लाइव टीवी

प्लास्टिक को सही से निपटाना है एक चुनौती, जानें रिसाइकलिंग के तरीके

News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 1:40 PM IST
प्लास्टिक को सही से निपटाना है एक चुनौती, जानें रिसाइकलिंग के तरीके
जानें प्लास्टिक रिसाइकलिंग के बारे में जरूरी बातें

प्लास्टिक को सही तरह से निपटाना एक चुनौती है. प्लास्टिक की रिसाइकलिंग करना यह आपके घर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सही कदम है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 12, 2020, 1:40 PM IST
  • Share this:
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के एक अध्ययन के अनुसार, प्लास्टिक प्रोसेसिंग उद्योग 2020 में 22 मिलियन टन तक बढ़ सकता है. लेकिन यह आंकड़े भारत के लैंडफिल को यकीनन और बढ़ा देगा. ऐसे में प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग बहुत काम आएगी.

आजकल बाज़ार में बिकने वाले 90 प्रतिशत उत्पाद किसी न किसी रूप में प्लास्टिक से बने होते हैं. हम सभी, प्लास्टिक रिसाइकलिंग के अभाव से होने वाले पर्यावरण की समस्याओं से परिचित हैं. हालांकि इसका समाधान भी है. या तो प्लास्टिक का इस्तेमाल कम किया जाए या इसकी रिसाइकलिंग की जाए. मौलिक स्तर पर, प्लास्टिक की रिसाइकलिंग से नए प्लास्टिक का उत्पादन कम होगा जिससे प्लास्टिक से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है. प्लास्टिक को रिसाइकल करके या तो नए प्लास्टिक उत्पाद बनाए जा सकते हैं या उनका इस तरह से इस्तेमाल किया जाए जिससे पर्यावरणीय समस्याएं पैदा न हों. याद रखिए, एक व्यक्ति का कचरा दूसरे के लिए उपहार बन सकता है. यह प्लास्टिक को कचरे के ढेर में जाने से रोकेगा. उदाहरण के लिए, पेड़ों को काटकर फर्निचर बनाने की बजाय, रिसाइकल्ड प्लास्टिक से फर्नीचर बनाना एक अच्छा विकल्प है जो टिकाऊ और लंबे समय तक चलेगा. इसी तरह, प्लास्टिक का इस्तेमाल सड़क बनाने में भी किया जा सकता है. नए प्लास्टिक उत्पादों की तुलना में रिसाइकल प्लास्टिक से बने उत्पादनो को बनाने में कम ऊर्जा का इस्तेमाल होता हैं. कुल मिलाकर यह पर्यावरण और महासागर को कचरे से बचाकर लाखों लोगों का जीवन बचाने में मदद करता है.

प्लास्टिक को सही तरह से निपटाना आज की तारीख में एक चुनौती है. नुकसान तो हो चुका है, लेकिन छोटे कदम उठाकर इसे अभी भी सुधाऱा जा सकता है.
प्लास्टिक को सही तरह से निपटाना आज की तारीख में एक चुनौती है. नुकसान तो हो चुका है, लेकिन छोटे कदम उठाकर इसे अभी भी सुधाऱा जा सकता है.


