Shayari: 'ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं', पेश हैं इश्‍क़ की बेक़रारी को बयां करते अशआर

Shayari: 'ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं', पेश हैं इश्‍क़ की बेक़रारी को बयां करते अशआर
Image Credit:Pexels/Karolina-Grabowska

Shayari: शायरी में इश्‍क़ (Love) का रंग है, तो इसमें दर्द, ख़ुशी, मायूसी, इकरार, इंकार और वफ़ा से लबरेज़ हर जज्‍़बात (Emotion) भी घुला मिलता है...

  • News18Hindi
  • Last Updated : November 28, 2020, 6:32 pm IST
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    Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) इश्‍क़ से लबरेज़ कलाम है. इसमें मुहब्‍बत की टीस है, तो ख़ुशी के तराने भी मिलते हैं. शायरों ने हर विषय पर क़लम उठाई है. फिर चाहें मुहब्‍बत (Love) की बात हो, वफ़ा का जिक्र हो या फिर इससे इश्‍क़े-बीमार का जिक्र हो. हर जज्‍़बात (Emotion) को उर्दू शायरी में बहुत ही ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. इसमें दर्द, ख़ुशी, मायूसी, इकरार, इंकार और वफ़ा से लबरेज़ हर जज्‍़बात को अलग ही अंदाज़ में काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में इश्‍क़े-बीमार का जिक्र है, तो उसके इलाज का भी चर्चा मिलता है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश है 'इलाज' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

    उल्फ़त के बदले उन से मिला दर्द-ए-ला-इलाज
    इतना बढ़े है दर्द मैं जितनी दवा करूं
    असर अकबराबादी

    ऐ सोज़-ए-जां-गुदाज़ अभी मैं जवान हूं
    ऐ दर्द-ए-ला-इलाज ये उम्र-ए-शबाब है
    अख़्तर अंसारी



    रख देता है ला ला के मुक़ाबिल नए सूरज
    वो मेरे चराग़ों से कहां बोल रहा है
    वसीम बरेलवी

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    'क़मर' किसी से भी दिल का इलाज हो न सका
    हम अपना दाग़ दिखाते रहे ज़माने को
    क़मर जलालवी

    इलाज-ए-'अख़्तर'-ए-ना-काम क्यूं नहीं मुमकिन
    अगर वो जी नहीं सकता तो मर तो सकता है
    अख़्तर अंसारी

    भर के साक़ी जाम-ए-मय इक और ला और जल्द ला
    उन नशीली अंखड़ियों में फिर हिजाब आने को है
    फ़ानी बदायूंनी

    मौत का भी इलाज हो शायद
    ज़िंदगी का कोई इलाज नहीं
    फ़िराक़ गोरखपुरी

    बताओ ऐसे मरीज़ों का है इलाज कोई
    कि जिन से हाल भी अपना बयां नहीं होता
    अज़ीज़ लखनवी

    हज़ार रस्ते तेरे हिज्र के इलाज के हैं
    हम अहल-ए-इश्क़ ज़रा मुख़्तलिफ़ मिज़ाज के हैं
    राना आमिर लियाक़त

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    नहीं इलाज-ए-ग़म-ए-हिज्र-ए-यार क्या कीजे
    तड़प रहा है दिल-ए-बे-क़रार किया कीजे
    जिगर बरेलवी