Shayari: 'क्यूं मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं', पेश हैं दुआ पर अशआर

शायरों का दिलकश कलाम...
शायरों का दिलकश कलाम...

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया में ज़िंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. फिर चाहें वह मुहब्‍बत (Love) का रंग हो या किसी और जज्‍़बात (Emotion) पर क़लम उठाई गई हो. आज पेश है 'दुआ' पर शायरों का कलाम...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 7:17 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) जज्‍़बातों की दुनिया है. इसमें हर जज्‍़बात (Emotion) को क़लमबंद किया गया है. शायरी में जहां मुहब्‍बत, दर्द से लबरेज़ जज्‍़बातों को जगह मिली है, वहीं इसमें इंसानी ज़िंदगी के दूसरे पहलुओं को भी ख़ूबसूरती के साथ जगह दी गई है. इसमें 'दुआ' का जिक्र भी मिलता है. वह भी बेहद दिलकश अंदाज़ में. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'दुआ' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

आख़िर दुआ करें भी तो किस मुद्दआ के साथ
कैसे ज़मीं की बात कहें आसमां से हम
अहमद नदीम क़ासमी
औरों की बुराई को न देखूं वो नज़र दे
हां अपनी बुराई को परखने का हुनर दे


खलील तनवीर

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हया नहीं है ज़माने की आंख में बाक़ी
ख़ुदा करे कि जवानी तेरी रहे बे-दाग़
अल्लामा इक़बाल

मैं क्या करूं मेरे क़ातिल न चाहने पर भी
तेरे लिए मेरे दिल से दुआ निकलती है
अहमद फ़राज़

दुआ को हाथ उठाते हुए लरज़ता हूं
कभी दुआ नहीं मांगी थी मां के होते हुए
इफ़्तिख़ार आरिफ़

जाते हो ख़ुदा-हाफ़िज़ हां इतनी गुज़ारिश है
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना
जलील मानिकपुरी

क्यूं मांग रहे हो किसी बारिश की दुआएं
तुम अपने शिकस्ता दर-ओ-दीवार तो देखो
जाज़िब क़ुरैशी

मांग लूं तुझ से तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए
सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है
अमीर मीनाई

कोई चारा नहीं दुआ के सिवा
कोई सुनता नहीं ख़ुदा के सिवा
हफ़ीज़ जालंधरी

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हज़ार बार जो मांगा करो तो क्या हासिल
दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है
दाग़ देहलवी
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