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नाश्ते में लाजवाब पूरी-छोले खाने के लिए पीतमपुरा में ‘बिल्ले दी हट्टी’ पर आएं, यहां का स्वाद है अनोखा

पीतमपुरा में ‘बिल्ले दी हट्टी’ की दुकान दो साल पहले ही खुली, लेकिन आज ये बहुत मशहूर हो गई है.

पीतमपुरा में ‘बिल्ले दी हट्टी’ की दुकान दो साल पहले ही खुली, लेकिन आज ये बहुत मशहूर हो गई है.

पीतमपुरा के आरपी ब्लॉक के मार्केट में ‘बिल्ले दी हट्टी’ नाम का एक रेस्तरां हैं, जहां खाने के लिए बहुत कुछ है, जैसे बेड़मी छोले, कढ़ी-चावल, छोले-चावल, राजमा-चावल आदि, लेकिन यहां के पूरी-छोले खास तौर पर मशहूर हैं.

दिल्ली में क्या ऐसा संभव है कि इस भरी गर्मी में लोग पूरी-छोले खाने के लिए आतुर हो रहे हैं. इस डिश को खाने को लेकर वे इतने क्रेजी हैं कि चिलचिलाती धूप में लाइन में लगे हुए हैं और फिर पूरी छोले खाकर और साथ में गाढ़ी लस्सी पीकर तृप्त हो जाते हैं. जी हां, हमने ऐसा ही नजारा देखा. इस रेस्तरां में छोले-भटूरे खाने वालों का भी यही आलम है. विशेष बात यह है कि यह रेस्तरां दो साल पहले ही खुला है, लेकिन आज पूरे इलाके में इसके जलवे हैं.

पूरी छोले के आगे गर्मी भी बेअसर

पीतमपुरा का टीवी टावर का नाम तो आपने सुना ही होगा. यहीं से एक सड़क गोपाल मंदिर की ओर जाती है. यहीं पर आरपी ब्लॉक की मार्केट में ‘बिल्ले दी हट्टी’ नाम का एक रेस्तरां हैं. आम दिनों में तो इस रेस्तरां में खाने वालों का तांता लगा रहता है, लेकिन वीकेंड या अवकाश के दिन तो ऐसा लगता है कि जैसे दुकान वाले ने भंडारा खोल लिया है. इस दुकान पर खाने को तो वैसे बहुत कुछ है, जैसे बेड़मी छोले, कढ़ी-चावल, छोले-चावल, राजमा-चावल के अलावा और भी बहुत कुछ हाजिर है. लेकिन, लोग हैं कि इस रेस्तरां के पूरी-छोले पर टूटे जा रहे हैं. सुबह जाओ तो भरी गर्मी में लोग इसे पाने के लिए लाइनें लगा रहे हैं और मिल जाने के बाद अगर रेस्तरां के अंदर जगह नहीं है, तो बाहर ही खड़े होकर खा रहे हैं. गर्मी में चेहरे से पसीना चू रहा है, कपड़े तरबतर हो रहे हैं, लेकिन पूरी-छोले के आगे यह गर्मी भी झेली जा रही है.

‘बिल्ले दी हट्टी’ पर बेड़मी छोले, पूरी-छोले, कड़ी-चावल, छोले-चावल, राजमा-चावल के अलावा बहुत कुछ मिलता है.

‘बिल्ले दी हट्टी’ पर बेड़मी छोले, पूरी-छोले, कढ़ी-चावल, छोले-चावल, राजमा-चावल के अलावा बहुत कुछ मिलता है.

बिल्ले दी हट्टी को चलाने वाले हैं लाहौरी 

असल में यह रेस्तरां तो इस इलाके में दो साल पहले ही खुला है, लेकिन है यह बहुत ही पुराना. इसे चलाने वाले लाहौरी हैं और उन्होंने अपनी छोलों और पूरी का स्वाद भी वही रखा है, जो पहले कभी लाहौर में खाया जाता था. छोलों में तीखापन न के बराबर और स्वाद कुछ अलग सा. इन छोलों के साथ फ्राई आलू भी होता है, जो टेस्ट को बढ़ाता है. यही मसाला पूरी के साथ जुड़ा हुआ है. पूरी के अंदर हल्की सी दाल की पिट्ठी मसालेदार पि‌ट्ठी भरी हुई है. बस खाइए और मजा लीजिए. पूरी छोले की एक प्लेट की कीमत 80 रुपये की है. इसके साथ गाढ़ी, मलाई वाली लस्सी का भी आनन्द लीजिए, मजा दोगुणा हो जाएगा. इसका बड़ा गिलास 80 रुपये का है.

‘बिल्ले दी हट्टी’ पर गाढ़ी, मलाई वाली लस्सी का गिलास 80 रुपये का है.

‘बिल्ले दी हट्टी’ पर गाढ़ी, मलाई वाली लस्सी का गिलास 80 रुपये का है.

हर फूड का स्वाद जानदार

जब सुबह पूरी-छोले निपट जाते हैं, तो साथ में छोले-भठूरे शुरू हो जाते हैं, साथ में कई आइटम भी चलते रहते हैं. इनमें राइस और उनके साथ अन्य सब्जी तो शामिल है ही, साथ ही ब्रेड पकौड़ा, पनीर पकौड़ा, समोसा, जलेबी आदि शामिल हैं. जो मन कीजिए खाइए, सबका स्वाद जानदार है. इसी नाम का रेस्तरां कमला नगर इलाके में वर्ष 1952 से चल रहा है.

पूर्वजों के बताए मसाले आज भी हो रहे हैं इस्तेमाल

दो साल पहले इस इलाके में एक और रेस्तरां खोल लिया गया. ओनर हैरान हैं कि पहले दिन से ही यहां लोग खाने के लिए जुट गए. चौथी पीढ़ी के ऋतु मनचंदा इस रेस्तरां को संभाल रहे हैं. उनका कहना है कि जो मसाले और बनाने का तरीका हमारे पूर्वज बताकर गए थे, उन पर आज भी अमल हो रहा है. रेस्तरां सुबह 7 बजे खुल जाता है और रात 8 बजे तक खाने का मजा लिया जा सकता है. अवकाश कोई नहीं है.

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: नेताजी सुभाष प्लेस

Tags: Delhi, Food, Lifestyle

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