आपको जानकर हैरानी होगी इस ग्रह पर 7 तरह के प्लास्टिक मौजूद हैं. पीईटी (या पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट), एचडीपीई (उच्च घनत्व पॉलिथीन), पीवीसी (पॉलीविनाइल क्लोराइड), एलडीपीई (लो-डेंसिटी पॉलीइथाइलीन), पीपी (पॉलीप्रोपाइलीन), पीएस (पॉलीस्टीरेन), अन्य (बीपीए, पॉली कार्बोनेट और लेक्सान). इस तरह के प्लास्टिक का या तो पुनः उपयोग किया जाता है या रिसाइकल किया जाता है. उदाहरण के लिए, पीईटी बोतलों को रिसाकइल करके एथलेटिक जूते बनाए जा सकते हैं, एचडीपीई शैंपू की बोतल को रिसाइकल करके कटिंग बोर्ड और टैंक, पीवीसी पाइप को रिसाकइल करके नई पाइप, एलडीपीई ग्रोसरी बैग को रिसाइकल करके फर्निचर, पीपी बोतलों कि रिसाइकलिंग से बैटरी केबल, पीएस कप को रिसाइकल करके लाइसेंस प्लेट फ्रेमिंग और आखिर में सनग्लासेस में इस्तेमाल होने वाले ग्रेड 7 प्लास्टिक को रिसाइकलिंग से प्लास्टिक की लकड़ी बनाई जा सकती है. नए प्लास्टिक के उत्पादन की बजाय हमें इसी तरह रिसाइकल किए गए उत्पाद का उपयोग करना चाहिए.



प्लास्टिक के उपयोग में बड़ी वृद्धि हुई है. कहा जाता है कि भारत में प्लास्टिक रिसाइकलिंग की संस्कृति पिछले कई दशकों से है. भारत के कचरा बीनने वाले और कबाड़ी वाले प्लास्टिक रिसाकइकलिंग प्रोसेस में बड़ी भूमिका निभाते हैं. वे उपभोक्ताओं और स्थानीय रीसाइक्लिंग यूनिट के बीच की दूरी को कम करते हैं. क्या आप जानते हैं कि कचरा बीनने वाले लोग घरों और सड़क के किनारे से सालाना 500,000 टन प्लास्टिक का कचरा उठाते हैं? वह हमारे सभी प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करते हैं और थोड़े से पैसे लेकर इसे नजदीकी रीसाइक्लिंग यूनिट को देते हैं. वे प्लास्टिक रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्लेयर हैं, क्योंकि वह स्वयं कचरा इकट्ठा करते हैं, उसे अलग करते हैं और रीसाइक्लिंग यूनिटों को बेचते हैं. भारत सरकार ने 2020 तक सभी सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने का वचन देकर भारत में प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया हैं.

कचरे को अलग करना और प्लास्टिक की रिसाइकलिंग या पुन: उपयोग करना यह आपके घर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सही कदम है.
कचरे को अलग करना और प्लास्टिक की रिसाइकलिंग या पुन: उपयोग करना यह आपके घर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सही कदम है.


दरअसल, बॉटल फॉर चेंज जैसी कई पहल ऐसी हैं जिनका उद्देश्य प्लास्टिक रीसाइक्लिंग के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना है. बॉटल फॉर चेंज पहल में वे लोगों को इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक के निपटान के तरीकों के बारे में जागरूक करते हैं, उपयोग किए हुए लेकिन साफ प्लास्टिक को इकट्ठा करने के लिए एक चैनल बनाते हैं, इसे अलग करते हैं और इसे सीधे अलग-अलग रीसाइक्लिंग यूनिट्स को भेजते हैं. सबसे अच्छी चीज़ जो उन्होंने की है वह यह है कि प्लास्टिक एजेंटों को स्थित सुरक्षा के उपायों पर विचार करते हुए स्वच्छ स्थिति में काम करने का अवसर दिया है.

प्लास्टिक को सही तरह से निपटाना आज की तारीख में एक चुनौती है. नुकसान तो हो चुका है, लेकिन छोटे कदम उठाकर इसे अभी भी सुधाऱा जा सकता है. ऐसा बदलाव हमारे अपने घर से शुरू होता है. कचरे को अलग करना और प्लास्टिक की रिसाइकलिंग या पुन: उपयोग करना यह आपके घर को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सही कदम है. उन पहलों के बारे में पढ़ें, जिनमें आप प्लास्टिक रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए शामिल हो सकते हैं. याद रखें, देर से करना, कभी न करने से बेहतर है. बेहतर और लंबे जीवन के लिए रिसाइकलिंग करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लाइफ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 12, 2020, 1:14 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर