रिय लड़कियों को शर्मसार करते हैं इसलिए उनमें से कई महिलाओं को स्वास्थ्य के खतरों के बावजूद इमरजेंसी पिल्स एक आसान रास्ता लगता है.


अपना सेक्सुअल पार्टनर सावधानी से चुनने के लिए महिलाएं सामाजिक रूप से बंदिशों में घिरी हुई हैं क्योंकि यह औरतें ही हैं जो गर्भवती होती हैं और बच्चे के लिए ज़िम्मेदार भी. वह प्रतिबद्ध संबंधों और स्थायी पार्टनर को तरजीह देती हैं जो उनके बच्चों के लिए अच्छा पिता भी साबित हो. इसलिए ज्यादातर अविवाहित महिलाएं अपने भविष्य में होने वाले बच्चों के लिए अच्छा पिता ढूंढ रही हैं और इसके लिए ऐसे व्यक्ति का इंतज़ार करती हैं जो आर्थिक और सामजिक रूप से सुदृढ़ हो. लड़कियों में यह प्रवृति आसान गर्भनिरोधकों के प्रचलन में आने से पहले और ज्यादा पायी जाती थी.

एक गोली : सब समस्याओं का निदान

लम्बे समय तक चलने वाले संबंधों में कुछ महिलाएं किसी भी कर्त्तव्य की सीमा में बंधे बिना शारीरिक सम्बन्ध बनाती हैं. कभी कभी यह दिनचर्या बन कर रह जाता है. इमरजेंसी पिल्स जैसे गर्भनिरोधकों जोकि शारीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद भी लिए जा सकते हैं, ने महिलाओं को अपनी सेक्सुअल चाहतों के लिए और भी ज्यादा आज़ाद कर दिया है और यह कम उम्र युवा महिलाओं में और भी ज्यादा है. इमरजेंसी गर्भनिरोधक पिल्स के मामले में भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है.

रूढ़िवादी भारत में अभी भी महिला रोग विशेषज्ञ और परिवार अविवाहित और शारीरिक संबंधों को लेकर सक्रिय लड़कियों को शर्मसार करते हैं इसलिए उनमें से कई महिलाओं को स्वास्थ्य के खतरों के बावजूद इमरजेंसी पिल्स एक आसान रास्ता लगता है. "सेक्स एक स्वीकृति है. मेरे लॉ कॉलेज के हॉस्टल में मैंने मह्सूस किया कि पोर्न देखने वाली, सेक्स से जुडी किताबें पढ़ने वाली और हस्तमैथुन करने वाली मैं अकेली महिला नहीं हूँ. हमने बिना किसी शर्म के "लिपस्टिक अंडर माय बुरखा "जैसी फिल्में और वीरे दी वेडिंग फिल्म के हस्तमैथुन के सीन भी देखे हैं. 17 वर्ष की आयु से मैं अपने बॉयफ्रेंड के साथ सुरक्षित सेक्स करती रही हूँ. " काव्य ( नाम परिवर्तित ), 19, लॉ की छात्रा, देहरादून

आश्चर्य की बात है कि सैकड़ों भारतीय पुरुष अभी भी गूगल और क्वोरा पर यह मूर्खतापूर्ण सवाल पूछते हैं कि क्या महिलाओं में सेक्स को लेकर इच्छाएं होती हैं? और "क्या महिलाओं भी चरम तक पहुँचती हैं ?" महिलाओं की सेक्सुअलिटी से जुडी इन सब बातों का एक ही हल है सही सेक्स एजुकेशन.

लेखिका - पूजा प्रियंवदा

पूजा प्रियंवदा रेडवॉम्ब नामक प्लेटफार्म से जुड़ी हैं और सेक्सुअल वैलनेस पर लेख लिखती हैं. यह प्लेटफार्म लोगों को शर्म से बाहर लाकर उनके जीवन को आसान बनाने में मदद करता है.

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First published: February 10, 2020, 10:31 AM IST
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