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छोले-भठूरे खाने हों तो पहुंचें दिल्ली के पहाड़गंज, 'राधेश्याम सुभाष कुमार' के दुकान की अलग ही है पहचान

छोले-भठूरे की एक प्लेट 80 रुपये की है. Image-shutterstock.com

छोले-भठूरे की एक प्लेट 80 रुपये की है. Image-shutterstock.com

पहाड़गंज में दो-तीन दुकानें हैं जो छोले-भठूरे (Chole-Bhature) के लिए जानी जाती हैं. इनमें से एक है 'राधेश्याम सुभाष कुमार' के स्पेशल पनीर वाले छोले-भठूरे.

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    (डॉ. रामेश्वर दयाल)
    दिल्ली में आप कहीं भी किसी मशहूर छोले-भठूरे की दुकान पर जाओगे तो अधिकतर दुकान पर लिखा होगा कि ‘पहाड़गंज के मशहूर’ है हमारे छोले-भठूरे. हमने इस बात की जांच कर ली है कि आखिर छोले-भठूरे पहाड़गंज के क्यों मशहूर माने जाते हैं, लेकिन हमारी जांच में परिणाम शून्य रहा. छोले-भटूरे की क्वॉलिटी को लेकर पहाड़गंज एक तमगा है, जो सालों से प्रयोग में लाया जा रहा है, जबकि पहाड़गंज के तो होटल और गेस्ट हाउस दिल्ली-भारत क्या, पूरे विश्व में मशहूर हैं. खैर इन पर फिर कभी बात होगी. अब बात छोले-भठूरे की चल रही है तो हमने सोचा कि क्यों न आपको सीधे पहाड़गंज ही ले जाकर छोले-भठूरे का स्वाद चखवाया जाए. वहां जाकर आप ही चेक कर लीजिए कि पहाड़गंज के छोले-भठूरे क्यों मशहूर हैं.

    दुकान पर खड़े लोग बता देते हैं कि ‘कोई यूं ही भीड़ नहीं लगाता’
    पहाड़गंज में दो-तीन दुकानें हैं जो छोले-भठूरे के लिए जानी जाती हैं. इनमें से एक है ‘राधेश्याम सुभाष कुमार’ के स्पेशल पनीर वाले छोले-भठूरे. नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से पहाड़गंज की ओर मेन बाजार में जानेवाली सड़क के कोने पर अमृत कौर मार्केट है. इसी मार्केट में यह दुकान मौजूद है. दुकान पर लगी भीड़ जाहिर कर देगी कि इस दुकान में बिक रहे छोले-भठूरे की बात निराली होगी वरना ‘कोई यूं ही भीड़ नहीं लगाता’. यह दिल्ली की उन बहुत कम दुकानों में जानी जाती जहां खाने के लिए सिर्फ छोले-भठूरे के अलावा कुछ नहीं मिलता. हां, मुंह को मीठा और तरावटी बनाने के लिए लस्सी और गुलाब जामुन जरूर मिल जाएंगे.

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    छोले मसालेदार नहीं है, लेकिन स्वाद भरपूर है
    चूंकि इस दुकान पर सालों से छोले-भठूरे मिल रहे हैं तो जाहिर सी बात है कोई तामझाम तो होगा ही नहीं. आप दुकान पर पहुंच जाएं, छोले-भठूरे खा लें, यही बहुत है. तामझाम को क्या ओढ़ना और क्या बिछाना. इस दुकान की विशेषता यह है कि यहां मिलने वाले छोले बहुत मसालेदार नहीं है, लेकिन उनक स्वाद हिट एंड फिट है. पनीर से भरे भठूरे जब कड़ाही में तलकर खुशबू उड़ाते हुए इन छोलों के साथ सर्व किए जाते हैं तो मान लीजिए कि छोले-भठूरे खोरों की जीभ कैसे लपलपाती होगी. इनके साथ प्लेट में ही हरी चटनी, हरी मिर्च, कटा प्याज और सीजनल अचार रख दिया जाता है.

    इन सबका गठजोड़ आपको पूरी तरह तृप्त कर देगा. छोले-भठूरे की एक प्लेट 80 रुपये की है. 50 रुपये में हाफ प्लेट मिल जाएगी. पैकिंग की दमदार सुविधा है. अगर सिर्फ छोले चाहिए तो 40 रुपये में आपको पैक कर दे दिए जाएंगे. आजकल लोगों में एक होड़ सी चल रही है कि खाने के बाद कुछ मीठा हो जाए तो दुकानदार ने 40 रुपये में लस्सी और 20 रुपये में गुलाब जामुन का एक पीस तैयार रखा हुआ है. अब इतना कुछ तैलीय-तरल खा लेंगे तो भारीपन तो लगेगा ही नहीं.

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    60 के दशक में राधेश्याम ने रेहड़ी पर बेचे थे छोले-भठूरे
    अब इन दुकान वालों की भी जानकारी प्राप्त कर लें. 60 के दशक में राधेश्याम ने छोले-भठूरे बेचने शुरू किए थे. पहले वह इंपीरियल सिनेमा के सामने रेहड़ी पर छोले-भठूरे बेचा करते थे. इमरजेंसी के दौरान वहां से रेहड़ी वालों को हटाकर अमृत कौर मार्केट में जगह दी गई थी. यह दुकान तब से यहीं है. आजकल इस दुकान को उनके बेटे गणेश व सुभाष और इनके दोनों के बेटे अभिषेक और अमन गुप्ता चला रहे हैं. दुकान सुबह 8 बजे खुल जाती है और शाम 4 बजे तक सब कुछ निपट जाता है. अवकाश होई नहीं है. होली को अवकाश रखा जाता है.
    नजदीकी मेट्रो स्टेशन: आरके आश्रम

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