Shayari: 'इक मुहब्बत के लिए एक जवानी कम है', पढ़ें मुहब्‍बत से लबरेज़ कलाम

Shayari: 'बात पहुंची तेरी जवानी तक...' Image/Shutterstock

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया में जवानी का जिक्र न हो यह कैसे मुमकिन है. इसमें कहीं महबूब की ख़ूबसूरती के बहाने इसका बयान मिलता है, तो कहीं शायरों ने मुहब्‍बत भरे दिल की बात जवानी को मद्देनज़र रखते हुए की है.

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    Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) जज्‍़बातों की दुनिया है. वैसे तो शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को जगह दी गई है, मगर जवानी की उम्र और इसमें उमंगों, आरज़ुओं की रवानी को बहुत ही दिलकश अंदाज़ में शायरों ने क़लमबंद किया है. ऐसे में हर शायर के यहां इसका जिक्र मिलता है. इश्‍क़ से लबरेज़ जवानी की उम्र को उर्दू शायरी में पूरी तरह तवज्‍जो मिली है. कहीं महबूब की ख़ूबसूरती के बहाने इसका बयान मिलता है, तो कहीं शायरों ने मुहब्‍बत भरे दिल की बात जवानी को मद्देनज़र रखते हुए की है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए लेकर हाजिर हुए हैं. आज की इस कड़ी में पेश हैं 'जवानी' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

    सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहां
    ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहां
    ख़्वाजा मीर दर्द

    हया नहीं है ज़माने की आंख में बाक़ी
    ख़ुदा करे कि जवानी तेरी रहे बेदाग़
    अल्लामा इक़बाल

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    कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं
    जा मय-कदे से मेरी जवानी उठा के ला
    अब्दुल हमीद अदम

    रात भी नींद भी कहानी भी
    हाए क्या चीज़ है जवानी भी
    फ़िराक़ गोरखपुरी

    अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया
    हज़ारों आफ़तें लेकर हसीनों पर शबाब आया
    नूह नारवी

    हिज्र को हौसला और वस्ल को फ़ुर्सत दरकार
    इक मुहब्बत के लिए एक जवानी कम है
    अब्बास ताबिश

    ज़िक्र जब छिड़ गया क़यामत का
    बात पहुंची तेरी जवानी तक
    फ़ानी बदायूंनी

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    जवां होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया पर्दा
    हया यक-लख़्त आई और शबाब आहिस्ता आहिस्ता
    अमीर मीनाई

    सफ़र पीछे की जानिब है क़दम आगे है मेरा
    मैं बूढ़ा होता जाता हूं जवां होने की ख़ातिर
    ज़फ़र इक़बाल

    अब जो इक हसरत-ए-जवानी है
    उम्र-ए-रफ़्ता की ये निशानी है
    मीर तक़ी मीर

    इक अदा मस्ताना सर से पांव तक छाई हुई
    उफ़ तेरी काफ़िर जवानी जोश पर आई हुई
    दाग़ देहलवी (साभार/रेख्‍़ता)

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