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प्लास्टिक को इस तरह करें डिस्पोज, पर्यावरण रहेगा सुरक्षित

News18Hindi
Updated: January 30, 2020, 3:23 PM IST
प्लास्टिक को इस तरह करें डिस्पोज, पर्यावरण रहेगा सुरक्षित
प्लास्टिक को रिसाइकल करने से 80 प्रतिशत ऊर्जा जो नया प्लास्टिक बनाने में खर्च होती है उसे बचाया जा सकता है

Bottles for Change, ये लोगों को प्लास्टिक के कचरे का निपटान करने के तरीके बारे में बताते हैं, इस्तेमाल हुए लेकिन साफ़ प्लास्टिक को इकट्ठा करने के लिए एक चैनल बनाते हैं, उसे अलग करके कई रिसाइकल यूनिट में सीधे भेजते हैं.

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  • Last Updated: January 30, 2020, 3:23 PM IST
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भारत के ज़्यादातर लोग अपने घर के कचरे को अलग नहीं करते है. हम आलस के मारे शुरू में ही कचरे को अलग करने के बजाय सारा कचरा एक डिब्बे में ही डाल देते हैं. जिसका परिणाम यह होता है कि यह सब लैंडफिल (डम्पिंग यार्ड के मैदान) में चला जाता है जिससे पर्यावरण को काफ़ी हानि होती है. इसमें वो प्लास्टिक भी चले जाते हैं जिन्हें रिसाइकल करके इस्तेमाल किया जा सकता है. एक जागरूक नागरिक होने के नाते हमें कचरा निपटान के इस दुष्चक्र से निपटने के लिए ज़रूरी कदम उठाना चाहिए. हर साल कुल *9.4 लाख टन का प्लास्टिक कचरा निकलता है जिसमें से 40% कभी चुने ही नहीं जाते क्योंकि या तो वे सड़क पर होते हैं या लैंडफिल में. हालांकि, ऐसी सुविधाएं हैं जो प्लास्टिक को रिसाइकल करने में मदद करती हैं और इन्हें अक्सर प्लास्टिक ऐसी जगहों मिलते हैं जहां इनके होने की उम्मीद नहीं होती है.

क्या आप जानते हैं कि भारत के (सिर्फ भारत में ही लगभग 10 लाख) कचरा चुनने वाले और कबाड़ी वाले हैं जो कि अनौपचारिक क्षेत्र से हैं? और जो हर साल भारत में निकलने वाले 62 लाख टन के प्लास्टिक के कचरे को साफ़ करने में मदद करते हैं? यही वे लोग हैं जो प्लास्टिक को चुनकर उन्हें अलग-अलग रिसाइल यूनिट में भेजते हैं. ये भारत की प्लास्टिक प्रबंधन प्रणाली में बहुत ही अहम भूमिका निभाते हैं. भारत में सफलता के साथ प्लास्टिक की पीईटी बोतलों को इसलिए रिसाइकल किया जा रहा है क्योंकि इन्हीं लोगों की मदद से कचरा सीधे अलग करने वाली यूनिट और रिसाइकल यूनिट में भेजा जा रहा है. इससे एक बात तो साफ़ होती है और वह यह है कि हम भी कचरे को अलग करने का महत्व समझ कर अपने पर्यावरण में कई सकारात्म बदलाव ला सकते हैं.

कचरे से प्लास्टिक बीनते लोग
कचरे से प्लास्टिक बीनते लोग


भारत में 600,000 और 10,00,000* प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष श्रमशक्ति जिसमें वे कचरा चुनने वाले भी शामिल हैं जो प्लास्टिक के प्रबंधन को संचालित करते हैं, इसके बावजूद ऐसे कई प्लास्टिक हैं जो चुने न होने की कारण रिसाइकल नहीं हो पाते हैं, इसमें 33000+ संगठित और 4000+ असंगठित रिसाइकल यूनिट हैं जिनका मुख्य ध्यान सहायक अर्थव्यवस्था पर केन्द्रित है. हम अपने कचरा निपटान के तरीके में बदलाव लाकर ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि प्लास्टिक का निपटान सही तरीके से हो. प्लास्टिक को कचरा न समझकर मूल्यवान संसाधन मानने से हम लोगों की सोच और इसके निपटान के तरीके में काफी बदलाव ला सकते हैं. जब बात प्लास्टिक के निपटान की हो तो उसके रिसाइकल होने या फिर से इस्तेमाल होने की संभावना के आधार पर हमें इसे साफ़ करना होगा, अलग करना होगा और अलग से इसका निपटान करना होगा. इस अलग करने के तरीके से ही प्लास्टिक के निपटान को व्यवस्थित और सुरक्षित किया जा सकता है. शुरू में ही सही तरीके से कचरे को अलग करने से न केवल लोगों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है बल्कि यह किफ़ायती भी है और पर्यावरण के लिए सही भी है. इससे कम प्लास्टिक लैंडफिल और समुद्र में जाएगा और ज़्यादा से ज़्यादा रिसाइकल यूनिट में भेजा जाएगा जहां प्लास्टिक का सही इस्तेमाल किया जाएगा जैसे कपड़े, घर के सामान वगैरह बनाने में. लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि सभी तरह के कचरे को एक साथ मिलाने से पर्यावरण को काफ़ी नुकसान होता है. प्लास्टिक के लिए अलग कचरे का डब्बा रखने से सभी तरह का कचरा आपस में नहीं मिलता. हर किसी को यह बात याद रखनी चाहिए कि साफ़ प्लास्टिक को रिसाइकल के लिए देना चाहिए ताकि वह लैंडफिल में न जाए. ऐसा करने के पीछे एक ही सोच है और वह यह है कि प्लास्टिक फेंकने के बजाए उसका किसी न किसी तरीके से इस्तेमाल हो. जब तक हम प्लास्टिक को सही तरीके रिसाइकल करते रहेंगे तब तक हम अपराध मुक्त होकर इसका लाभ उठा सकते हैं. यही आपके आस-पास की जगहों को सुरक्षित रखने का सही तरीका है.

हर साल कुल *9.4 लाख टन का प्लास्टिक कचरा निकलता है
हर साल कुल *9.4 लाख टन का प्लास्टिक कचरा निकलता है


ऐसी कई पहलें हैं जिनका मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक रिसाइकल के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है. ऐसी ही एक पहल का नाम है Bottles for Change. ये लोगों को प्लास्टिक के कचरे का निपटान करने के तरीकों के बारे में बताते हैं, इस्तेमाल हुए लेकिन साफ़ प्लास्टिक को इकट्ठा करने के लिए एक चैनल बनाते हैं, उसे अलग करके कई रिसाइकल यूनिट में सीधे भेजते हैं. सबसे अच्छा काम इन लोगों ने ये किया है कि प्लास्टिक के एजेंटों को काम करने के लिए सभी सुरक्षा मानकों के साथ एक स्वस्थ माहौल मुहैया कराया है. इस तरह की जागरूकता फैलाने से लोगों को प्लास्टिक को रिसाइकल करने के महत्व को समझने में मदद मिलती है.

पर्यावरण को कम हानि पहुंचाते हुए साफ़ तरीके से प्लास्टिक के कचरे का निपटान करने की जागरूकता हमारे घर से ही शुरू होती है. हमें घर में मौजूद प्लास्टिक को अलग करके उसे कचरा चुनने वाले के ज़रिए रिसाइकल में देना चाहिए या किसी और तरीके से दोबारा इस्तेमाल करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए. प्लास्टिक को रिसाइकल करने से 80 प्रतिशत ऊर्जा जो नया प्लास्टिक बनाने में खर्च होती है उसे बचाया जा सकता है जिससे पर्यावरण को ही फ़ायदा होगा. अपने कचरे को सही तरीके से अलग करने से कचरा निपटान और सफ़ाई की समस्या से निपटा जा सकता है. हम अपनी आदतें बदल कर ही पर्यावरण को प्लास्टिक मुक्त बना सकते हैं. नए प्लास्टिक का उत्पाद करने के बजाय उसी को रिसाइकल करके चक्रीय अर्थव्यवस्था बनाकर ही हम पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं. इससे धन, ऊर्जा और प्रकृतिक संसाधन को बचाने में मदद मिलेगी.


(पार्टनर्ड पोस्ट)

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First published: January 30, 2020, 3:22 PM IST
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