फेसबुक से आपके जीवन पर पड़ता है नकारात्मक प्रभाव: स्टडी

सोशल मीडिया पर बातचीत मानव बातचीत होने का भ्रम पैदा करती है.
सोशल मीडिया पर बातचीत मानव बातचीत होने का भ्रम पैदा करती है.

साल 2016 में फेसबुक (Facebook) द्वारा उपलब्ध डाटा के अनुसार हर व्यक्ति औसतन 50 मिनट हर दिन फेसबुक पर बिताता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 30, 2020, 10:35 AM IST
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एक नए अध्ययन में पाया गया है कि फेसबुक (Facebook) का इस्तेमाल आपकी खुशी के विपरीत है और सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म आपकी अच्छी जीवन के ऊपर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं. द इंडिपेंडेंट ने एक रिपोर्ट में यह बताया है कि यह स्टडी दो साल की अवधि में पूरी की गई है जबकि पिछले अध्ययनों में खुशियों और सोशल मीडिया के उपयोग के बीच संबंध पाए गए थे, उनके पास सीमित या अप्रमाणिक नमूने थे या फिर सोशल मीडिया की की बड़ी रेंज पर ध्यान केंद्रित किया गया था.

हर व्यक्ति औसतन 50 मिनट हर दिन फेसबुक पर बिताता है
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ता हॉली बी शाक्य और येल विश्वविद्यालय के निकोलस ए क्रिस्टाकिस ने इस स्टडी को लीड किया है. साल 2016 में फेसबुक द्वारा उपलब्ध डाटा के अनुसार हर व्यक्ति औसतन 50 मिनट हर दिन फेसबुक पर बिताता है. स्टडी ने 2013, 2014 और 2015 में 5208 सब्जेक्ट पर रिसर्च की. इस सैम्पल को अमेरिका की जनसंख्या के प्रतिनिधित्व के रूप में लिया गया. हर सब्जेक्ट की गतिविधियों को दो साल तक के लिए मॉनिटर किया गया.

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व्यक्तित्व पर नकारात्मक प्रभाव


फेसबुक पर की गई इस रिसर्च में निष्कर्ष निकला कि अच्छे-खासे व्यक्तित्व पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा यह भी पाया गया कि स्टेटस अपडेट करना, किसी लिंक पर क्लिक करना, लिखना आदि मामलों में पांच से आठ फीसदी मानसिक कमी से जुड़े थे. रिसर्चरों ने कहा कि हमने खुद युजर्स द्वारा रिपोर्ट किए गए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी मापा. इसमें लाइक्स, दोस्तों की संख्या और फेसबुक पर बिताए जाने वाले घंटों का विश्लेषण किया गया. यह सीधा उनके अकाउंट पर नजर रखकर ही किया गया था.

ऑनलाइन बातचीत
इस रिसर्च में यह चेतावनी भी दी गई है कि सोशल मीडिया पर बातचीत मानव बातचीत होने का भ्रम पैदा करती है. जबकि वह आमने-सामने होने वाली बातचीत की तरह को लाभ प्राप्त नहीं करते हैं. रिसर्च में यह भी सामने आया कि ऑनलाइन बातचीत करने वालों में ऑफलाइन बातचीत करने की तुलना में ज्यादा नकारात्मकता थी.
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