Shayari: 'अपना भी तअल्लुक़ था दशहरे से दिवाली से', पेश है दिवाली पर शायरी

Shayari: 'दीपावली से आज ज़मीन आसमान है...'Image Credit/Pexels Burak-K
Shayari: 'दीपावली से आज ज़मीन आसमान है...'Image Credit/Pexels Burak-K

Shayari: शेरो-सुख़न (Urdu Shayari) की दुनिया मुहब्‍बत से लबरेज़ जज्‍़बातों की दुनिया है. इसमें जिंदगी के सभी रंग मौजूद हैं. आज पेश है 'दिवाली' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग...

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  • Last Updated: November 12, 2020, 9:03 AM IST
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Shayari: उर्दू शायरी (Urdu Shayari) इश्‍क़ से लबरेज़ कलाम है. इसमें मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है तो इंसान से जुड़े दूसरे जज्‍़बात (Emotion), विषयों पर भी क़लम उठाई गई है. फिर बात चाहें होली, ईद की हो या चर्चा रोशनी के त्‍योहार दिवाली का हो. शायरों के यहां इसे भी बहुत खूबसूरत अंदाज़ में पेश किया गया है. शायरों ने हर विषय पर क़लम उठाई है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे कलाम जिसमें बात अगर रोशनी की हो, दिवाली की हो. आज की इस कड़ी में पेश है 'दिवाली' पर शायरों का नज़रिया और उनके कलाम के चंद रंग. आप भी इसका लुत्‍फ़ उठाइए.

सभी के दीप सुंदर हैं हमारे क्या तुम्हारे क्या
उजाला हर तरफ़ है इस किनारे उस किनारे क्या
हफ़ीज़ बनारसी
था इंतिज़ार मनाएंगे मिल के दिवाली
न तुम ही लौट के आए न वक़्त-ए-शाम हुआ


आनिस मुईन

होने दो चराग़ां महलों में क्या हम को अगर दिवाली है
मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम मज़दूर की दुनिया काली है
जमील मज़हरी

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वो दिन भी हाए क्या दिन थे जब अपना भी तअल्लुक़ था
दशहरे से दिवाली से बसंतों से बहारों से
कैफ़ भोपाली

आज की रात दिवाली है दीए रौशन हैं
आज की रात ये लगता है मैं सो सकता हूं
अज़्म शाकरी

हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई
जैसे कि दिवाली हो कि दिया जलता जाए बुझता जाए
नुशूर वाहिदी

राहों में जान घर में चराग़ों से शान है
दीपावली से आज ज़मीन आसमान है
ओबैद आज़म आज़मी

मेले में गर नज़र न आता रूप किसी मतवाली का
फीका फीका रह जाता त्यौहार भी इस दिवाली का
मुमताज़ गुर्मानी

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जो सुनते हैं कि तेरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
जमुना प्रसाद राही
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