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Shayari: 'तेरे माथे पे ये आंचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन', शायरों के कलाम के चुनिंदा रंग...

शायरी: अपने आंचल में छुपा कर मेरे आंसू ले जा...

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में हर जज्‍़बात (Emotion) को दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है. फिर बात चाहे इश्‍क़ो-मुहब्‍बत (Love) की हो या इंसानी जिंदगी से जुड़े किसी और मसले पर क़लम उठाई गई हो.

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    Shayari: शायरी में दिल की बात लबों पर आती है. या कहें कि शायरी हाले-दिल बयां करने का एक खूबसूरत ज़रिया है. शेरो-सुख़न (Shayari) की इस दुनिया में हर जज्‍़बात को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. बात चाहे इश्‍क़ो-मुहब्‍बत (Love) की हो या इंसानी जिंदगी से जुड़े किसी और मसले पर क़लम उठाई गई हो. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को ख़ूबसूरती के साथ तवज्‍जो मिली है. यहां दर्द को भी दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है, तो जुदाई के लम्‍हात को भी पूरी तवज्‍जो दी गई है और खूबसूरती से पेश किया गया है. यही वजह है कि शायरों के कलाम की कशिश दिलों को अपनी ओर खींचती रही है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'आंचल' की हो और हालात का जिक्र हो. आप भी इन बेशक़ीमती अशआर का लुत्‍़फ़ उठाइए...

    गोशे आंचल के तेरे सीने पर
    हाए क्या चीज़ लिए बैठे हैं
    जलील मानिकपुरी

    तेरे माथे पे ये आंचल बहुत ही ख़ूब है लेकिन
    तू इस आंचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था
    असरार-उल-हक़ मजाज़

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    दूर के चांद को ढूंढ़ो न किसी आंचल में
    ये उजाला नहीं आंगन में समाने वाला
    निदा फ़ाज़ली

    ये हवा कैसे उड़ा ले गई आंचल मेरा
    यूं सताने की तो आदत मेरे घनश्याम की थी
    परवीन शाकिर

    हिनाई हाथ से आंचल संभाले
    ये शरमाता हुआ कौन आ रहा है
    मजनूं गोरखपुरी

    मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ मां का आंचल
    मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई
    इक़बाल अशहर

    न छांव करने को है वो आंचल न चैन लेने को हैं वो बांहें
    मुसाफ़िरों के क़रीब आ कर हर इक बसेरा पलट गया है
    क़तील शिफ़ाई

    अपने आंचल में छुपा कर मेरे आंसू ले जा
    याद रखने को मुलाक़ात के जुगनू ले जा
    अज़हर इनायती

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    नमी सी थी दम-ए-रुख़्सत कुछ उन के आंचल पर
    वो अश्क थे कि पसीना मैं सोचता ही रहा
    मिर्ज़ा महमुद सरहदी

    (साभार/रेख्‍़ता)
    Published by:Naaz Khan
    First published: