Eid Shayari: 'जिसने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक', शायरों का है अंदाज़े-बयां कुछ और...

'चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है...' Image/shutterstock

Eid Shayari: Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में हर जज्‍़बात (Emotion) को दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है. बात जब ईद की हो तो शायरों के इन कलाम की कशिश दिल को खींच ही लेती है...

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    Eid Shayari: चांद का दीदार ईद की खुशियां लेकर आता है. यह ऐसा त्‍योहार है जिसे शायरों ने अपने अपने अंदाज़ में क़लमबंद किया है. इस मुबारक मौके पर लोग गले मिलते हैं और लंबे समय से बिछड़े लोगों को भी ईद के बहाने करीब आने का मौका नसीब होता है. यही वजह है कि शायरों ने अपने कलाम में ईद की खुशी को अलग अल्‍फ़ाज़ में पिरोया है. जिस तरह शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह चांद का दीदार और ईद की खुशी की बात भी शायरों के अशआर में मिलती है. देखा जाए तो शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को ख़ूबसूरती के साथ तवज्‍जो मिली है. यही वजह है कि शायरों के कलाम की कशिश दिलों को अपनी ओर खींचती रही है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'ईद' की हो और महबूब से मुलाक़ात का जिक्र हो. आप भी इन बेशक़ीमती अशआर का लुत्‍़फ़ उठाइए...

    ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम
    रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है
    क़मर बदायूंनी

    तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी
    ईद अब के भी दबे पांव गुज़र जाएगी
    ज़फ़र इक़बाल

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    उससे मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना
    ये भी कहना कि मेरी ईद मुबारक कर दे
    दिलावर अली आज़र

    कहते हैं ईद है आज अपनी भी ईद होती
    हम को अगर मयस्सर जानां की दीद होती
    ग़ुलाम भीक नैरंग

    हम ने तुझे देखा नहीं क्या ईद मनाएं
    जिसने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक
    लियाक़त अली आसिम

    माह-ए-नौ देखने तुम छत पे न जाना हरगिज़
    शहर में ईद की तारीख़ बदल जाएगी
    जलील निज़ामी

    जो लोग गुज़रते हैं मुसलसल रह-ए-दिल से
    दिन ईद का उन को हो मुबारक तह-ए-दिल से
    ओबैद आज़म आज़मी

    आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद है
    राग है मय है चमन है दिलरुबा है दीद है
    आबरू शाह मुबारक

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    महक उठी है फ़ज़ा पैरहन की ख़ुशबू से
    चमन दिलों का खिलाने को ईद आई है
    मोहम्मद असदुल्लाह

    अगर हयात है देखेंगे एक दिन दीदार
    कि माह-ए-ईद भी आख़िर है इन महीनों में
    मिर्ज़ा रज़ा बर्क़   (साभार/रेख्‍़ता)