Shayari: 'कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं', पढ़ें दर्द भरे कलाम

Shayari: दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया कलाम...
Shayari: दिलकश अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया कलाम...

Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) की दुनिया में ज़िंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. इसमें अगर मुहब्‍बत (Love) का रंग गहरा है, तो दर्द, ग़म के अंधेरों को भी ख़ूबसूरत अल्‍फ़ाज़ में पिरोया गया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 23, 2020, 9:20 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) की दुनिया में मुहब्‍बत हो या ग़म का जज्‍़बा, हर जज्‍़बात (Emotion) पर गहराई से क़लम चलाई गई है. यही वजह है कि इसमें इंसानी ज़िंदगी का अक्‍स नज़र आता है. शायरी में जहां इश्‍क़ को अहमियत हासिल है, वहीं इसमें ज़िंदगी के दूसरे पहलुओं को भी ख़ूबसूरती के साथ जगह दी गई है. इसमें अगर ख़ुशी का जिक्र है, तो ग़म और दर्द के साये भी नज़र आते हैं. शायरी (Shayari) जहां अल्‍फ़ाज़ के ज़रिये जज्‍़बात की अदायगी है, वहीं यह दिल से निकली आह है, चाह है और सदा है, जिसे हर शायर ने अपने जुदा अंदाज़ में पेश किया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं दर्द भरे जज्‍़बात और इन पर शायरों का नज़रिया. आप भी इनका लुत्‍फ़ उठाइए.

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं
हफ़ीज़ जालंधरी
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूं नहीं जाता
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूं नहीं जाता


निदा फ़ाज़ली

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं
जां निसार अख़्तर

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आज तो दिल के दर्द पर हंस कर
दर्द का दिल दुखा दिया मैं ने
ज़ुबैर अली ताबिश

दर्द-ए-दिल कितना पसंद आया उसे
मैंने जब की आह उस ने वाह की
आसी ग़ाज़ीपुरी

दर्द हो दिल में तो दवा कीजे
और जो दिल ही न हो तो क्या कीजे
मंज़र लखनवी

आदत के बाद दर्द भी देने लगा मज़ा
हंस हंस के आह आह किए जा रहा हूं मैं
जिगर मुरादाबादी

जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
नासिर काज़मी

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूं आज तेरे नाम पे रोना आया
शकील बदायूंनी

ज़िंदगी क्या किसी मुफ़लिस की क़बा है जिस में
हर घड़ी दर्द के पैवंद लगे जाते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे
बेहिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
शकील बदायूंनी

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इश्क़ से तबीअत ने ज़ीस्त का मज़ा पाया
दर्द की दवा पाई दर्द-ए-बे-दवा पाया
मिर्ज़ा ग़ालिब

कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएंगे सुनते थे सहर होगी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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