Shayari: 'ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए', पढ़ें इश्‍क़ से सराबोर अशआर 

Shayari: 'थी इश्क़-ओ-आशिक़ी के लिए शर्त ज़िंदगी...'
Shayari: 'थी इश्क़-ओ-आशिक़ी के लिए शर्त ज़िंदगी...'

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया मुहब्‍बत की दुनिया है. इसमें जिंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. फिर चाहें वह इश्‍क़ (Love) का रंग हो या किसी और जज्‍़बात (Emotion) पर क़लम उठाई गई हो...

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  • Last Updated: October 28, 2020, 6:56 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) इश्‍क़ से लबरेज़ सरमाया है. इसमें मुहब्‍बत की टीस महसूस होती है, तो ख़ुशी के तराने भी मिलते हैं. शायरों ने हर विषय पर क़लम उठाई है. फिर चाहें मुहब्‍बत (Love) से जुदा कोई जज्‍़बात (Emotion) ही क्‍यों न हो. शायरी में बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ इश्‍क़ और आशिक़ी की बात की गई है. इसमें दर्द, ख़ुशी, मायूसी, इकरार और इंकार हर जज्‍़बात को ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे कलाम जिसमें बात इश्‍क़ की हो और चर्चा आशिक़ी का हो. आज की इस कड़ी में पेश है 'आशिक़ी' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

आशिक़ी में बहुत ज़रूरी है
बेवफ़ाई कभी कभी करना
बशीर बद्र
नासेहा आशिक़ी में रख माज़ूर
क्या करूं आलम-ए-जवानी है


गोया फ़क़ीर मोहम्मद

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आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
दाग़ देहलवी

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब
दिल का क्या रंग करूं ख़ून-ए-जिगर होते तक
मिर्ज़ा ग़ालिब

आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो
अहमद फ़राज़

थी इश्क़-ओ-आशिक़ी के लिए शर्त ज़िंदगी
मरने के वास्ते मुझे जीना ज़रूर था
जलील मानिकपुरी

ऐ दिल वो आशिक़ी के फ़साने किधर गए
वो उम्र क्या हुई वो ज़माने किधर गए
अख़्तर शीरानी

दावा-ए-आशिक़ी है तो 'हसरत' करो निबाह
ये क्या के इब्तिदा ही में घबरा के रह गए
हसरत मोहानी

शम्अ माशूक़ों को सिखलाती है तर्ज़-ए-आशिक़ी
जल के परवाने से पहले बुझ के परवाने के बाद
जलील मानिकपुरी

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ये भी फ़रेब से हैं कुछ दर्द आशिक़ी के
हम मर के क्या करेंगे क्या कर लिया है जी के
असग़र गोंडवी
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