हवाई-यात्रा करते समय क्यों रोते हैं बच्चे? क्या है इसके पीछे की वजह, कैसे पाया जा सकता है इससे छुटकारा

हवाई-यात्रा करते समय 1-2 साल के बच्चे क्यों रोने लगते हैं, क्या आपने कभी इस पर गौर फरमाया है? अगर नहीं, तो इस वजह को जानकर आप हैरान हो जाएंगे.

News18Hindi
Updated: February 14, 2019, 4:38 PM IST
हवाई-यात्रा करते समय क्यों रोते हैं बच्चे? क्या है इसके पीछे की वजह, कैसे पाया जा सकता है इससे छुटकारा
फ्लाई करते हुए क्यों रोता है बच्चा?
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Updated: February 14, 2019, 4:38 PM IST
आप एक या तो पीड़ित पैरेंट होते हैं या फिर वो व्यक्ति होते हैं जो हवाई यात्रा एक ऐसी सीट पर बैठकर कर रहे होते हैं जहां आस-पास बच्चे को रोता देख सकते हैं. हम में से शायद कई लोगों का ऐसा तजुर्बा रहा होगा. हवाई-जहाज, जब टेक-ऑफ यानी उड़ान भरता है या लैंड यानी उतरता है तो अक्सर बच्चों के काम में एक प्रकार की डरावनी हलचल पैदा होती है जिससे वे रुआसे हो जाते हैं. और अपनी तेज आवाज में रोने लगते हैं.

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हालांकि, हवाई-जहाज में यात्रा करते हुए बच्चा कई कारणों से रो सकता है. जिसमें अशांति, थकावट, भूख लगना, अकेलापन महसूस होना, उदासी, गुस्सा आना, शरीर के किसी हिस्से में दर्द होना और साधारण बेचैनी जैसी चीजें शामिल हैं. ये सभी आंसू और चिल्लाने की आवाज में बदलते हैं. हवाई-जहाज जब काफी ऊंचाई पर होता है तो बच्चों के कान में एक प्रकार का प्रेशर उत्पन्न करता है. वहीं, बड़े लोगों में मूल रूप से ये प्रेशर अलग पैदा होता है. जिसे पुख्ता कर रहे हैं यूके में स्थित डॉक्टर साइमन बैर.



बैर कहते हैं कि, बच्चों का प्लेन में रोने का एक कारण यह भी होता है कि वे कान के बीच के हिस्से में इस प्रेशर को बराबर नहीं कर पाते हैं. बच्चों में एक युस्टैशियन नामक ट्यूब होती है जो सही ढंग से कार्य नहीं कर पाती है. जो बड़ों में करती है.

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क्या होती है युस्टैशियन ट्यूब?

युस्टैशियन ट्यूब एक नली होती है जो कान के बीच के हिस्से को नैसोफैरिन्क्स (नाक के पीछे की नेसल कैविटी और गले के ऊपरी भाग) से जोड़ती है. आम बोलचाल में कहें तो ये ट्यूब कान के बीच के हिस्से में शरीर के बाहर मौजूद प्रेशर से मिलकर उसे नियंत्रित नहीं कर पाती है.
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युस्टैशियन ट्यूब ज्यादातर वक्त बंद रहती है. ये केवल जंभाई लेते समय, खाने की चीजों को निगलते समय और किसी चीज को चबाते समय ही खुलती है. हवा, इसी समय कान के बीच के हिस्से और नैसोफैरिन्क्स के बीच से गुजरती है. जब बाहरी हवा का प्रेशर अचानक से और तेजी से बदलता है तो हमारे कान बंद होने जैसा महसूस होता है. कई बार बड़े लोग ऐसा होने पर कुछ खाते हैं और फिर जंभाई लेते हैं जिससे ट्यूब खुल सके और कान के बीच में मौजूद इस ट्यूब का प्रेशर नियंत्रित हो सके.

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बैर आगे बताते हैं कि, ये प्रेशर तब ज्यादा दिक्कत देता है जब हवाई-जहाज लैंड यानी उतरता है. इस दौरान कान में मौजूद ये ट्यूब तेजी से कम वायु मंडल को ज्यादा वायु मंडल में बदल नहीं पाती है. वहीं इसका उल्टा होता है जब हवाई-डहाज उड़ान भर रहा होता है.

बच्चों के कान में प्रेशर नियंत्रित रहे इसके लिए सुझाव

प्रेशर नियंत्रित रखने के लिए बच्चे की नाक को दबाए और उसे बाहर ब्लो करने के लिए कहें. इस क्रिया को वालसल्वा मैनियोवर कहते हैं. जरनल कैनेडियन पैडिएट्रिक सोसाइटी में इसका जिक्र किया गया है.

दूसरा दवाई-जहाज जब उड़ान भर रहा हो और उतरने वाला हो तो बच्चे को सोने न दें. उसे जगाए रखें. बच्चे को इस दौरान पानी या दूध की बोतल से कुछ न कुछ पिलाएं. जिससे प्रेशर नियंत्रित रह सके. अगर बच्चे को सांस लेने से जुड़ी कोई समस्या हो या फिर इंफेक्शन हो तो उस समय हवाई-यात्रा करने से बचें.

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यूके बेस्ड, चीफ ऑडियोलॉजिस्ट गॉर्डन हैरिसन का कहना है कि, प्रेशर बना रहे इसे आसान करने के लिए बच्चे को जंभाई लेने के लिए कहें या फिर उसे किसी चीज को निगलने के लिए कहना जरूरी है. जोकि एक साल के बच्चे के साथ नहीं किया जा सकता है.

इसके अलावा आप और भी कई ट्रिक्स अपना सकते हैं. जैसे निगलना, चबाना, जंभाई लेने जैसी चीजें बच्चा नहीं तो बड़े लोग बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं. बच्चे को बोतल की मदद से पानी पिला सकते हैं. या फिर मां स्तनपान भी करा सकती है.

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कान में दर्द अस्थायी होता है और ये किसी भी प्रकार की समस्या नहीं देता है. चंद मिनटों में युस्टैशियन ट्यूब खुद-ब-खुद खुलकर हवा के प्रेशर को कान के पर्दों के दोनों ओर नियंत्रित कर देती है.

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